3 साल की कोशिश के बाद भी 50% लक्ष्य पीछे! एमडीए की शिवालिक आवासीय योजना में अब 1 साल और इंतजार
मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की शिवालिक आवासीय योजना में जमीन अधिग्रहण धीमा है, जिससे पहले चरण का आधा लक्ष्य ही पूरा ...और पढ़ें
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HighLights
अब तक 125 हेक्टेयर ही खरीदी, किसानों की सहमति लेने की सुस्ती से लांचिंग में देरी
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। किसानों से सहमति लेकर जमीन खरीदने में तीन साल लगाने के बाद भी मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) शिवालिक आवासीय योजना के प्रथम चरण का आधा लक्ष्य ही पूरा कर सका है। दो साल में 250 हेक्टेयर के लक्ष्य के सापेक्ष 125 हेक्टेयर जमीन खरीदी जा सकी है।
ऐसे में सवाल है कि जब जमीन खरीदने की प्रक्रिया ही इतनी धीमी है तो लोगों को भूखंड उपलब्ध कराने का दावा कब पूरा होगा? किसानों की सहमति से जमीन खरीदने की प्रक्रिया पूरी होने और इसके बाद विकास कार्य शुरू होने में अभी लंबा समय लग सकता है।
यही वजह है कि योजना की लांचिंग में कम से कम एक साल का इंतजार करना पड़ सकता है। शिवालिक आवासीय योजना को तीन चरणों में विकसित करने की तैयारी है। तीनों चरणों के लिए एक-एक करके जमीन खरीदी जानी है।
प्रथम चरण में ही जमीन खरीदने की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। किसानों की सहमति लेने में एमडीए को तीन साल लग गए। इसके बावजूद अब तक लक्ष्य का आधा हिस्सा ही खरीदा जा सका है।
ऐसे में अगले चरणों के लिए जमीन जुटाने में कितना समय लगेगा, यह भी बड़ा सवाल है। योजना के इंतजार में बैठे लोगों को अभी भूखंड मिलने की तारीख का स्पष्ट जवाब नहीं मिल पा रहा है।
सस्ते भूखंडों के दावे, लेकिन कब मिलेगा लाभ
एमडीए अधिकारियों के मुताबिक, शिवालिक आवासीय योजना में गोविंदपुरम और सह्याद्रि आवासीय योजना के मुकाबले सस्ते भूखंड उपलब्ध कराने की तैयारी है। इसी उम्मीद में लोग प्राधिकरण कार्यालय पहुंचकर जानकारी ले रहे हैं।
हालांकि, अभी न तो योजना की लांचिंग की तारीख तय है और न ही भूखंडों की कीमत और उपलब्धता स्पष्ट हुई है। जमीन खरीद पूरी होने के बाद ही इनका निर्धारण हो सकेगा।
ऐसे में सस्ते भूखंडों की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को फिलहाल इंतजार ही करना होगा। शिवालिक आवासीय योजना को रिंग रोड से जोड़ने की तैयारी भी की जा रही है। इससे योजना की कनेक्टिविटी बेहतर होने और आवागमन आसान होने की उम्मीद है।
किसानों की सहमति लेने में काफी प्रयास करने पड़ते हैं। किसानों के साथ बैठकें भी हो रही हैं। सहमति और अन्य प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद ही जमीन खरीदने का सिलसिला जारी है।
- अनुभव सिंह, उपाध्यक्ष, एमडीए
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