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Mirzapur Seat: कांग्रेस के गढ़ में INDI गठबंधन से सपा प्रत्याशी मैदान में, हैट्रिक की तैयारी में अनुप्रिया; समझें समीकरण

मीरजापुर लोकसभा सीट पर 10 प्रत्याशी किस्मत आजमां रहे हैं। अपना दल एस एनडीए से अनुप्रिया पटेल आइएनडीआइए से सपा के रमेश चंद्र बिंद और बसपा से मनीष त्रिपाठी मैदान में हैं। 1952 से लेकर 1989 तक मीरजापुर लोकसभा सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा। पहली बार जान एल विल्सन सांसद बने थे। साल 1957 में उन्हें दोबारा जीत मिली।

By Jagran News Edited By: Aysha Sheikh Sat, 01 Jun 2024 10:25 AM (IST)
Mirzapur Seat: कांग्रेस के गढ़ में INDI गठबंधन से सपा प्रत्याशी मैदान में, हैट्रिक की तैयारी में अनुप्रिया; समझें समीकरण

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। (Mirzapur Lok Sabha Seat) : मीरजापुर लोकसभा सीट पर 10 प्रत्याशी किस्मत आजमां रहे हैं। अपना दल एस, एनडीए से अनुप्रिया पटेल, आइएनडीआइए से सपा के रमेश चंद्र बिंद और बसपा से मनीष त्रिपाठी मैदान में हैं।

सीट का इतिहास

1952 से लेकर 1989 तक मीरजापुर लोकसभा सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा। पहली बार जान एल विल्सन सांसद बने थे। साल 1957 में उन्हें दोबारा जीत मिली। 1962 में हुए चुनाव में सीट से श्यामधर मिश्र ने जीत हासिल की। 1967 के चुनाव में जनसंघ का प्रभाव बढ़ गया, जहां वंश नारायण सिंह को जीत मिली। 1971 में यहां से कांग्रेस ने वापसी की, जहां अजीज इमाम चुनाव जीतकर संसद की दहलीज पर पहुंचे।

1980 में इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस में अजीज इमाम दोबारा सांसद बने। कुछ सालों बाद उपचुनाव में उमाकांत मिश्रा सांसद बने। 1984 में हुए चुनाव में दोबारा उमाकांत मिश्र सांसद बने। यहां से सपा से दो बार फूलन देवी और भाजपा से वीरेंद्र सिंह सांसद रहे हैं। इसके बाद 2014 से दो बार लगातार अनुप्रिया पटेल सांसद हैं।

  • कुल उम्मीदवार : 10
  • कुल मतदाता : 19,06,327
  • महिला वोटर : 9,06,691
  • पुरुष वोटर: 9,99,567

क्या बोले प्रत्याशी

बीते 10 सालों में हुए विकास को जनपद की जनता देख रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी के नेतृत्व में बनने वाली तीसरी बार केंद्र की सरकार और भी जनपद के समृद्ध विकास की रूपरेखा तैयार करेगी। इसमें सबका साथ सबका विश्वास के साथ सबका विकास किया जाएगा। - अनुप्रिया पटेल, सांसद, प्रत्याशी-अपना दल एस, एनडीए

आइएनडीआइए गठबंधन मजबूती से उभर रहा है। एनडीए गठबंधन की सीटों की संख्या बहुत कम होगी। सत्ता में आने पर कमजोर और वंचित वर्गों के कल्याण के लिए कार्य किए जाएंगे। महंगाई से त्रस्त जनता बेरोजगारी से परेशान है। इसका असर चुनाव परिणाम पर दिखेगा। - रमेश चंद्र बिंद, प्रत्याशी-सपा, आइएनडीआइए

मायावती अकेले ही मैदान में डटी हुई हैं। वह सर्वसमाज के गरीब तबकों के लिए चिंतित हैं। चार बार के अपने मुख्यमंत्रित्व काल में उन्होंने गरीब कल्याण के लिए काफी कार्य किए हैं। अबकी सत्ता में आने पर गरीबों के लिए फिर से कल्याणकारी कार्य किए जाएंगे। - मनीष त्रिपाठी, प्रत्याशी, बसपा

ये स्थानीय मुद्दे हावी

  • रोजगार को लेकर बुनियादी विकास न होने का आरोप।
  • बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण लगाने में मिली नाकामी।
  • स्थानीय स्तर पर उद्योग स्थापना कराने में पिछड़ापन।
  • नहरों का जाल होने के बावजूद सिंचाई के लिए पानी नहीं।
  • पीतल व दरी समेत ब्लैक पाटरी के विकास पर नहीं हुए काम।