चीनी की जमाखोरी पर केंद्र सरकार का शिकंजा, डीलरों के लिए स्टोरेज सीमा की आधी; हर शुक्रवार देना होगा हिसाब
केंद्र सरकार ने चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए डीलरों और स्टाकिस्टों के लिए अधिकतम भंडारण सीमा आधी कर दी ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
डीलरों के लिए चीनी भंडारण सीमा 2000 क्विंटल तय की गई।
नई व्यवस्था 15 सितंबर से लागू, जमाखोरी पर शिकंजा।
डीलरों को हर शुक्रवार चीनी स्टाक का हिसाब देना होगा।
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। बाजार में चीनी की जमाखोरी और कृत्रिम कमी पैदा करने वालों पर अब शिकंजा कसने की तैयारी है। केंद्र सरकार ने चीनी के डीलरों और स्टाकिस्टों के लिए अधिकतम भंडारण सीमा आधी कर दी है। अब कोई डीलर 2000 क्विंटल से ज्यादा चीनी का स्टाक नहीं रख सकेगा।
नई व्यवस्था 15 सितंबर से लागू होगी। इसके साथ ही डीलरों को प्रत्येक शुक्रवार अपने पास मौजूद चीनी का पूरा हिसाब सरकार को देना होगा। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने चीनी के स्टाक पर निगरानी बढ़ाते हुए सभी डीलरों के लिए पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य किया है।
डीलरों को पोर्टल पर उपलब्ध चीनी के स्टाक की घोषणा हर शुक्रवार करनी होगी। इससे बाजार में उपलब्ध चीनी की स्थिति पर नियमित नजर रखी जा सकेगी और जरूरत से ज्यादा स्टाक रखने वालों की पहचान भी आसानी से होगी।
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई
सरकारी खाते में रखी चीनी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत उचित दर दुकानों के लिए राज्य सरकार द्वारा नामित डीलरों या अधिकृत व्यक्तियों के स्टाक पर यह सीमा लागू नहीं होगी।
निरीक्षण के दौरान निर्धारित सीमा से अधिक स्टाक, चीनी रोककर रखने, सट्टेबाजी या कृत्रिम अभाव पैदा करने का मामला मिलने पर संबंधित डीलर, चीनी मिल या बड़े उपभोक्ता के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
बड़े खरीदारों पर भी नजर
मिठाई विक्रेता, शीतल पेय निर्माता, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और अन्य संस्थागत खरीदार भी निगरानी के दायरे में रहेंगे। जिनकी पिछले एक वर्ष में औसत मासिक खपत 10 मीट्रिक टन या उससे अधिक है, वे उत्पादन या इस्तेमाल के लिए 15 दिन से अधिक का चीनी स्टाक नहीं रख सकेंगे। चीनी मिलों को ऐसे बड़े उपभोक्ताओं को बेची गई चीनी की मात्रा का सत्यापन भी करना होगा।
