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‘जुग-जुग जियो बिटिया’ IAS दिव्या मित्तल के काम से खुश दुईजी देवी ने दिया था आशीर्वाद, लोग आज भी करते हैं याद

Published: Sun, 30 Aug 2026 04:45 PM (GMT+05:30)

आईएएस दिव्या मित्तल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वह मीरजापुर में विकास कार्यों और जनहितैषी फैसलों के ...और पढ़ें

29 अगस्त 2023 को लहुरियादह गांव में तत्कालीन डीएम दिव्या मित्तल से मिलती हुई बुजुर्ग महिला दुइजी देवी। जागरण

29 अगस्त 2023 को लहुरियादह गांव में तत्कालीन डीएम दिव्या मित्तल से मिलती हुई बुजुर्ग महिला दुइजी देवी। जागरण

HighLights

  1. पूर्व डीएम दिव्या मित्तल ने आईएएस पद से इस्तीफा दिया।

  2. लहुरियादह गांव को 76 साल बाद मिला पाइपलाइन पानी।

  3. विंध्याचल धाम में वृद्ध श्रद्धालुओं के लिए गोल्फ कार्ट।

जागरण संवाददाता, मीरजापुर। जनपद की पूर्व जिलाधिकारी आईएएस दिव्या मित्तल ने रविवार को इस्तीफा दे दिया। अपनी तैनाती के दौरान वह जनपद में विकास कार्यों और स्वभाव के चलते लोगों में काफी लोकप्रिय रहीं। राजनेताओं की बातों को दरकिनार कर अपने फैसले पर अडिग रहती थीं।

किसी भी दबाव में न आने व छोटे-बड़े सभी से मिलना उनको लोगों का प्रिय बना दिया था। उनके अडिग फैसले का ही परिणाम रहा कि आजादी के लगभग 76 साल बाद लहुरियादह गांव के लोगों को पहली बार पाइप लाइन से पानी मिला। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्थानांतरण के बाद लोगों ने फूलों की वर्षा करके स्वागत करते हुए उनको विदाई दी थी।

वर्ष 2022 में हुई जनपद में तैनाती

आईआईटी दिल्ली की छात्रा, आईआईएम बंगलुरु की प्रबंधन विशेषज्ञ, लंदन में मैनेजमेंट कंसल्टेंट और 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल को 18 सितंबर 2022 को मीरजापुर के डीएम की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

दिव्या मूलरूप से हरियाणा के रेवाड़ी की निवासी हैं, लेकिन उनका जन्म दिल्ली में ही हुआ। उनकी पढ़ाई भी दिल्ली में ही हुई। 10वीं और 12वीं के बाद दिल्ली में ही बीटेक किया और फिर आईआईएम बंगलुरू से एमबीए कीं। इसके बाद उनकी शादी हो गई।

देश प्रेम ने वापस घर बुलाया

दिव्या और उनके पति गगनदीप सिंह की लंदन में बहुत अच्छे पैकेज पर नौकरी भी लग गई थी, लेकिन उनमें देश प्रेम इतना रहा कि वह वहां ज्यादा दिन तक नहीं रह पाईं। पति-पत्नी ने इस्तीफा देकर लंदन से वापस लौटने का फैसला किया और हुआ भी यही।

जनपद से दिव्या मित्तल को बस्ती के जिलाधिकारी की जिम्मेदारी मिलने के बाद लोगों ने फूल बरसाकर स्वागत किया था। तैनाती के समय दिव्या मित्तल लोगों की मदद करने को लेकर खूब सुर्ख़ियों में रहीं। यही वजह रही कि उन्हें विदाई देने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे।

29 अगस्त लहुरियादह के लिए रहा खास

जिला मुख्यालय से 60 किलोमीटर दूर मध्यप्रदेश की सीमा ड्रमंडगंज की पहाड़ी पर बसे लहुरियादह गांव के लिए 29 अगस्त 2023 का दिन ऐतिहासिक व यादगार रहा। ग्राम प्रधान कौशलेंद्र गुप्ता व ग्रामीणों की मांग पर इस दिन जिलाधिकारी रहीं दिव्या मित्तल अधिकारियों के साथ गांव में पहुंची और नल से पेयजल का शुभारंभ किया। 

