रामपुर, जेएनएन : सपा सांसद आजम खां के खिलाफ दर्ज 29 मामलों में अग्रिम जमानत पर मंगलवार को एक साथ सुनवाई हुई। सांसद की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ने बहस की। हालांकि जमानत पर कोई फैसला नहीं हो सका। सांसद की ओर से दाखिल जिन मामलों में अग्रिम जमानत पर मंगलवार को सुनवाई हुई, उनमें 28 जमीनों पर कब्जे से जुड़े हैं। ये जमीनें आलियागंज के किसानों की हैं। किसानों का आरोप है कि सपा शासनकाल में मंत्री रहते आजम ने जबरन उनकी जमीनों पर कब्जा कर लिया और अपनी मुहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी में मिला लिया। इसके अलावा एक मुकदमा मदरसा आलिया से किताबें चोरी का है, जो शहर कोतवाली में दर्ज हुआ था। यह किताबें पुलिस ने पिछले दिनों जौहर यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी से बरामद की थीं। सेशन कोर्ट में इन मामलों में अग्रिम जमानत पर बहस के लिए सांसद की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एवं पूर्व सहायक महाधिवक्ता सुहेल खां पहुंचे। उन्होंने सभी मामलों को राजनीति से प्रेरित बताया। कहा कि जमीनें खरीदी गई हैं। अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) दलविंदर सिंह डंपी और जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) अजय तिवारी ने बहस की। तिवारी ने बताया कि बहस पूरी हो गई है। फैसला सुरक्षित रख लिया गया है।

सपाइयों को कोर्ट से झटका, अग्रिम जमानत याचिका खारिज

रामपुर : लूट के मुकदमों में आरोपित सपा नेताओं को अदालत से झटका लगा है। अदालत ने सपाइयों के 13 अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई के बाद उन्हें खारिज कर दिया है। जिन सपा नेताओं के जमानत प्रार्थना पत्र खारिज हुए हैं, उनमें पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष अजहर अहमद खां, सांसद आजम के मीडिया प्रभारी फसाहत अली खां शानू और रानू खां शामिल हैं। इनके खिलाफ गंज कोतवाली में पिछले दिनों 10 मुकदमे दर्ज हुए थे। ये मुकदमे डूंगरपुर बस्ती के लोगों की ओर से कराए गए थे। आरोप है कि यहां रहने वाले लोगों के घरों को अवैध बताते हुए सपा शासनकाल में बुलडोजर से तुड़वा दिया गया था। तब सपाइयों ने घर में घुसकर लोगों से मारपीट की थी और सामान लूट लिया था।

Posted By: Narendra Kumar

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