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1 अक्टूबर से बदल रहे हैं नियम, 2 साल पुराने जन्म प्रमाणपत्र के लिए अब कोर्ट के चक्कर काटेगा आम आदमी!

Published: Mon, 21 Sep 2026 04:16 PM (IST)

मुरादाबाद में दो साल पुराने जन्म प्रमाणपत्र आवेदनों में पेंच फंसा है, जिससे सैकड़ों लोग परेशान हैं। 1 अक्टूबर से ...और पढ़ें

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HighLights

  1. दो साल की सीमा पार होने पर एक अक्टूबर से न्यायिक मजिस्ट्रेट की मंजूरी अनिवार्य

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन करने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दो साल पुराने जन्म के मामलों में आवेदन प्रक्रिया अटकने से लोगों को पंचायत और प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। सिर्फ कुंदरकी ब्लाक में ही करीब 700 आवेदन लंबित बताए जा रहे हैं।

इसी तरह जिले के अन्य ब्लाकों का भी हाल है। आठों ब्लाकों में सैकड़ों आवेदन लंबित हैं। दस्तावेज और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी जन्म प्रमाणपत्र जारी नहीं हो पा रहे हैं।

दरअसल, जन्म-मृत्यु पंजीकरण की व्यवस्था में एक अक्टूबर से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। भारत के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से 17 सितंबर को जारी सूचना के अनुसार, जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन अधिनियम, 2026 के नए प्रावधान एक अक्टूबर से लागू होंगे।

इसके तहत जन्म प्रमाण लेने के लिए एक वर्ष से अधिक और दो वर्ष के भीतर पंजीकरण के लिए उपजिलाधिकारी या जिलाधिकारी के अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत होगी।

दो वर्ष से अधिक पुराने मामले में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य होगा। वर्तमान व्यवस्था में भी देरी से जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए अलग-अलग स्तर पर जांच और अनुमति की प्रक्रिया है।

29 दिन तक के मामलों में ग्राम विकास अधिकारी/सचिव के स्तर से प्रक्रिया पूरी होती है। इसके बाद निर्धारित अवधि के अनुसार पंचायती राज विभाग और सक्षम अधिकारियों की भूमिका आती है।

एक वर्ष से अधिक पुराने मामलों में सत्यापन के बाद एसडीएम व सक्षम अधिकारी की अनुमति जरूरी होती है। सबसे बड़ी दिक्कत उन आवेदनों में सामने आ रही है जिनमें जन्म को दो वर्ष या उससे अधिक समय बीत चुका है।

एक अक्टूबर से ऐसे मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होने के कारण अधिकारी भी लंबित मामलों पर निर्णय लेने में सावधानी बरत रहे हैं। उन्हें नई व्यवस्था लागू होने से पहले लंबित आवेदनों के निस्तारण और आगे की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश का इंतजार है।

पंचायती राज विभाग के पास आइजीआरएस के माध्यम से जन्म प्रमाणपत्र से जुड़ी शिकायतें भी लगातार पहुंच रही हैं। आवेदकों का कहना है कि दस्तावेज देने और सत्यापन कराने के बाद भी प्रमाणपत्र नहीं मिल पा रहा है। इससे स्कूल प्रवेश, आधार, पासपोर्ट और अन्य जरूरी कामों के लिए जन्म प्रमाणपत्र की जरूरत वाले लोगों की परेशानी बढ़ रही है।

 

जन्म प्रमाणपत्र के लंबित मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जांच और सत्यापन कराया जा रहा है। एक साल की अवधि वाले जन्म प्रमाण बनने में अभी तक कोई दिक्कत नहीं है। एक अक्टूबर से नई व्यवस्था लागू होनी है, इसलिए दो साल से अधिक पुराने मामलों को लेकर शासन के निर्देशों के अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी।

- आलोक शर्मा, जिला पंचायत राज अधिकारी


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