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21 नवंबर से पहले भर लें ITR, जरा सी चूक से लगेगा ₹1.50 लाख तक का भारी जुर्माना!

Published: Sat, 31 Oct 2026 03:21 PM (IST)

आयकर विभाग ने ऑडिट वाले मामलों के लिए आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि 21 नवंबर तक बढ़ा दी है। ...और पढ़ें

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HighLights

  1. जिले में एक करोड़ से अधिक टर्नओवर वाली फर्मों पर आयकर विभाग की नजर

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख नजदीक आने के साथ कारोबारियों की मुश्किलें भी बढ़ने लगी हैं। मुरादाबाद में एक करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाली करीब 3500 कारोबारी फर्मों का आडिट निर्धारित समयसीमा तक पूरा नहीं हो सका था। अब इन कारोबारियों के पास रिटर्न दाखिल करने के लिए अब 21 नवंबर तक का समय है।

आयकर विभाग ने आडिट वाले मामलों में रिटर्न जमा करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 21 नवंबर कर दी गई है। यानी कारोबारियों को तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय मिला है।

इनकम टैक्स रिटर्न दस्तावेज़ चेकलिस्ट

हालांकि, आडिट रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तारीख 21 अक्टूबर बीत चुकी है। ऐसे में इन फर्मों से जुड़े कारोबारियों को अपने खातों का मिलान कर रिटर्न दाखिल करने की तैयारी तेज करनी होगी। पिछले रिटर्न चक्र में एक करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाली 25 हजार से अधिक फर्मों ने आयकर रिटर्न दाखिल किया था।

सीए अमन शुक्ला ने बताया कि देर से रिटर्न दाखिल करने पर केवल लेट फीस ही नहीं, बल्कि बकाया टैक्स पर एक प्रतिशत प्रतिमाह की दर से ब्याज भी देना पड़ सकता है।

कारोबारियों और शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए एक और नुकसान है। समय पर रिटर्न दाखिल नहीं करने पर व्यापारिक और पूंजीगत घाटे को अगले वर्षों में समायोजित करने का लाभ प्रभावित हो सकता है।

Tax Deadline Infographic with Hindi Dates

इससे भविष्य में टैक्स की देनदारी बढ़ सकती है। कारोबारियों को रिटर्न दाखिल करने से पहले बैंक खातों, बिक्री, खरीद, जीएसटी, खर्च और टैक्स भुगतान का मिलान करना चाहिए।

वहीं, नौकरीपेशा लोगों को फार्म-16, बैंक ब्याज और टीडीएस की जानकारी जांचनी चाहिए। रिटर्न दाखिल करने के बाद उसका ई-वेरिफिकेशन भी जरूरी है। समय पर रिटर्न भरने से टैक्स रिफंड पाने, बैंक से ऋण लेने और आय का प्रमाण देने में भी आसानी होती है।

देरी पर देना होगा इतना जुर्माना और ब्याज

  • पांच लाख रुपये तक कुल आय होने पर अधिकतम एक हजार रुपये लेट फीस।
  • पांच लाख रुपये से अधिक कुल आय पर पांच हजार रुपये तक लेट फीस।
  • बकाया टैक्स पर धारा 234ए के तहत एक प्रतिशत प्रतिमाह ब्याज।
  • एडवांस टैक्स की कमी पर धारा 234बी और 234सी के तहत भी ब्याज लग सकता है।
  • आडिट अनिवार्य होने के बावजूद रिपोर्ट नहीं देने पर टर्नओवर का 0.5 प्रतिशत या 1.50 लाख रुपये, जो भी कम हो, तक जुर्माने का प्रावधान।

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