अमरोहा फर्जीवाड़ा: सामान लिया नहीं, कर दिया भुगतान! 31 पंचायत सचिवों पर गिरेगी गाज, 43 लाख की GST चोरी का खुलासा
अमरोहा में 31 पंचायत सचिवों पर बिना सामान लिए फर्म को भुगतान करने और जीएसटी अनियमितताओं की अनदेखी करने का ...और पढ़ें

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HighLights
कंपोजिट फर्म वसूलती रही 18 प्रतिशत जीएसटी, सचिवों ने नहीं की जांच
राखी फोटो स्टूडियो फर्म की जांच में सामने आई सचिवों की लापरवाही
जागरण संवाददाता, अमरोहा। हसनपुर ब्लाक की राखी फोटो स्टूडियो फर्म की जांच में पंचायत सचिवों की लापरवाही सामने आई है। आरोप है कि सामान की आपूर्ति लिए बिना ही पंचायत सचिवों ने फर्म को भुगतान कर दिया। इतना ही नहीं, फर्म की ओर से 18 प्रतिशत जीएसटी वसूलकर बिल दिए जाते रहे, लेकिन सचिवों ने फर्म की कर स्थिति और बिलों की जांच करना भी जरूरी नहीं समझा।
कमेटी की जांच में 31 पंचायत सचिवों की भूमिका सामने आने के बाद सभी को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। अब तक किसी सचिव ने जवाब नहीं दिया है। ऐसे में विभागीय कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है। कार्रवाई के बाद कमेटी रिपोर्ट मंडलायुक्त को भेजी भेजेगी।
जिले के छह ब्लाक अमरोहा, जोया, गजरौला, मंडी धनौरा, हसनपुर और गंगेश्वरी की पंचायतों में राखी फोटो स्टूडियो, हसनपुर की ओर से स्टेशनरी की आपूर्ति की गई थी। वर्ष 2021-22 से वर्ष 2025 तक फर्म ने 1.58 करोड़ रुपये की स्टेशनरी की आपूर्ति दिखाई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार ने तत्कालीन जिलाधिकारी को जांच कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मुख्य विकास अधिकारी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई।
इसमें सीडीओ के अलावा एडीपीआरओ विमल कुमार और असिस्टेंट कमिश्नर वाणिज्यकर करिश्मा अग्रवाल को शामिल किया गया था। जांच में फर्म की ओर से 43.76 लाख रुपये की जीएसटी चोरी पकड़ी गई।
यह भी सामने आया कि फर्म ने बिलों में 18 प्रतिशत जीएसटी वसूल की, लेकिन यह धनराशि विभाग में जमा नहीं कराई गई। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि फर्म को 18 प्रतिशत जीएसटी वसूलने का अधिकार ही नहीं था।
क्योंकि फर्म का टर्नओवर एक करोड़ रुपये से कम था। वह कंपोजिट फर्म थी। नियमित फर्म ही इतनी जीएसटी कटौती कर सकती है। इसी बीच कमेटी की सदस्य असिस्टेंट कमिश्नर वाणिज्यकर करिश्मा अग्रवाल का तबादला कानपुर हो गया था।
बाद में डीसी वाणिज्यकर ने दोबारा एडीपीआरओ को रिपोर्ट भेजी। मामले में 31 पंचायत सचिवों का भी खेल खुला। पता चला कि सचिवों ने फर्म से सामान खरीदा ही नहीं, जबकि उसको भुगतान कर दिया। फर्म कंपोजिट है या नियमित, इसकी जांच करना भी मुनासिब नहीं समझा।
31 पंचायत सचिवों की जांच के दौरान लापरवाही सामने आई है। सभी को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन अभी तक किसी ने जवाब नहीं दिया है। अब उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद जांच रिपोर्ट मंडलायुक्त को भेजी जाएगी।
- नितिन कुमार, डीपीआरओ।
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