मुरादाबाद: खंड शिक्षाधिकारी (बीईओ) ने बाढ़ से प्रभावित स्कूलों की रिपोर्ट बीएसए को सौंप दी है। कुल 148 स्कूल चार ब्लॉक में बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। मूंढापाडे, मुरादाबाद ब्लॉक, कुंदरकी, भगतपुर टाडा के स्कूल बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ का पानी उतरने के बाद इन स्कूलों में मरम्मत कार्य से लेकर सफाई व्यवस्था कराने व संक्त्रामक रोगों से बचाव को कीटनाशक दवा का छिड़काव किया जाएगा। अभी कई दिनों तक स्कूल खुलने की कोई संभावना नहीं है। इन स्कूलों में चौपट पढ़ाई को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग ने कोई रणनीति नहीं बनाई है। इसका कारण यह है कि दूसरे स्कूल दूर हैं और बाढ़ से उनके रास्ते भी प्रभावित हैं। बीएसए योगेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि शीघ्र सर्वे करके क्षतिग्रस्त स्कूलों की रिपोर्ट मागी जाएगी।

बाढ़ से सड़कें व पुलिया ध्वस्त

बाढ़ से लोगों का जीवन अस्त व्यस्त तो हुआ ही है। तीन दिन में ही बाढ़ से करोड़ों रुपये का नुकसान हो गया है। फसल बर्बाद होने के साथ ही सड़कें भी टूट गई हैं। इन सड़कों को बनाने में अच्छे खासे बजट की जरूरत होगी।

खादर में सड़कें खराब हो गई हैं। विवेकानंद अस्पताल से धारकनगला तक जाने वाले सड़क में पानी के बहाव से गहरे गढ्डे हो जाने से वाहनों का निकलना मुश्किल है। बाढ़ क्षेत्र में कई पुलिया ध्वस्त हो गई हैं। बिजली के पोल भी टूटकर गिर गए हैं। चार दिन से विवेकानंद अस्पताल से धारकनगला तक सड़क पर होकर कई स्थानों पर नदी का पानी बह रहा है। इससे सैदपुर, इस्लामनगर और चिंता की मढैया के सामने सड़क में गहरे गढ्डे हो गए हैं। गौहरपुर सुल्तानपुर गाव के पास पुलिया ध्वस्त हो गई है। इसके अलावा डिलारी मार्ग की हालत भी बेहद खराब है। धारकनगला मार्ग से डिलारी को मुड़ते ही आधा किलोमीटर दूरी से सड़क पर गहरे गढ्डे हो गए हैं। यहा सड़क पर चार फिट तक पानी कई दिन से बह रहा था। कई लोग पानी के बीच गढ्डों में फंसकर घायल भी हो चुके हैं। यह हाल को मुख्य सड़कों का है। गाव को जोडऩे वाले संपर्क मागरें की हालत और अधिक बुरी है। अक्का शाहपुर, सिहाली खद्दर, सलेम सराय, कोहनी मजरा, हसनगढ़ी, चटकली, गनीनगर, खैय्या, अभय बवक्करपुर, काफियाबाद, घोसीपुरा आदि गाव के संपर्क मागरें में पानी से गढ्डे हो गए हैं।

गड्ढों में टूट रहीं बसों की कमानी

बरसात के कारण सड़कों में बड़े गड्ढे बन गए हैं। हालत यह कि बसों की कमानी टूटने लगी हैं। सबसे अधिक खराब हालत मुरादाबाद-अलीगढ़ व हरिद्वार मार्ग की है। इसकी वजह से बसों को तीन घटे का अतिरिक्त समय लग रहा है। मंडल में रोडवेज की छह सौ बसें चलती हैं। प्रतिदिन औसतन सवा दो सौ बसों की कमानी बदली या उनकी मरम्मत कराई जा रही है।

Posted By: Jagran