यूपी में अब सेटेलाइट रोवर से होगी जमीन की पैमाइश, चुटकियों में सुलझेंगे जमीनी विवाद
अब जमीन की पैमाइश पारंपरिक जरीब-फीता की जगह सेटेलाइट आधारित रोवर से होगी, जिससे कम समय में अधिक क्षेत्रफल की सटीक नापी संभव होगी।

मड़िहान तहसील में सेटेलाइट आधारित रोवर मशीन की जांच करते तहसीलदार आशीष कुमार पांडेय
HighLights
पारंपरिक जरीब-फीता की जगह सेटेलाइट रोवर का उपयोग।
कम समय में अधिक क्षेत्रफल की सटीक पैमाइश संभव।
भूमि विवादों के निस्तारण में मिलेगी बड़ी मदद।
प्रशांत यादव, मीरजापुर। जमीन की पैमाइश और सीमांकन के लिए अब पारंपरिक जरीब व फीता का उपयोग नहीं होगा। इसके स्थान पर सेटेलाइट आधारित रोवर (स्वचालित रोबोट या छोटा वाहन) का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे कम समय में अधिक क्षेत्रफल की सटीक पैमाइश संभव होगी और भूमि विवादों के निस्तारण में भी सहायता मिलेगी।
अभी तक जमीन की नापी पारंपरिक जरीब और फीता के माध्यम से की जाती थी, जिसमें अधिक समय लगता था। इस प्रक्रिया में अधिकारियों और कर्मचारियों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इस समस्या को देखते हुए जमीन नापी की नई तकनीक की खोज शुरू की गई।
करीब छह लाख रुपये की लागत वाली यह मशीन सीमा बिंदु पर स्थापित करने के बाद जमीन की पैमाइश करती है। यह सेंटीमीटर और इंच तक की दूरी माप सकती है और अधिकतम दो सेंटीमीटर तक का अंतर बता सकती है।
मशीन में चार्जिंग की सुविधा है और पैमाइश के साथ फील्ड बुक तैयार कर उसका प्रिंट भी निकाला जा सकता है। इस मशीन के आने से प्रत्येक तहसील क्षेत्रों में अब भूमि की पक्की पैमाइश सेटेलाइट आधारित रोवर मिशन से होगी, जिससे भूमि विवाद के निस्तारण में आसानी होगी।
बारिश के दिनों में मशीन से नापी करने में होगी दिक्कत
बारिश के दिनों में मशीन का उपयोग करने में दिक्कत हो सकती है। लगभग छह लाख रुपये की लागत की यह मशीन बारिश में खराब हो सकती है, लेकिन अन्य दिनों में यह बहुत प्रभावी है। इससे कम समय में बड़े क्षेत्रफल की भूमि की नापी आसानी से हो जाएगी और भूमि विवादों से छुटकारा मिल जाएगा।
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विवादित जमीनों की नापी का अक्सर आता है मामला
विवादित जमीनों सहित अन्य जमीनों की नापी के लिए अक्सर मामला आता रहता है, जिसकी नापी में काफी समय लग जाता है। ऐसे में सेटेलाइट आधारित रोवर (स्वचालित रोबोट या छोटा वाहन) मशीन जमीन की नापी में वारदात साबित होगी।
इस नई तकनीक के माध्यम से सरकारी अधिकारियों और किसानों को अधिक लाभ होगा, जिससे भूमि संबंधी कार्यों में तेजी आएगी और विवादों का समाधान सरल होगा।
संतोष कुमार ओझा, उपजिलाधिकारी, मड़िहान
