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15 साल पुराना 'खूनी' सस्पेंस खत्म! DM और DIG पर हमला करने वाले 16 दंगाई दोषी करार, जानें पूरा मामला

Published: Mon, 23 Mar 2026 06:59 PM (IST)

मुरादाबाद में 15 साल पुराने एक मामले में, जहाँ डीआईजी और डीएम पर भीड़ ने हमला किया था, 16 लोगों ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक चित्र

प्रतीकात्मक चित्र

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। वर्ष 2011 में मैनाठेर पुलिस लूट के आरोपित को गिरफ्तार करने पहुंची थी। पुलिस टीम पर धर्मग्रंथ की बेहुरमती का आरोप लगाते हुए मारपीट की थी। अफवाह फैलने के बाद जगह-जगह हंगामा और प्रदर्शन हुए। डींगरपुर में प्रदर्शन के दौरान हजारों लोग इकट्ठा हुए।

प्रदर्शन में हुई तकरीरों से माहौल खराब हो गया था। भीड़ ने संभल रोड से गुजर रहे लोगों के साथ मारपीट शुरू कर दी और आसपास के गांवों में घुसकर बवाल किया था। मुरादाबाद से डीआइजी अशोक कुमार और डीएम राजशेखर भी घटनास्थल पर पहुंचे थे।

पहले तो अधिकारी प्रदर्शनकारियों से वार्ता करने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाए थे। बाद में जब वे आगे बढ़े तो भीड़ हमलावर हो गई थी। डीआइजी के हमराह उन्हें छोड़कर भाग खड़े हुए। डीआइजी खुद को बचाने के लिए भागकर पेट्रोल पंप में बनी कोठरी में छिप गए।

प्रदर्शनकारियों ने दरवाजा तोड़कर उन्हें बाहर निकाल लिया और हमला कर दिया था। भीड़ के हमले में डीआइजी बुरी तरह घायल हो गए। हमलावर उन्हें मरा हुआ जानकर छोड़ गए और उनकी रिवाल्वर तक लूट ली। इस मामले की सुनवाई एडीजे कोर्ट दो में चल रही थी।

इस मामले में 19 आरोपित थे। इस दौरान दो की मृत्यु हो गई। जबकि एक आरोपित नाबालिग था। उसकी फाइल अलग कर दी गई थी। 16 आरोपितों को कोट ने दोषी ठहरा दिया। इस दौरान 14 आरोपित कोर्ट पहुंचे थे। जिन्हें जेल भेज दिया। जबकि दो आरोपित जो नहीं पहुंचे थे, उनके खिलाफ वारंट जारी कर दिए।


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