1.5 करोड़ के पुराने नोट तो पकड़े गए, पर मास्टरमाइंड और बैंक 'गायब'! मुरादाबाद पुलिस की चार्जशीट पर उठे बड़े सवाल
मुरादाबाद में डेढ़ करोड़ के पुराने नोटों की बरामदगी के मामले में पुलिस ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर चार्जशीट ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड इमेज है।
HighLights
किस बैंक में जा रहे थे रुपये, कौन था सरगना हो गया दफन
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। बीते साल मुरादाबाद के डिलारी थाना पुलिस ने पकड़े डेढ़ करोड़ के पुराने नोटों के प्रकरण में नौ गुर्गों की गिरफ्तारी के बाद मामले में चार्जशीट लगाकर कई सवालों को दफन कर दिया गया। आखिर यह नोट किस बैंक में जाते थे और इस गिरोह का सरगना कौन था वहां तक पुलिस की जांच या तो पहुंची नहीं या फिर पहुंचकर शांत हो गई।
मामले की जांच पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फैले इस गिरोह हर सदस्य तक पुलिस नहीं पहुंच पाई। सहारनपुर की बैंक में मिले नकली नोट के बाद मुरादाबाद के इस प्रकरण से भी जोड़कर देखा जा रहा है। आखिर उस बैंक तक किसने नोट पहुंचाए इसकी जांच में जुटी सहारनपुर पुलिस की रडार में पुराने नोटों की तस्करी करने वाला गिरोह भी है।
डिलारी पुलिस ने 19 मई को एक कार से डेढ़ करोड़ रुपये के पुराने नोट पकड़े थे। पुलिस ने पुरानों की करेंसी के साथ ही यूसुफ निवासी नूरपुर बिजनौर, सत्तार निवासी गुहावर नूरपुर बिजनौर और फैसल निवासी सैदनगली जिला अमरोहा को गिरफ्तार किया था।
इसके बाद पुलिस ने परवेज खान निवासी मबाना मेरठ, संतोष प्रसाद निवासी मझोला, सिपाही विक्की गौतम जलीलपुर अमरोहा, मोहम्मद यासीन, मोहम्मद रियाज निवासी अहमदनगर रामपुर समेत नौ को गिरफ्तार करके जेल भेजा था।
पुलिस जांच में पता चला था कि पुरानी करेंसी का गिरोह का नेटवर्क पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जनपदों तक फैला हुआ है। नोट की खरीद करने से पहले वाट्सएप ग्रुप पर पुराने नोट की वीडियो मंगवाने के बाद डील फाइनल करते थे।
10 प्रतिशत में नोट की खरीदारी होने के बाद दिल्ली की बैंकों में नोट खपाते थे। इंटरनेट मीडिया के माध्यम से पूरा नेटवर्क बना रखा था। पुलिस जांच में पता चला था कि इस गिरोह के मुख्य सरगना मेरठ के दो लोगों का नाम सामने आया था।
उसमें भी पुलिस एक ही आरोपित को गिरफ्तार कर बाकी। बाकी दूसरा कौन था यह आज तक पता नहीं चल पाया है। वहीं यह भी सामने आया था कि यह नोट दिल्ली के बैंकों में खपाए जाते थे, लेकिन वह बैंक कौन सी थी यह सवाल का आज तक कोई जवाब नहीं मिल पाया।
पुलिस ने कुछ दिनों तक कसरत करके नौ आरोपितों को गिरफ्तार जरूर किया, लेकिन मुख्य सरगना समेत बैंक वह स्टाफ बच गया जो इसमें शामिल था। पुलिस ने इसी साल 13 जनवरी को मामले में चार्जशीट लगाकर खत्म कर दिया और कई सवाल आज भी जस के तस हैं।
अब सहारनुपर बैंक में नकली नोट मिलने के बाद एक बार फिर इस प्रकरण को हवा मिल गई। सहारनपुर पुलिस नकली नोट बैंक तक पहुंचाने वाले गिरोह में इस गिरोह के कुछ गुर्गे भी रडार पर है। एसपी देहात कुंवर आकाश सिंह ने बताया कि सभी आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई करने के बाद मामले में चार्जशीट लगा दी है।
बड़ा सवाल किस बैंक में जाते थे नोट
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह था कि आखिर यह पुराने नोट किस बैंक में जाते थे। बैंक का कौन कर्मचारी या अधिकारी इस गिरोह से मिला हुआ था। यह तो तय था कि बिना बैंक में जाए यह नोट बदले नहीं जाते थे, लेकिन डिलारी थाना पुलिस उस बैंक या फिर कर्मचारी व अधिकारी तक नहीं पहुंच पाई जो इस गिरोह से मिला हुआ था।
दिल्ली की बैंकों का नाम आया था सामने
शुरुआत पुलिस जांच में सामने आया था कि यह गिरोह पुराने नोट लेकर दिल्ली की बैंकों में जाकर खपा देता है। उस समय पुलिस बैंक का जो भी स्टाफ मिला हुआ है उसे पकड़ने का दावा कर रही थी, लेकिन बाद बैंक के स्टाफ तो छोड़िये इस गिरोह में ही शामिल कुछ बड़े नाम भी सामने नहीं आ पाए।
