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'संगठन एक, सियासी खेमे अनेक...' 2027 चुनाव से पहले मुरादाबाद BJP में बढ़ी रार, 6 सीटों की चुनौती के बीच सामने आई गुटबाजी

Published: Tue, 27 Oct 2026 05:33 PM (IST)

विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मुरादाबाद भाजपा में अंदरूनी खींचतान तेज हो गई है। स्थानीय विवादों से लेकर संगठनात्मक फैसलों ...और पढ़ें

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HighLights

  1. ठाकुरद्वारा के विवाद से महानगर की खेमेबंदी तक, कई मोर्चों पर आमने-सामने नेता

  2. टिकट की दावेदारी, संगठनात्मक फैसलों और वर्चस्व की लड़ाई ने बढ़ाई नेतृत्व की चुनौती

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। विधानसभा चुनाव की आहट के बीच भाजपा में चुनावी तैयारी के साथ अंदरूनी सियासी उठापटक भी तेज हो गई है। विपक्ष से मुकाबले के लिए बूथ मजबूत करने और मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कवायद चल रही है। लेकिन, पार्टी के भीतर नेताओं के अलग-अलग खेमे चुनौती बने हुए हैं।

ठाकुरद्वारा के नारायणपुर छंगा गांव आंबेडकर प्रतिमा क्षतिग्रस्त प्रकरण के बाद अब कूड़े के विवाद में भी राजपाल चौहान और अजय प्रताप सिंह आमने-सामने हैं। जिले के साथ महानगर संगठन की अंदरूनी खींचतान भी किसी से छिपी नहीं है।

ठाकुरद्वारा में नारायणपुर छंगा गांव में डाॅ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा क्षतिग्रस्त होने के बाद विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया। मामले में 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी रहे अजय प्रताप सिंह समेत कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई।

दूसरे पक्ष की ओर से भी आरोप लगाए गए। प्रकरण में भाजपा के अलग-अलग नेताओं के सक्रिय होने और एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोलने से स्थानीय राजनीति में तल्खी बढ़ी।

वहीं, अब गांव में कूड़े के विवाद में दोनों के आमने-सामने आने और निरीक्षक को हटाए जाने के घटनाक्रम ने भी संगठन के भीतर चल रही खींचतान को चर्चा में ला दिया है।

महानगर की राजनीति में भी खेमेबंदी के कई उदाहरण सामने आए हैं। शहर विधायक रितेश गुप्ता और महापौर विनोद अग्रवाल के बीच सियासी खींचतान किसी से छिपी नहीं है।

कुंदरकी विधायक ठाकुर रामवीर सिंह व जिला पंचायत अध्यक्ष डाॅ. शैफाली सिंह चौहान के बीच भी यही स्थिति है। संगठन में बीते दिनों जिला व महानगर में मोर्चों के अध्यक्षों के चयन को लेकर भी नेताओं में सहमति बनाने की नौबत आई।

इधर, महानगर के पूर्व मीडिया प्रभारी राहुल सेठी ने अक्टूबर में इस्तीफा देकर महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कार्यकर्ताओं की अनदेखी, परिवारवाद और संगठनात्मक गतिविधियों में निष्क्रियता के आरोप लगाए।

मगर, कुछ दिन बाद ही वह अध्यक्ष के साथ फोटो खिंचवाते दिखे। फिलहाल, जिला अध्यक्ष आकाश पाल व महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला का वर्तमान परिस्थितियों पर कहना है कि संगठन एक है। मनमुटाव की दशा में बैठकर हल निकाला जाता है। सभी एकजुट हैं।

कमेटी गठन से कार्यक्रमों तक दिखी खेमेबंदी

भाजपा में असंतोष केवल स्थानीय विवादों तक सीमित नहीं है। जिला कार्यकारिणी के गठन पर पूर्व पदाधिकारियों ने सवाल उठाए और परिवारवाद समेत चयन प्रक्रिया पर आरोप लगाए।

पार्टी के कार्यक्रमों, पदाधिकारियों के चयन और नेताओं की मौजूदगी को लेकर भी समय-समय पर असहमति उजागर हुई है। इससे कार्यकर्ताओं के सामने भी असमंजस की स्थिति है कि संगठनात्मक गतिविधियों में किस खेमे के साथ खड़े हों।

छह सीटों पर दांव, एकजुटता सबसे बड़ी चुनौती

मुरादाबाद जिले की छह विधानसभा सीटों शहर, देहात, बिलारी, ठाकुरद्वारा, कुंदरकी व कांठ पर 2027 के चुनाव में भाजपा के सामने अपनी स्थिति मजबूत करने की चुनौती है।

2022 में पार्टी जिले की छह में से केवल नगर सीट जीत सकी थी। ऐसे में टिकट की दावेदारी, नेताओं के बीच प्रभाव बढ़ाने की कोशिश और संगठनात्मक पदों को लेकर प्रतिस्पर्धा पार्टी के लिए अहम सवाल हैं।

चुनाव से पहले गुटबाजी पर नियंत्रण और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय के बजाय अपनों की खींचतान ही पार्टी की चुनावी रणनीति पर भारी पड़ सकती है।

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