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उत्तर प्रदेश का पहला विकसित गांव बनेगा मीरजापुर का बघेड़ा खुर्द, ग्रामीण खुद तय करेंगे अपने क्षेत्र के विकास की रूपरेखा

By Suresh SharmaEdited By: Abhishek sharma
Published: Mon, 02 Nov 2026 02:50 PM (IST)

उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जिले का बघेड़ा खुर्द गांव प्रदेश का पहला 'विकसित गांव' बनने जा रहा है, जहां स्थानीय ...और पढ़ें

मीरजापुर का बघेड़ा खुर्द बनेगा यूपी का पहला विकसित गांव, ग्रामीण तय करेंगे विकास की रूपरेखा।

मीरजापुर का बघेड़ा खुर्द बनेगा यूपी का पहला विकसित गांव, ग्रामीण तय करेंगे विकास की रूपरेखा।

HighLights

  1. बघेड़ा खुर्द यूपी का पहला विकसित गांव बनेगा।

  2. स्थानीय जरूरतों और संसाधनों पर आधारित विकास योजना।

  3. ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से तैयार हुआ मॉडल।

जागरण संवाददाता, मीरजापुर। उत्तर प्रदेश के विकास के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रदेश के पहले 'विकसित गांव' की रूपरेखा तैयार करने के लिए मीरजापुर जिले के छानबे विकास खंड स्थित बघेड़ा खुर्द गांव का चयन किया गया है।

खास बात यह है कि इस मॉडल के तहत अब गांवों में विकास कार्य कागजी फरमानों से नहीं, बल्कि वहां के स्थानीय लोगों की वास्तविक जरूरतों और उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों को ध्यान में रखकर कराए जाएंगे। इस अनूठी पहल के जरिए बघेड़ा खुर्द में प्रदेश का पहला 'विकसित ग्राम पंचायत प्लान' (VGPP) तैयार किया गया है, जिसे भविष्य में उत्तर प्रदेश की अन्य सभी ग्राम पंचायतों में भी लागू किए जाने की योजना है।

प्रयागराज-मीरजापुर मार्ग के पास बसा है बघेड़ा खुर्द

प्रयागराज-मीरजापुर मुख्य मार्ग से लगभग तीन किलोमीटर दक्षिण दिशा में पहाड़ के आंचल में बसा बघेड़ा खुर्द गांव भौगोलिक और सामाजिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। छानबे विकास खंड के इस गांव की कुल आबादी लगभग 13 हजार है, जबकि यहां मतदाताओं की संख्या करीब 4500 है। शिक्षा के क्षेत्र में यह गांव आसपास के इलाकों से काफी आगे है। यहां तीन निजी इंटर कॉलेज, एक महाविद्यालय, तीन प्राथमिक विद्यालय और एक आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहा है।

हालांकि, इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद ग्रामीणों की कुछ बुनियादी और अहम मांगें हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने प्रमुख रूप से एक आधुनिक स्वास्थ्य केंद्र और युवाओं के लिए खेल का मैदान चिन्हित कर बनवाने की मांग रखी है। आजीविका की बात करें तो इस गांव की आर्थिक स्थिति ग्रामीण परिवेश की अनूठी तस्वीर पेश करती है। यहां की कुल आबादी का 4 प्रतिशत हिस्सा सरकारी व गैर-सरकारी पेशों से जुड़ा है, 4 प्रतिशत लोग अपने व्यवसाय (व्यापार) मेंतनात हैं, जबकि शेष 90 प्रतिशत आबादी पूरी तरह से कृषि कार्यों और मजदूरी पर निर्भर है।

मास्टर ट्रेनरों और टीआरआई के सहयोग से बनी कार्ययोजना

केंद्र सरकार से विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके मास्टर ट्रेनरों ने 'ट्रांसफार्म रूरल इंडिया' (TRI) के सहयोग से इस गांव में एक विस्तृत कार्यशाला का आयोजन किया। इस प्रक्रिया को जमीन पर उतारने के लिए झारखंड से आए निहार महाराणा और मध्य प्रदेश के हरिविलास द्विवेदी जैसे विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को साथ लेकर पूरे गांव का पैदल भ्रमण किया।

विशेषज्ञों की टीम ने गांव के सबसे ऊंचे हिस्से से लेकर निचले हिस्सों तक का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने बारिश के पानी के प्राकृतिक बहाव, भौगोलिक स्थिति, जमीन की बनावट और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का बारीकी से अध्ययन किया। विकास की इस रूपरेखा को वैज्ञानिक और सुचारू तरीके से तैयार करने के लिए पूरी पंचायत को कुल छह हिस्सों में बांटा गया। हर एक हिस्से में विशेष बैठकों का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने खुलकर हिस्सा लिया और अपने क्षेत्र की मुख्य समस्याओं व प्राथमिक जरूरतों के बारे में खुलकर अपनी बात रखी।

पेयजल, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार पर रहा मुख्य फोकस

गांव में आयोजित बैठकों के दौरान ग्रामीणों ने मुख्य रूप से स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, शुद्ध पेयजल, पक्की सड़कें और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की जोरदार मांग रखी। इस पूरी कार्ययोजना में केवल सड़क और नाली जैसे पारंपरिक निर्माण कार्यों तक ही सीमित नहीं रहा गया है, बल्कि तालाबों के पुनरुद्धार, जल संरक्षण और जमीन के बेहतर उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग होने से गांव में आजीविका और रोजगार के साधन स्वतः बढ़ेंगे। इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए वीपीआरपी (VPRP), वीजीपीपी (VGPP), वीडीपी (VDP) और जीपीडीपी (GPDP) की विभिन्न योजनाओं को एक साथ इंटीग्रेट (समेकित) करके काम किया जाएगा।

पोर्टल के माध्यम से आगे बढ़ेगी प्रक्रिया, कर्मचारियों को मिल रहा प्रशिक्षण

ग्राम्य विकास विभाग अब एक विशेष पोर्टल के माध्यम से प्रदेश की सभी पंचायतों में ऐसी ही सुव्यवस्थित योजनाएं तैयार कराने की तैयारी में है। इस चरणबद्ध योजना को सफल बनाने के लिए प्रदेश स्तर से लेकर ब्लॉक और पंचायत स्तर तक के प्रशासनिक कर्मचारियों और अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

बघेड़ा खुर्द गांव की यह सफलता आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के ग्रामीण विकास की दिशा तय करेगी। ग्रामीणों की सहभागिता से तैयार होने वाला यह पहला मॉडल राज्य के अन्य गांवों के लिए एक मिसाल बनेगा, जिससे आत्मनिर्भर और सशक्त गांव की परिकल्पना सच साबित हो सकेगी।

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