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किसान का पसीना, व्यापारी का मोल: सरकारी केंद्र बंद, औने-पौने दाम पर बासमती बेचने की मजबूरी

Published: Fri, 09 Oct 2026 05:52 PM (GMT+05:30)

सरकारी क्रय केंद्रों पर बासमती धान की खरीद न होने से मुरादाबाद के छोटे किसान मजबूरी में व्यापारियों को कम ...और पढ़ें

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HighLights

  1. छोटे किसान मजबूरी में मंडी और गांव के कारोबारियों के भरोसे

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। खेत में धान की बालियां देखकर किसान के चेहरे पर भले ही संतोष हो, लेकिन फसल घर पहुंचने से पहले ही उसकी चिंता शुरू हो गई है। बासमती और हाईब्रिड धान की सरकारी खरीद नहीं होती। ऐसे में किसान की मेहनत का भाव सरकारी कांटा नहीं, बल्कि व्यापारी तय करता है।

छोटे किसान तत्काल रुपये की जरूरत के चलते गांव के व्यापारी को ही धान बेचने को मजबूर हो जाते हैं, उन्हें न एमएसपी का सहारा मिलता है और न ही बेहतर भाव के लिए ज्यादा इंतजार करने की गुंजाइश रहती है।

मौजूदा समय में 1509 प्रजाति का बासमती धान 3400 से 3500 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। आरएस-10 का भाव 2500 से 2600 रुपये और सरबती का 2700 से 2800 रुपये प्रति क्विंटल है।

किसान की मुश्किल यह है कि इन प्रजातियों को सरकारी क्रय केंद्र पर लेकर जाने का विकल्प ही नहीं है। लिहाजा गांव के स्थानीय व्यापारी या मंडी के आढ़ती के सामने ही सौदा करना पड़ता है।

छोटे किसान जमील अहमद और रोहन शर्मा ने बताया कि धान को घर में रोककर रखना आसान नहीं होता। फसल काटने के बाद मजदूरी, मशीन का किराया, खाद-बीज और दूसरे खर्चों का भुगतान करना होता है।

परिवार की जरूरतें अलग होती हैं। ऐसे में व्यापारी अगर खेत या गांव में ही धान उठाने और तत्काल भुगतान की बात करता है तो किसान कई बार बाजार में बेहतर भाव मिलने की उम्मीद छोड़ देता है। यही मजबूरी उसके हाथ में आने वाली रकम को प्रभावित करती है।

जिले में 80 आढ़तियों ने मंडी समिति में पंजीकरण करा रखा है। इनमें राइस मिलर्स भी शामिल हैं। इसके अलावा गांवों में स्थानीय व्यापारी भी धान खरीदते हैं। व्यापारी धान खरीदने के बाद उससे चावल तैयार कर दूसरे प्रदेशों में भेजते हैं।

काॅमन धान के लिए 58 क्रय केंद्र

काॅमन और ग्रेड-ए धान की सरकारी खरीद 15 अक्टूबर से शुरू होने की संभावना है। इसके लिए जिले में 58 क्रय केंद्र खोले गए हैं। कामन धान का एमएसपी इस वर्ष 2441 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि पिछले साल 2369 रुपये था।

ग्रेड-ए का एमएसपी 2461 रुपये है, जो पिछले वर्ष के 2389 रुपये से 72 रुपये अधिक है। वर्ष 2025-26 में जिले में 89.547 हजार हेक्टेयर में धान की खेती हुई और 294.789 हजार टन उत्पादन हुआ।

किसान नेता मनोज चौधरी का कहना है कि धान बेचने के लिए चंदौसी, बहजोई और संभल की अनाज मंडियों का रुख भी करना पड़ता है। गढ़मुक्तेश्वर मंडी में भी धान की बिक्री होती है। दूरी और ढुलाई का खर्च छोटे किसान के लिए अलग बोझ बन जाता है।

 

15 अक्टूबर से काॅमन और ग्रेड-ए धान की एमएसपी पर खरीद शुरू होगी। जिले में 58 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। केंद्रों पर बोरों समेत सभी आवश्यक व्यवस्थाएं कराई जा रही हैं। किसानों को निर्धारित मानकों के अनुसार धान बेचने की सुविधा मिलेगी।

विनीत मिश्रा, जिला खाद्य विपणन अधिकारी, मुरादाबाद


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