अगर रात में 4 बजे तक नहीं आती नींद, तो शरीर दे रहा है ये गंभीर संकेत; डॉक्टर से समझें इसका सटीक इलाज
स्क्रीन की रोशनी प्राकृतिक नींद चक्र को प्रभावित करती है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। डॉ. अनंत राणा ...और पढ़ें

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आईएमए अध्यक्ष डॉ. अनंत राणा ने पाठकों के सवालों के जवाब देकर बताए तनाव और अनिद्रा से बचने के उपाय
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। भागदौड़ भरी जिंदगी, काम का दबाव, देर रात तक मोबाइल चलाने और अनियमित दिनचर्या का असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। तनाव, घबराहट, चिड़चिड़ापन और नींद नहीं आने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर कार्यक्रम में आइएमए अध्यक्ष डाॅ. अनंत राणा ने पाठकों के सवालों के जवाब देते हुए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी।
नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद और शारीरिक सक्रियता से मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रखने में मदद मिलती है। सोने से कम से कम दो घंटे पहले मोबाइल और अन्य स्क्रीन से दूरी बना लेनी चाहिए।

स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी और लगातार मिलने वाली सूचनाएं नींद के प्राकृतिक चक्र को प्रभावित करती हैं। देर रात तक जागने के बजाय सोने और उठने का समय निर्धारित करें।
रात का भोजन शाम सात बजे तक कर लेना बेहतर है, हालांकि भोजन का समय अपनी दिनचर्या के अनुसार भी रखा जा सकता है। उन्होंने सलाह दी कि रोजाना कुछ समय पैदल चलने, योग और व्यायाम के लिए निकालें। संतुलित भोजन लें और चाय-काफी का अधिक सेवन करने से बचें, खासकर शाम के बाद।
सवाल : मेरा बेटा घंटों मोबाइल देखता हैं, क्या इससे उनकी मानसिक सेहत और एकाग्रता पर बुरा असर पड़ेगा? - किशोर कुमार,लदेवपुरी
जवाब: लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बच्चों की नींद, ध्यान और शारीरिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। उम्र के अनुसार स्क्रीन का समय तय करें, बीच-बीच में ब्रेक दें और खेलकूद व पारिवारिक बातचीत को बढ़ावा दें।
सवाल : बिना किसी वजह के घबराहट, बेचैनी और दिल की धड़कन तेज हो जाती है? - ऋषभ शर्मा, दाऊ दयाल खन्ना नगर
जवाब : बार-बार घबराहट, बेचैनी और तेज धड़कन एंग्जायटी में हो सकती है, लेकिन शारीरिक कारण भी संभव हैं। नियमित व्यायाम और सांस का अभ्यास मददगार हैं। परेशानी लगातार रहे तो चिकित्सक से परामर्श लें।
सवाल : रात में देर तक नींद नहीं आती और सुबह देर से उठने पर भी थकान रहती है, क्या करें? - हसन अब्बास, आजाद नगर
जवाब : अनियमित दिनचर्या, तनाव और शरीर की जैविक घड़ी में बदलाव नींद बिगाड़ सकते हैं। रोज निश्चित समय पर उठें, सुबह धूप लें और रात में मोबाइल से दूरी रखें। समस्या बनी रहे तो डाक्टर से मिलें।
सवाल : किसी काम में मन नहीं लगता और डर लगता है। क्या दिक्कत है? - जेपी सिंह, खड़गपुर बिलारी
जवाब : लगातार उदासी, रुचि घटना, थकान और नींद या भूख में बदलाव डिप्रेशन के संकेत हो सकते हैं। लक्षण दो सप्ताह तक रहें या दैनिक जीवन प्रभावित करें तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।
सवाल : पढ़ाई और परीक्षा के दबाव में बच्चे तनावग्रस्त रहने लगें, चिड़चिड़ापन रहता है? - नसीम, कच्चा बाग
जवाब : बच्चों पर अच्छे अंक लाने का दबाव बढ़ाने के बजाय उनकी बात सुनें। पढ़ाई के बीच आराम, खेलकूद और पर्याप्त नींद जरूरी है। तनाव लगातार रहे या व्यवहार बदले तो विशेषज्ञ की मदद लें।
सवाल : क्या इंटरनेट मीडिया पर दूसरों की जिंदगी देखकर हीनभावना, अकेलापन और मानसिक तनाव बढ़ सकता है? - अदिति गोयल, प्रकाशनगर
जवाब : इंटरनेट मीडिया पर दूसरों की चुनी हुई तस्वीरों और उपलब्धियों से तुलना करने पर हीनभावना बढ़ सकती है। स्क्रीन समय सीमित रखें, वास्तविक रिश्तों को समय दें और उदासी या तनाव होने पर विशेषज्ञ से सलाह लें।

जागरण के पांच सवाल
1- सवाल : रात में सुबह चार बजे तक नींद नहीं आती और सुबह देर से आंख खुलती है, ऐसा क्यों होता है?
जवाब: इसके पीछे तनाव, चिंता, अनियमित दिनचर्या या शरीर की जैविक घड़ी में बदलाव हो सकता है। रोज एक समय पर उठें, सुबह धूप लें और रात में मोबाइल से दूरी रखें। समस्या बनी रहे तो डाक्टर से मिलें।
2- सवाल : बिना किसी स्पष्ट वजह के घबराहट, बेचैनी और बार-बार नकारात्मक विचार आने पर क्या करना चाहिए?
जवाब: ये लक्षण एंग्जायटी से जुड़े हो सकते हैं। नियमित व्यायाम, गहरी सांस लेने का अभ्यास और भरोसेमंद व्यक्ति से बातचीत मदद कर सकती है। अगर बेचैनी लगातार बनी रहे या दैनिक जीवन प्रभावित हो, तो विशेषज्ञ से परामर्श लें।
3- सवाल : पर्याप्त घंटे सोने के बावजूद शरीर थका रहता है और किसी काम में मन नहीं लगता, क्या यह डिप्रेशन है?
जवाब: थकान, ऊर्जा की कमी और काम में रुचि घटना डिप्रेशन के लक्षण हो सकते हैं। हालांकि, खून की कमी, थायराइड और नींद संबंधी समस्याएं भी इसकी वजह बन सकती हैं। लगातार परेशानी होने पर चिकित्सकीय परामर्श जरूरी है।
4- सवाल : क्या नींद न आने की समस्या के लिए रोज नींद की गोली लेना सुरक्षित है, या इसके दूसरे उपाय भी हैं?
जवाब: नींद की गोलियां बिना चिकित्सकीय सलाह लेने से दुष्प्रभाव और निर्भरता का खतरा हो सकता है। नियमित दिनचर्या, कैफीन से परहेज और व्यवहार आधारित उपचार उपयोगी हैं। लंबे समय से अनिद्रा होने पर डाक्टर से सलाह लें।
5- सवाल : डिप्रेशन और एंग्जायटी के कारण व्यक्ति परिवार से दूरी बनाने लगे, चिड़चिड़ा रहे और अकेले रहना चाहे तो क्या करें?
जवाब: व्यवहार में ऐसा बदलाव मानसिक तनाव या डिप्रेशन का संकेत हो सकता है। व्यक्ति की बात ध्यान से सुनें, उसे दोष न दें और मदद के लिए प्रोत्साहित करें। लक्षण लगातार रहें तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।
