मुरादाबाद,जेएनएन। कोरोना काल में संक्रमण से जंग लड़ रहे डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की जिंदगी को मानकों के मुताबिक किट नहीं देेकर खतरे में डाला गया है। दैनिक जागरण में खबर प्रकाशित होने  के बाद स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी है। दिन भर इस मामले को लेकर माथा पच्ची होती रही। इसके बाद तय हुआ कि बाजार से खरीदी गई पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्शन इक्यूपमेंट) की जांच कराई जाएगी।

बाजार से खरीदी किट जिला अस्पताल, महिला अस्पताल की नई बिल्डिंग, विवेकानंद नर्सिंग कालेज, एमआइटी में ड्यूटी कर रहे डॉक्टरों को भी मिली है। इसके मानकों पर खरा नहीं होने की आशंका से स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू करा दी है। इसके अलावा कारपोरेशन से मिली किट में कितना सामान कम है और एप्रूव्ड है या नहीं इसकी भी जांच की जाएगी। बाजार से पीपीई किट नहीं खरीदी जाएगी। 

 कारपोरेशन किट में ये सामान मिला है कम 

 मुख्य चिकित्सा अधिकारी स्टोर में कोरोना वायरस से लडऩे के लिए कारपोरेशन लखनऊ ने टेङ्क्षपग वाली पीपीई किट तो भेजी है लेकिन, उसमें एप्रूवल का कोई नंबर नहीं पड़ा है। इसके साथ ही उसमें शू कवर के अलावा ग्लब्स, एन-95 मास्क और फेस शीट नहीं है। कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए सिर्फ सस्ते चश्मे भेज दिए गए हैं। अभी सीएमएसडी स्टोर में 2,125 पीपीई किट स्टॉक में हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एमसी गर्ग ने बताया कि पीपीई किट कारपोरेशन से आई है। क्या सामान कम है इसकी जानकारी नहीं है। इसके अलावा क्वालिटी भी चेक की जाएगी। जो भी सामान कम निकला है। उसके लिए भी पता करके मुख्यालय को जानकारी देंगे। विभाग के लिए बाजार से किट नहीं खरीदी जाएगी।

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