WhatsApp पर APK फाइल भेजकर 42 शहरों में 10 करोड़ उड़ाने वाला 'जामताड़ा गैंग' गिरफ्तार, हैरान कर देगा ठगी का ये तरीका
जामताड़ा गैंग ने WhatsApp पर APK फाइल भेजकर 8 राज्यों के 40 शहरों में 500 से अधिक लोगों से 10 ...और पढ़ें

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HighLights
तीनों आरोपितों के खिलाफ पुलिस ने 910 पन्नों की चार्जशीट की दाखिल
तीनों ने मुरादाबाद शहर से भी की थी 70 लाख रुपये की साइबर ठगी
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। तीन माह का ठिकाना, एक करोड़ रुपये ठगने का टारगेट और फिर दूसरे शहर में जाकर दोबारा से लोगों के वाट्सअप पर एपीके फाइल भेजकर बीते सात साल में 500 से अधिक लोगों से दस करोड़ रुपये की ठगी। शातिर इनके कि ठगी करके रकम भी सीधे खाते में डालने के बजाए ऑनलाइन खरीदारी कर लेते थे। मुरादाबाद में 18 दिन रुके और 16 लोगों से 70 लाख रुपये की ठगी कर ली।
बीते सात सालों में गिरोह के तीनों आरोपितों ने आठ राज्यों के 40 शहराें में पहुंचकर ठगी की वारदात की। आरोपित गुड्डू अंसारी, रफीक अंसारी और करीम अंसारी निवासी जामताड़ा झारखंड की गिरफ्तारी के बाद विवेचक ने जब विवेचना शुरू की तो कई अहम साक्ष्य मिले। पता चला कि नशा करने वाले लोगों को एक हजार रुपये देकर उनसे मोबाइल सिम ले लेते थे।
उन्हीं नंबरों से लोगों को फोन करके ठगते थे। विवेचना में जामताड़ा की एक महिला का नाम भी सामने आया है। महिला अभी तक हत्थे नहीं लगे हैं, लेकिन पुलिस ने तीनों के खिलाफ 910 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है।
आरोपितों ने जामताड़ा से ही आनलाइन ठगी की शुरुआत हुई थी, लेकिन जामताड़ा में सरकार ने कुछ ऐसी साइड पर रोक लगा दी है जिनके माध्यम से ठगी की जा जाती है। उसके बाद से यहां के आरोपित जगह-जगह जाकर आनलाइन ठगी कर रहे थे।
जुलाई माह में तीनों कटघर के भैंसियां गांव में आ गए थे। यहां पर रहकर लोगों से ठगी कर रहे थे। 16 जुलाई को कटघर पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार करके जेल भेजा था।
जांच में सामने आया कि मुरादाबाद से पहले यह गिरोह दिल्ली, बिहार, हरियाणा, उत्तराखंड, बिहार, राजस्थान, झारखंड, बंगाल के 40 शहरों में रहकर करीब दस करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं।
इनके खिलाफ अलग-अलग जगह 15 से अधिक मामले साइबर ठगी के दर्ज थे। विवेचक ने अपनी जांच में उन मुकदमों का विवरण भी दिया है। जांच में सामने आया कि गिरोह में एक महिला भी शामिल है।
यह गिरोह देशभर के लोगों को मोबाइल फोन पर वाट्सएप, एसएमएस और इंटरनेट मीडिया के माध्यम से फर्जी लिंक तथा एपीके फाइल भेजते थे।
इन फाइलों को बैंक अपडेट, केवाईसी, बिजली बिल, कूरियर, सरकारी योजना या अन्य जरूरी सेवाओं के नाम पर डाउनलोड कराने के बाद मोबाइल का एक्सेस हासिल कर लेते थे।
इसके बाद इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई और अन्य संवेदनशील जानकारियां चोरी कर खातों से रकम निकाल लेते थे। इसके अलावा आनलाइन गेमिंग, निवेश और टास्क आधारित योजनाओं में बोनस का लालच देकर भी लोगों से धनराशि ऐंठते थे।
फर्जी कस्टमर केयर नंबरों के माध्यम से भी लोगों को एपीके फाइल डाउनलोड कराकर बैंक खातों से रकम उड़ाते थे। गिरोह संगठित तरीके से फर्जी सिम, म्यूल बैंक खाते का इस्तेमाल करता था। एक शहर में 15 से 20 दिनों तक सक्रिय रहने के बाद सिम कार्ड नष्ट कर देता था।
