180 करोड़ पानी में! मुरादाबाद में 118 सड़कें बनीं, फिर भी उड़ रही धूल; रैंकिंग में भी शहर पिछड़ा
मुरादाबाद में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनकैप) के तहत 180 करोड़ रुपये खर्च कर 118 सड़कें बनाई गईं, लेकिन एक-दो ...और पढ़ें

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HighLights
शहर में एनकैप के बजट से बनीं कई सड़कें एक से दो साल में गड्ढों में बदलीं
एनकैप का बजट हर साल नगर निगम को प्रदूषण की रोकथाम के लिए मिलता है
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनकैप) के तहत तीन वर्षों में मुरादाबाद को मिले करीब 180 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इस रकम से सड़कें, फुटपाथ और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अन्य कार्य कराए गए। एनकैप के तहत 118 सड़कें बनाई गईं, लेकिन इनमें से कई सड़कें बनने के एक-दो साल के भीतर ही जगह-जगह गड्ढों में बदल गई हैं।
यही नहीं तीन दिन पहले दिशा की बैठक में आपत्ति जताई जा चुकी है कि केवल सड़कें ही बना दीं धूल रोकने को फव्वारा व अन्य उपकरण भी खरीदने चाहिए थे, जिसका कोई हिसाब नहीं दिया गया।
सवाल है कि 158 करोड़ रुपये खर्च करके भी स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में आठवें स्थान पर आए जबकि पिछले वर्ष दूसरे स्थान अपना शहर था। सड़कों पर निर्माण सामग्री रखने से भी धूल उड़ती है, जिससे पीएम-10 में वृद्धि का कारण है।
केस-1: तहसील सदर से हिमगिरी तिराहा तक एक साल पहले करीब एक किलोमीटर सड़क निर्माण पर लगभग 40 लाख रुपये खर्च किए गए। अब इसमें कई जगह गड्ढे गहरे गड्ढे हो गए हैं।
केस-2: सम्राट अशोक नगर से बुद्धा पार्क तक डेढ़ साल पहले दो किलोमीटर सड़क निर्माण पर करीब 1.25 करोड़ रुपये खर्च हुए थे अब इसमें जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं।
केस-3: मिलन विहार में गंगा मार्बल से भल्ला टाइल्स तक करीब 600 मीटर सड़क और नाला करीब एक करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था। इसमें भी कई जगह गड्ढे हो गए है।
निर्माण कार्यों ने भी बढ़ाई धूल की समस्या
शहर में सीएम ग्रिड योजना के निर्माण कार्य भी प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों पर भारी पड़े। दाऊ दयाल खन्ना नगर समेत कई क्षेत्रों में लंबे समय तक सड़क निर्माण और खोदाई का काम चलता रहा।
निर्माण सामग्री और उड़ती धूल से आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण बढ़ा। योजना के कार्यों में धूल नियंत्रण को लेकर लापरवाही पर करीब चार करोड़ रुपये की पेनल्टी भी लग चुकी है।
छह स्थानों पर यंत्र, पुराने शहर के प्रदूषण पर भी सवाल
शहर में बुद्धि विहार, जिगर कालोनी, काशीराम नगर, ट्रांसपोर्ट नगर, रोजगार कार्यालय और पीटीसी में प्रदूषण मापक यंत्र लगे हैं। इस बार रैंकिंग के लिए उन क्षेत्रों के आंकड़ों को भी शामिल किए जाने की बात सामने आ रही है, जहां स्थायी प्रदूषण मापक यंत्र नहीं लगे हैं।
पुराने शहर के लालबाग, नवाबपुरा, बारबलान, कटघर और बारसी नगर जैसे इलाकों में पीतल गलाने वाली इकाइयों और कोयले से चलने वाली भट्ठियों का धुआं भी पीएम-10 बढ़ने की एक वजह माना जा रहा है। सड़क की धूल, निर्माण कार्यों और औद्योगिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने से शहर की स्थिति खराब हुई।
तीन वर्षों में एनकैप (NCAP) का बजट और खर्च
| वित्तीय वर्ष | प्राप्त राशि |
| 2024-25 | करीब 61 करोड़ रुपये |
| 2025-26 | करीब 89 करोड़ रुपये |
| 2026-27 | करीब 40 करोड़ रुपये |
एनकैप के तहत मिले बजट से प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगातार कार्य कराए गए हैं। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में रैंकिंग गिरने के कारणों का अध्ययन किया जाएगा और आगे प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
- अजीत कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त
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