यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 13, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Kalki Mahotsav 2021 : मुशायरे में देशभर से जुटे कवि, शानदार रचनाओं से खींंचा लोगों का ध्यान
Kalki Mahotsav 2021 दिल्ली की कवयित्री पदमिनी शर्मा ने देश की संस्कृति को याद दिलाते हुए सुनाया कि भारत की ...और पढ़ें

मुरादाबाद, संवाद सहयोगी। Kalki Mahotsav 2021 : सम्भल के कल्कि महोत्सव के चौथे दिन शाम को आयोजित सांस्कृतिक संध्या में कवि सम्मेलन व मुशायरे का आयोजन किया गया। जहां पर कार्यक्रम को देखने व मौजूद कलाकारों को सुनने के लिए लोगों की भारी भीड़ मौजूद रही। इतना ही नहीं कविता, गजल व शायरी को सुनकर लोग अपने आप को तालियां बजाने से नहीं रोक पाए और इस कारण पूरा पंड़ाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा, जिससे कलाकारों का उत्साह बढ़ रहा था।
तहसील क्षेत्र के एचोड़ा कम्बोह में कल्कि धाम पर आयोजित पांच दिवसीय श्री कल्कि महोत्सव के चौथे दिन सांस्कृतिक संध्या के दौरान कवि सम्मेलन व मुशायरे का आयोजन किया गया। जहां पर देश के जाने माने कई कवि, कवियत्री व शायरों ने अपनी कविताएं व कलाम पेश किए, जिसे सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोग मंत्रमुग्ध हो गए। लोगों में कवि सम्मेलन व मुशायरे को लेकर इतना उत्साह था कि पंड़ाल में लोगों के बैठने से जगह भर जाने के बाद कुछ लोग तो पंड़ाल के आसपास तो कुछ बाहर खड़े होकर उसका आनंद ले रहे थे। कार्यक्रम की शुरूआत से पहले कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने सभी अतिथि कवि, कवियत्री व शायरों का स्वागत किया तो पंड़ाल में मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का संचालन कासगंज से आए नदीम फरूख ने किया। जहां सबसे पहले मेरठ से आईंं कवियत्री अनामिका जैन अंबर ने अपना काव्य पाठ किया। जैसे ही अनामिका मंच पर पहुंचीं तो वहां मौजूद लोगों में उत्साह छा गया और उन्होंने जोरदार तालियां बजाकर अनामिका अंबर का स्वागत किया। अपनी प्रस्तुति देते हुए अनामिका ने सबसे पहले देश और मां भारती को नमन करने के बाद अपना काव्य पाठ किया। इसके बाद उन्होंने सुनाया कि तुम्हारे दिल में रहता जो वही अरमान दिल में है, मेरा मजहब कोई भी हो मगर इमान दिल में है, अमीरी यता यह कि कलम देकर के ईश्वर ने, मुहब्बत शायरी में और हिंदुस्तान दिल में है।

मुंबई से आए गजलकार जमील असगर ने सुनाया कि गमों से दर्द से दो दो हाथ कर लूगां, खुशी के रंग से खुशरंग हयात कर लूगां, मेरे महबूब का नंबर तो बता दे कोई, लगा के काल मैं उससे बात कर लूगां। कभी कभी नहीं अक्सर बदलते रहते हैं, हर इक मोड़ पे ये मंजर बदलते रहते है, भरोसा उनका करें भी तो किस भरोसे पर, वो अपने फोन का नंबर बदलते रहते हैं। अलीगढ़ से आए गीतकार डा. विष्णु सक्सेना ने अपनी प्रस्तुति देते हुए कहा कि रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा, एक आई लहर तो कुछ बचेगा नहीं, तुमने पत्थर सा दिल कह तो दिया, पत्थर पर लिखोगे तो मिटेगा नहीं। तू जो ख्वाबों में भी आ जाए तो मेला कर दें, गम की मरथल में भी बरसात का रैला कर दें, याद वो है ही नहीं आए जो तन्हाई में तेरी याद आए तो मेले में अकेला कर दे। मुजफ्फरनगर से आए गजलकार खुर्शीद हैदर ने अपनी गजल पेश करते हुए कहा कि गैर परों पर उड़ सकते है हद से हद दीवारों तक, अंबर तक पर तो वहीं उड़ेंगे जिनके अपने पर होंगे। मेरी जानिब मुहब्बत से न देखो, मुहब्बत पर जबाल आया हुआ है। दिल्ली से आई कवियत्री पदमिनी शर्मा ने देश की संस्कृति को याद दिलाते हुए सुनाया कि भारत की संस्कृति परम पुनीता बचा लो, कर्मों की अदालत में अपनी गीता को बचा लो, मंदिर तो आजकल में बन ही जाएंगे मगर, कलयुग के रावणों से अपनी सीता बचा लो।
