मुरादाबाद, मेहंदी अशरफी। जिस सोफे पर आप बैठे हों, वह कबाड़ हो चुकी कार पर बना हो तो चौंकिएगा मत। पीतल कारोबार में विश्व में नाम कमाने वाला मुरादाबाद अब कबाड़ से एंटीक उत्पाद भी बना रहा है। पुरानी स्कूटर से टेबल बनाई जा रही है। पुराने संदूक और ड्रम से भी खूबसूरत उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। यह कारोबार पांच सौ करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। विदेश में इन्हें खूब पसंद किया जा रहा है।

पीतल का रंग विदेशियों को खूब भाता

यूरोपीय देशों में कम वजन और खूबसूरत दिखने वाले कबाड़ के इन एंटीक उत्पादों को ज्यादा पसंद किया जा रहा है। महानगर से पीतल के उत्पादों का निर्यात कारोबार 10 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अब पीतल की महंगाई की वजह से कारोबारियों ने लोहे व एल्यूमीनियम के कबाड़ से भी एंटीक उत्पाद बनाने शुरू किए हैं। जिन्हें जर्मनी, हालैंड, इटली, फ्रांस, बेल्जियम, डेनमार्क, स्वीडन, नार्वे आदि देशों में भेजा जा रहा है। निर्यातकों के मुताबिक यूरोपीय देशों के खरीदार पीतल व काई के रंग के एंटीक उत्पाद की ज्यादा मांग करते हैं। रसायन के प्रयोग से इस रंग को तैयार किया जाता है। यह प्राकृतिक काई की तरह दिखाई देता है। हैंडीक्राफ्ट एसोसिएशन मुरादाबाद के अध्यक्ष नवेदुर्रहमान का कहना है कि पुराने सामान को एंटीक लुक देने के बाद निर्यात किया जा रहा है। इसमें लोहा और एल्यूमीनियम आदि पर पीतल का रंग विदेशियों को खूब भाता है।

पुराने टायरों का भी प्रयोग

निर्यातक कबाड़ियों के यहां से पुराने स्कूटर, ड्रम, पुराने दरवाजे, पुराने टायर, लोहे के पुराने संदूक आदि खरीदकर लाते हैं। दर्जनभर फैक्ट्रियों में एंटीक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। कबाड़ काफी कम दाम में मिल जाता है, जबकि विदेश में इसकी काफी कीमत मिल जाती है। इनमें पुरानें टायरों का भी प्रयोग किया जाता है। आमतौर पर पुराने टायरों को कबाड़ी जलाकर लोहे का तार निकाल लेते हैं। जलाने से प्रदूषण होता है। एंटीक उत्पाद के लिए इन्हें जलाना नहीं पड़ता है। टायर के टुकड़ों का प्रयोग किया जाता है। पहले शहर में जगह-जगह कबाड़ पड़ा रहता था, वह भी अब दिखाई नहीं देता है।

नक्काशी के उत्पाद में भी मुरादाबाद का नाम

मुरादाबाद को पीतल नगरी के नाम से विश्व में पहचाना जाता है। पीतल के कलश आदि सामान पर मुरादाबादी बारीक नक्काशी के काम को तुर्किए, रूस और दुबई में पसंद किया जाता है। इसमें नेशनल, चुनिया जाली, बिक्री, दरमियानी, जापानी, मरोड़ी का वर्क कलश और अन्य पीतल के बर्तनों पर किया जाता है। बारीक नक्काशी को जयपुर समेत अन्य स्थानों पर भी पसंद किया जाता है। नक्काशी के पीतल उत्पादों को सजावट के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लैंप, झूमर आदि में भी इसके नमूने इस्तेमाल किए जाते हैं। नक्काशी वाले सामान में कलर भरे नमूने भी काफी आकर्षक दिखाई देते हैं।

Edited By: Sanjay Pokhriyal

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