24 घंटे जागने वाला धार्मिक शहर बना यूपी का विंध्याचल, 64 फीसदी बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या
उत्तर प्रदेश का विंध्याचल धार्मिक पर्यटन का केंद्र बन रहा है, जहां पिछले दो वर्षों में श्रद्धालुओं की संख्या में 64% की वृद्धि हुई है।

झांकी से मां विंध्यवासिनी का दर्शन करते भक्त और मां विंध्यवासिनी देवी
HighLights
विंध्याचल में श्रद्धालुओं की संख्या में 64% की वृद्धि।
नवरात्र मेले से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रहा बढ़ावा।
धार्मिक स्थलों के विकास पर 208 करोड़ रुपये खर्च।
कमलेश्वर शरण, मीरजापुर। वन ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य साधने निकले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश को धार्मिक पर्यटन हब बनाने की तैयारी में हैं। ऐसे में नवरात्र पर्व किसी बड़े अवसर से कम नहीं है। जगविख्यात विंध्याचल का नवरात्र मेला धार्मिक पर्यटन को आर्थिक विकास से जोड़ने का बड़ा अवसर है।
अकेले विंध्याचल में पिछले दो वर्षों में श्रद्धालुओं की संख्या में करीब 64 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस बार यह आंकड़ा रिकॉर्ड तोड़ेगा। ऐसे में नवरात्र मेला आस्था संग अर्थव्यवस्था का आधार बनेगा।
नवरात्र में विंध्याचल 24 घंटे जागने वाला धार्मिक शहर बन गया है। पहले ही दिन छह लाख श्रद्धालु पहुंचे थे। अष्टमी तक 27 लाख श्रद्धालु हाजिरी लगा चुके हैं। वहीं सदियों पुरानी विंध्य त्रिकोण परिक्रमा अब धार्मिक पर्यटन की नई पहचान बन रही है। मां विंध्यवासिनी, कालीखोह और अष्टभुजा मंदिर में वर्ष 2023 में जहां करीब 73 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 78.15 लाख और साल 2025 में 1.20 करोड़ तक पहुंच गया।
यानी दो साल में श्रद्धालुओं की संख्या में करीब 64 फीसदी का उछाल आया। आस्था का यह सिलसिला 2026 में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। जनवरी से अगस्त तक ही करीब 90 लाख श्रद्धालु मां विंध्यवासिनी के दर्शन कर चुके थे। यह संख्या पिछले पूरे साल के कुल दर्शनार्थियों की करीब 75 फीसदी है।
खास बात यह है कि यह आंकड़ा शारदीय नवरात्र के पहले का है। ऐसे में इस बार दर्शनार्थियों की संख्या नया रिकार्ड बनाएगी। मां विंध्यवासिनी के शृंगारिया शिवजी मिश्र ने बताया कि विंध्याचल में कारोबार में दोगुना बढ़ोत्तरी हुई है। पिछली बार अनुमानित लगभग 25 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था। इस बार 40 करोड़ के पार की उम्मीद है। श्रद्धालुओं की संख्या भी 30 लाख के पार पहुंचने की संभावना है।
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साल दर साल आंकड़े
मां विंध्यवासिनी धाम
- वर्ष 2023 : 73 लाख
- वर्ष 2024 : 78.15 लाख
- वर्ष 2025 : 1.20 करोड़
कालीखोह व अष्टभुजा मंदिर
- वर्ष 2023 : 42.36 लाख
- वर्ष 2025 : 64 लाख
विंध्याचल में श्रद्धालुओं की सुविधाओं और धार्मिक स्थलों के कायाकल्प पर 208.09 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके तहत मां की पैड़ी, संपर्क मार्गों, परिक्रमा पथ और मंदिर परिसर में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। विंध्यधाम, अष्टभुजा व कालीखोह क्षेत्र में भी बुनियादी सुविधाएं मजबूत की जा रही हैं। पहाड़ी मंदिरों तक पहुंच आसान बनाने में रोप-वे ने अहम भूमिका निभाई है। त्रिकोण परिक्रमा योजना के तहत कालीखोह क्षेत्र के विकास के लिए 35.50 करोड़ रुपये की परियोजना पर जल्द ही काम शुरू होगा।- जयवीर सिंह, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री
