यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 12, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आजम खां के समर्थकों ने अखिलेश यादव के खिलाफ अचानक क्यों अपनाए बागी तेवर, क्या पहले से थी नाराजगी
Azam Khan/Akhilesh Yadav नवाबों के शहर रामपुर से 10 बार विधायक चुने गए समाजवादी पार्टी के नेता आजम खां के ...और पढ़ें

मुरादाबाद, (मुस्लेमीन)। Azam Khan News : नवाबों के शहर रामपुर से 10 बार विधायक चुने गए समाजवादी पार्टी के नेता आजम खां के समर्थकों के बागी तेवर से सपा में खेमे में बेचैनी है। आजम समर्थकों ने अचानक बागी तेवर कैसे अपना लिए, इसे जानने के लिए बड़े-बड़े नेता सोमवार को स्थानीय सपाइयों से संपर्क करते रहे। हांलाकि नाराजगी पहले से थी। आजम खां दो साल से जेल में हैं, लेकिन सपा ने उनके लिए कोई बड़ा संघर्ष नहीं किया। विधानसभा चुनाव में में टिकट बंटवारे के दौरान भी आजम के करीबियों को नजरअंदाज किया गया।
अब उनके खिलाफ कार्रवाई हो रही है, तब भी सपा हाईकमान बचाव को आगे नहीं आ रहा है। लोकसभा चुनाव के बाद आजम खां और उनके समर्थकों के खिलाफ बड़े पैमाने पर मुकदमे दायर हुए। आजम खां के खिलाफ 87, उनके बेटे विधायक अब्दुल्ला आजम के खिलाफ 43 और पत्नी पूर्व सांसद डा. तजीन फात्मा के खिलाफ 34 मुकदमे विचाराधीन हैं। ये तीनों 26 फरवरी 2020 को जेल गए। तजीन फात्मा 10 माह और अब्दुल्ला 23 माह बाद जेल से छूट सके। आजम खां अब भी जेल में हैं। वह जेल से ही विधानसभा चुनाव लड़े और जीत गए।
तजीन फात्मा जब जेल से छूटकर आईं थी, तब भी अखिलेश यादव रामपुर आने में देर करते रहे। उनसे पहले इमरान प्रतापगढ़ी और कांग्रेस के विधायक उनसे मिलने घर पहुंच गए। बाद में अखिलेश आए। इसी तरह जेल में मिलने भी एक बार गए। चुनाव बाद आजम खां के समर्थक उन्हे नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग कर रहे थे, लेकिन अखिलेश खुद बन गए। सप्ताहभर पहले ही आजम खां के करीबी मुरादाबाद के सपा नेता यूसुफ मलिक पर शिकंजा कसा गया। वह जेल में हैं। लेकिन पार्टी ने कोई बचाव नहीं किया। इसी को लेकर वे पार्टी हाईकमान से खफा हैं।
सपा पर भारी पड़ेगी नाराजगीः साल 2009 में भी आजम खां ने सपा के खिलाफ बगावत की थी। पार्टी से अलग भी हो गए थे। तब आजम खां ने सपा के खिलाफ जो तेवर अपनाए थे, उससे पार्टी को भारी नुकसान हुआ था। 2009 के उप चुनाव में अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव समेत तमाम प्रत्याशी हार गए थे। बाद में आजम खां के सियासी दुश्मन रहे अमर सिंह और जया प्रदा को पार्टी से बाहर कर दिया गया था।
इसके बाद फिर आजम खां सपा में शामिल हुए थे। आजम खां की मुसलमानों में मजबूत पकड़ है। साल 2019 में मुरादाबाद मंडल में भी सपा के तीनों सांसद मुस्लिम चुने गए, जबकि मंडल में सपा के ज्यादातर विधायक भी मुस्लिम जीते हैं। दो साल से जेल में बंद रहने के बावजूद आजम खां खुद रामपुर शहर से रिकार्ड मतों से चुनाव जीते। उनके बेटे अब्दुल्ला ने भी सवा लाख से अधिक वोट पाए। उनकी बगावत सपा पर भारी पड़ सकती है।
