जासं, मीरजापुर : राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के पदाधिकारियों की बैठक पथरहिया में हुई, जिसमें राज्य सरकार के वित्त विभाग द्वारा 24 अप्रैल को महंगाई भत्ता एवं अन्य भत्ते रोके जाने पर कड़ी नाराजगी जताया। जिलाध्यक्ष नारायण दुबे ने कहा कि प्रदेश में महंगाई भत्ते को रोके जाने के संबंध में आदेश करने की आवश्यकता नहीं थी, इससे कर्मचारी आक्रोशित हैं। 18 महीने का महंगाई भत्ता रोके जाने से इसका व्यापक असर इस दौरान सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के देयकों पर पड़ेगा। सरकार ने एनपीएस में अपनी हिस्सेदारी को 14 से घटाकर 10 प्रतिशत करने का निर्णय किया है, यह भी कोरोना संकट में अपेक्षित नहीं था। संविदा एवं आउट सोर्सिंग कर्मचारी जान पर खेलकर कोरोना नियंत्रण में लगे हुए हैं उनके नियमित समायोजन पर विचार किए जाने का यही सही वक्त है।

Posted By: Jagran

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