रितेश द्विवेदी , मुरादाबाद : सेना के शौर्य, पराक्रम से कारगिल युद्ध में जीत मिली थी। यह युद्ध नहीं सिर्फ संघर्ष था। ऐसा हम नहीं सेना मानती है। सूचना के अधिकार में रक्षा मंत्रालय ने जवाब दिया है। 

भारतीय सेना ने 1999 में कारगिल की पहाडिय़ों में अपने पराक्रम का प्रदर्शन किया था। भारतीय सेना के पराक्रम से घबराकर घुसपैठियों के रूप में आए पाकिस्तानी सैनिकों को भागना पड़ा था। इस लड़ाई में बोफोर्स तोप के साथ ही मिग विमानों ने अपनी ताकत दिखाई थी। दो माह तक चली लड़ाई के बाद कारगिल की पहाडिय़ों को घुसपैठियों से मुक्त करा लिया गया। कारगिल की लड़ाई में पांच हजार बम, तीन सौ मोर्टार दागे गए थे लेकिन, इसके बाद भी भारतीय सेना इस लड़ाई को युद्ध नहीं मानती है। इस लड़ाई में भारतीय सेना के साढ़े पांच सौ सैनिक और अफसर शहीद हुए थे जबकि पाकिस्तानियों के मरने का आंकड़ा इससे तीन गुना अधिक तीन हजार के करीब था। इस संबंध में दैनिक जागरण ने रक्षा मंत्रालय से आरटीआइ के माध्यम से तीन सवाल पूछे। इसमें पहला सवाल आजादी के बाद भारत ने कितने युद्ध लड़े और इन युद्ध में कितनी क्षति हुई। आरटीआइ के सवाल का जवाब देते हुए रक्षा मंत्रालय के जनसूचना अधिकारी वीरेंद्र कुमार राना ने बताया आजादी के बाद से भारतीय सेना ने कुल तीन युद्ध लड़े हैं। इनमें वर्ष 1962 में इंडो-चाइना वार, 1965 इंडो-पाक वार, 1971 इंडो-पाक वार है। इसके अलावा साल 1999 में कारगिल संघर्ष हुआ था। रक्षा मंत्रालय ने कारगिल में भारतीय सेना द्वारा लड़ी गई इस लड़ाई को युद्ध नहीं माना। इस लड़ाई को आधिकारिक रूप से संघर्ष के रूप में दर्ज किया है। पूरी दुनिया द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कारगिल को सबसे बड़ी लड़ाई के रूप में देखती है। यहां भारतीय सेना ने 18 हजार फिट की ऊंचाई पर सबसे दुर्गम क्षेत्र में लड़ाई लड़कर और जीतकर अपने पराक्रम के बारे में दुनिया को बताया था। 

Posted By: Narendra Kumar

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