मुरादाबाद (प्रदीप चौरसिया): पर्संस विद बेंच मार्क डिसएबिलिटीज (पीडब्ल्यूबीडी) अधिनियम के तहत रेलवे बोर्ड ने सभी पदों को दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित कर दिया है। इसके तहत चार फीसद पदों पर दिव्यांगजनों की भर्ती की जाएगी। एक पैर या एक हाथ कटा होगा, उस दिव्यांग को नौकरी दी जाएगी। मानसिक दिव्यांगों को रेलवे में नौकरी नही मिलेंगी। अब तक ऐसे दिव्यांगों की टे्रन आपरेशन में भर्ती नहीं होती थी।

रेलवे में अभी तक कुछ पदों पर कुछ श्रेणी के दिव्यांगों को नौकरी दी जाती रही है। ट्रेनों के संचालन से जुड़े पदों पर नौकरी नहीं मिलने के मामले में दिव्यांगजनों ने मुख्य आयुक्त दिव्यांगजन के न्यायालय में आवेदन किया था। इसमें कहा गया था कि रेल प्रबंधन पीडब्ल्यूबीडी अधिनियम का पूरी तरह से पालन नहीं करता है। रेलवे दिव्यांगों को चालक, गार्ड, स्टेशन मास्टर जैसे पदों पर नियुक्त नहीं करता है। कुछ श्रेणी के दिव्यांगों को नौकरी तक नहीं दी जाती है। दिव्यागों को आफिस में नौकरी देकर एक किनारे बैठा दिया जाता है। इससे दिव्यांगजन सामाज से जुड़ नहीं पाते है।

न्यायालय के आदेश के बाद रेलवे बोर्ड ने 25 अक्टूबर को आदेश जारी किया है। इसमें सभी श्रेणी के रिक्त पदों पर दिव्यांगों की भर्ती के लिए चार फीसद पद आरक्षित कर दिए गए हैं। मानसिक रूप से दिव्यांग और पूरी तरह से काम करने में अक्षम दिव्यांगों को नौकरी नहीं दी जाएगी। एक हाथ या एक पैर नहीं होने वाले दिव्यांगों को चालक, गार्ड, टीटीई, जैसे पदों पर नियुक्ति किया जाएगा। दिव्यांगों को यात्री से सीधे संवाद स्थापित करने वाले स्थान पर तैनात किया जाएगा। उदाहरण के लिए टिकट बुकिंग काउंटर, पूछताछ कक्ष जैसे स्थानों पर भी तैनात किया जाएगा। रेलवे बोर्ड ने इस नियम का पालन करने के लिए भर्ती बोर्ड व रेलवे अधिकारियों को निर्देश दिया है। मुख्य जन संपर्क अधिकारी दीपक कुमार ने बताया कि नए दिशा निर्देश के बाद सभी पदों पर दिव्यांगों की भर्ती की जाएगी। दिव्यांगों को समाज से जोडऩे के लिए रेलवे काम करेगा। 

Posted By: Narendra Kumar

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