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आजादी के 76 वर्ष बाद गांव में नल से पानी आपूर्ति शुरू होने पर 75 वर्षीय दुईजी देवी ने दिव्या मित्तल के सिर पर हाथ रख आशीर्वाद दिया कि जुग-जुग जियो बिटिया, तुम्हारी मेहनत रंग लाई और हम सभी को पानी संकट से मुक्ति मिल गई।

ग्रामीणों ने कहा कि अब झरने और टैंकर का मुंह नहीं देखना पड़ेगा। इससे पूर्व अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से पानी संकट को लेकर कई बार गुहार लगाई गई थी, लेकिन किसी ने पेयजल संकट पर ध्यान नहीं दिया।

लहुरियादह गांव के लोगों की मांग पर दिव्या मित्तल ने वर्ष 2023 में ही जूनियर हाईस्कूल खोले जाने का आश्वासन दिया था, लेकिन उच्च प्राथमिक विद्यालय स्वीकृत होने के बाद भी जिम्मेदारों की लापरवाही से आज तक उच्च प्राथमिक विद्यालय का निर्माण नहीं हो सका। आज भी लहुरियादह गांव के लोगों में दिव्या मित्तल के प्रति स्नेह और प्यार है।

गांव के लालबहादुर यादव, हीरालाल यादव, देवकली व गीता देवी ने बताया कि पहले गर्मी में पानी के एक-एक बूंद के लिए संघर्ष करना पड़ता था, लेकिन तत्कालीन जिलाधिकारी दिव्या मित्तल की बदौलत गांव में नल से पानी पीने को मिल रहा है। जो काम पूर्व के अधिकारी व जनप्रतिनिधि नहीं कर सके वह दिव्या मित्तल ने कर दिखाया था।

वृद्ध श्रद्धालुओं की मांग पर चलवाए थे गोल्फ कार्ट

अपनी तैनाती के दौरान पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने मां विंध्यवासिनी धाम में दर्शन-पूजन को आने वाले वृद्ध श्रद्धालुओं की परेशानी को देखते हुए विंध्याचल में चार गोल्फ कार्ट व बस चलवाया था।

गुजरात से आए करीब तीन दर्जन वृद्ध श्रद्धालुओं ने पुरानी वीआईपी रोड पर दिव्या मित्तल से मुलाकात कर अपनी समस्या बताते हुए कहा था कि मंदिर तक पैदल पहुंचने में उन्हें काफी कठिनाई हो रही है। अधिक दूरी पैदल चलने पर सांस फूलने लगती है। मांग किया था कि वृद्ध व असमर्थ श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इलेक्ट्रिक टेंपो की व्यवस्था कराई जाए।

इसे गंभीरता से लेते हुए दिव्या मित्तल ने कानपुर से चार गोल्फ कार्ट और एक बस मंगवाकर श्रद्धालुओं के लिए निश्शुल्क संचालन शुरू कराया था। श्रद्धालुओं ने तत्काल व्यवस्था कराने के लिए उनके प्रति आभार जताया था।

शिक्षा और लेखन भी है प्रसंद

सरकारी सेवा से अलग होने के बाद दिव्या मित्तल को शिक्षा व लेखन भी पसंद है। कहा जा रहा है कि अब उनका फोकस शिक्षा, युवाओं को प्रेरित करने और लेखन पर भी रहेगा। प्रशासनिक सेवा में मिले अनुभवों को वह व्यापक समाज और खासकर नई पीढ़ी के साथ साझा करना चाहती हैं।

आईएएस के रूप में उन्होंने जिन समस्याओं को करीब से देखा, लोगों की जिन परेशानियों को समझा और प्रशासन चलाने के जो अनुभव हासिल किया वही अब उनकी नई पारी की पूंजी होगी।

विदाई के समय बैठाया गया था झूले पर

दिव्या मित्तल को जनपद से विदाई देते समय झूले पर बैठाकर फूलों की बारिश की गई थी। लोगों का कहना रहा कि ऐसी विदाई कुछ ही लोगों को नसीब होती है तो वहीं कुछ का कहना है कि ऐसे अधिकारियों को देश को जरूरत है, जहां भी रहेंगी, लोगों का भला होगा।

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