अमानगढ़ में फिर लौटेगा 'जंगल बुक' का रोमांच: 15 दिन पहले खुल रहा टाइगर रिजर्व, हाथियों के झुंड और बाघों के होंगे दीदार
अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी 1 नवंबर से शुरू होगी, जो पर्यटकों को हाथियों और बाघों सहित वन्यजीवों के ...और पढ़ें

अमानगढ़ के जंगल मे पानी पीता बाघ और घूमता हाथी का परिवार सौ. वन विभाग
HighLights
संवारे जा रहे रास्ते, कैफेटेरिया में बढ़ेंगी सुविधाएं, रेडीमेड कपड़े भी उपलब्ध होंगें
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। सुबह की हल्की ठंडक... पेड़ों के बीच से छनती धूप... कहीं पत्तियों की सरसराहट और अचानक सामने आती हाथियों का झुंड। कुछ दूर घास में हलचल हो तो नजरें ठहर जाती हैं कि कहीं तेंदुआ तो नहीं। यही रोमांच अब फिर अमानगढ़ के जंगल में लौटने वाला है।
एक नवंबर से अमानगढ़ टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए खुल जाएगा। जंगल सफारी शुरू होने से पहले वन विभाग ने रास्तों को संवारने और पर्यटकों की सुविधाएं बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है।
तराई की गोद में करीब 9,500 हेक्टेयर में फैला अमानगढ़ केवल पेड़-पौधों का जंगल नहीं है। यह बाघ, तेंदुए, हाथी, भालू, सांभर, चीतल, काकड़, जंगली सूअर, लंगूर और अनेक पक्षियों का बसेरा है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यहां 6,524 वन्यजीव दर्ज हैं। इनमें 28 बाघ, 168 तेंदुए और 105 हाथी शामिल हैं। यही जैव विविधता सफारी को हर बार अलग अनुभव देती है।
अमानगढ़ में सामान्य तौर पर 15 नवंबर से सफारी शुरू होती रही है, लेकिन इस बार पर्यटकों को 15 दिन पहले ही जंगल में प्रवेश मिलेगा। एक नवंबर से सफारी शुरू करने के लिए जंगल के रास्तों की झाड़ियां हटाई जा रही हैं, जहां रास्ते खराब हैं, वहां मरम्मत कराई जा रही है।
ट्रैक की व्यू लाइन साफ होने से जिप्सी में बैठे पर्यटकों को जंगल के भीतर दूर तक नजर दौड़ाने का मौका मिलेगा। अमानगढ़ की पहचान अब स्थानीय सैरगाह से आगे बढ़ रही है।
पिछले सत्र में यहां 3,528 भारतीय और नौ विदेशी पर्यटक पहुंचे थे। वर्ष 2024-25 में 3,571 भारतीय और दो विदेशी पर्यटकों ने सफारी की थी। इस साल संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
केहरीपुर से झिरना तक रोमांच
सफारी की शुरुआत केहरीपुर वन परिसर से होगी। जिप्सी निर्धारित मार्ग से झिरना गेट की ओर जाएगी। करीब 32 किलोमीटर के सफारी रूट को पूरा करने में लगभग तीन से साढ़े तीन घंटे लगते हैं।
घने साल-सागौन के जंगल, नदी-नालों की पट्टियां और वन्यजीवों के प्राकृतिक मूवमेंट वाले क्षेत्र इस सफर को खास बनाते हैं। यहां सफारी का सबसे बड़ा आकर्षण यही है कि जंगल में अगला मोड़ क्या दिखा दे, इसका अंदाजा नहीं होता।
कभी चीतल का झुंड रास्ता काटता है तो कभी लंगूरों की आवाज जंगल की खामोशी तोड़ देती है। भाग्य साथ दे तो बाघ, तेंदुआ या हाथियों का झुंड भी दिख सकता है।
जंगल के साथ गांवों को भी मिलने लगा सहारा
अमानगढ़ ईको-पर्यटन का संचालन केहरीपुर ईको विकास समिति के माध्यम से होता है। सफारी के लिए स्थानीय गांवों के चालक और गाइड जुड़े हैं। पिछले सत्र में 98 जिप्सियां पंजीकृत थीं।
प्रशिक्षित गाइड पर्यटकों को वन्यजीवों के साथ जंगल के पेड़-पौधों, इतिहास और जैव विविधता की जानकारी देते हैं। वन विभाग के अनुसार ईको-पर्यटन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
यानी अमानगढ़ में खुलने वाला जंगल का दरवाजा केवल पर्यटकों को ही भीतर नहीं बुलाएगा, बल्कि आसपास के गांवों के लिए रोजगार और पर्यटन की नई संभावनाएं भी खोलता है।
एक नवंबर से जब जिप्सियों के पहिए जंगल की पगडंडियों पर दौड़ेंगे, तब अमानगढ़ एक बार फिर अपनी खामोशी, हरियाली और वन्यजीवों के साथ पर्यटकों का स्वागत करने के लिए तैयार होगा।
पर्यटकों की सुविधा के लिए कैफेटेरिया क्षेत्र में भी बदलाव किए जा रहे हैं। चाय और नाश्ते की व्यवस्था पहले से है। अब कुछ और दुकानें बढ़ाई जा रही हैं। जनरल स्टोर के साथ कीरिंग और रेडीमेड कपड़े भी उपलब्ध कराने की तैयारी है। बच्चों को जंगल और वन्यजीवों से परिचित कराने के लिए सम्मेलन कक्ष भी बनाया गया है।
- अंकिता किशोरी, क्षेत्रीय वनाधिकारी, केहरीपुर (बिजनौर)
यह भी पढ़ें- मुरादाबाद में 5 लाख लोगों को 'दम' लगाने का शौक: हाई कोर्ट की रोक के बाद भी बार से लेकर पार्टियों तक सुलग रहा हुक्का
