मुरादाबाद कांग्रेस में कुर्सी की जंग: चाचा-भतीजे के रिश्ते टकराए, बंद लिफाफे से जल्द तय होंगे नए अध्यक्ष!
कांग्रेस हाईकमान ने मुरादाबाद में जिला और महानगर अध्यक्षों के नामों पर मंथन पूरा कर लिफाफा बंद कर दिया है, ...और पढ़ें

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HighLights
युवा नेता की बच भी सकती है कुर्सी, प्रमोशन भी होने की है चर्चा
अधिवक्ता को जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद, जल्द मिलेगी नई टीम
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के बाद जिले में संगठन की कमान को लेकर चल रही खींचतान अब निर्णायक मोड़ पर है। जिला और महानगर अध्यक्ष के नामों पर हाईकमान ने मंथन पूरा करके लिफाफा बंद कर दिया है। दावेदारों को अब बंद लिफाफा खुलने का इंतजार है।
पूर्व विधायक के परिवार के जुड़े एक युवा नेता की कुर्सी बचने और प्रमोशन होने दोनों की चर्चा है। एक वरिष्ठ अधिवक्ता को भी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। इसी सप्ताह किसी भी दिन नए जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष के नाम की घोषणा होनी है।
कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत अगस्त में छत्तीसगढ़ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री मोहन मरकाम ने मुरादाबाद में करीब एक सप्ताह रहकर संगठन की नब्ज टटोली थी।
उन्होंने पार्टी नेताओं, पुराने कार्यकर्ताओं और अध्यक्ष पद के दावेदारों से मुलाकात कर फीडबैक लिया था। इसके बाद रिपोर्ट हाईकमान को सौंप दी थी। इस दौरान जिलाध्यक्ष पद के लिए पूर्व जिलाध्यक्ष असलम खुर्शीद, अजय सारस्वत सैनी, देशराज शर्मा, प्रियांक चौधरी, वसीम खान, जेहरा-बी समेत करीब 15 लोगों ने दावेदारी की।
महानगर कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष रहे सचिन प्रेमी ने भी जिलाध्यक्ष पद के लिए आवेदन किया था। वर्तमान जिलाध्यक्ष विनोद गुम्बर खुद को सार्वजनिक रूप से दावेदार नहीं बताते रहे हैं, लेकिन दोबारा जिम्मेदारी संभालने की उनकी इच्छा को लेकर भी संगठन में चर्चा रही।
महानगर अध्यक्ष पद की तस्वीर और भी दिलचस्प रही। यहां वर्तमान महानगर अध्यक्ष हाजी जुनैद इकराम के साथ पूर्व महानगर अध्यक्ष अनुभव महरोत्रा, बार अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता और अब्बास अली एडवोकेट समेत करीब नौ नाम चर्चा में रहे।
हाजी रिजवान कुरैशी का नाम जिलाध्यक्ष पद के लिए भी सामने आया था। वह महानगर अध्यक्ष पद के लिए भी दावेदार बताए जा रहे हैं हालांकि वह अभी तक किसी भी पद के लिए दावेदारी से इन्कार कर रहे हैं।
ऐसे में दोनों अध्यक्ष पदों की लड़ाई में संगठन के साथ रिश्तों का समीकरण भी चर्चा का विषय बना है। हाजी जुनैद इकराम के पिता हाजी इकराम कुरैशी पूर्व विधायक हैं।
उनके तहेरे भाई हाजी रिजवान कुरैशी की दावेदारी ने महानगर अध्यक्ष पद की दौड़ को और रोचक बना दिया। दोनों की ओर से हाईकमान तक अपनी-अपनी पैरवी हो रही है।
चार सितंबर को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में संगठन को लेकर बैठक के बाद नामों के पैनल पर अंतिम स्तर का मंथन हो चुका है। संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल समेत हाईकमान स्तर पर चर्चा के बाद नामों को अंतिम रूप देकर लिफाफा बंद कर दिया है।
अब सभी की निगाहें उसी लिफाफे पर टिकी हैं। कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने की कवायद में जुटी है। ऐसे में उम्र, अनुभव, सक्रियता और संगठन में पकड़ जैसे पहलुओं को भी दावेदारों की कसौटी माना जा रहा है। कौन जिला संभालेगा और किसे महानगर की कमान मिलेगी, इसका जवाब अब बंद लिफाफा खुलते ही सामने आएगा।
