जागरण संवाददाता, मीरजापुर : शहर में गंगा किनारे के घाटों का अस्तित्व कटान की वजह से खतरे में पड़ गया है। दो दिन पहले हुई बारिश में अकेले बदली घाट पर जबरदस्त कटान हुई जिससे नीचे की दो सीढि़यां गंगा में समाहित हो गईं। गंगा किनारे वाले मोहल्लों के लोग भी इसी वजह से दहशत में कि कहीं यह कटान उनके घरों को अपनी आगोश में न ले ले। वहीं दूसरी तरफ कटान रोकने के सारे प्रयास सिर्फ योजनाओं व कागज तक ही सिमटकर रह गए हैं।

हर वर्ष से ज्यादा इस वर्ष गंगा के किनारे कटान हो रहा है। अभी तेज व मूसलाधार बारिश शुरू भी नहीं हुई लेकिन गंगा किनारे कटान शुरु हो गया है। गंगा किनारे वाले मोहल्लों में लोगों को तेजी से हो रही कटान से डर है। बदली घाट निवासी महेश ने बताया कि पिछले साल तो बारिश में कटान कम हुई थी क्योंकि तब गंगा का प्रवाह दूसरी तरफ था लेकिन इस वर्ष स्थिति थोड़ी अलग है। गंगा तेजी से शहर की ओर से बह रही है जिसकी वजह से कटान ज्यादा हो रही है। उन्होंने बताया कि जब रात को हम सोते हैं तो कभी-कभी गंगा की तेज धारा मिट्टी से टकराती है और भयंकर आवाज आती है। जिससे मोहल्ले के लोग डर जाते हैं। दो दिन पहले बदली घाट की दो सीढि़यां गंगा में डूब गईं और बाकी सीढि़यों की मिट्टी भी बह गई है। यदि हल्की सी भी बारिश होगी तो यह सीढि़यां गंगा में समाहित हो जाएंगी। ¨सचाई विभाग कर रहा उपाय

¨सचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वे गंगा का कटान रोकने के लिए कटान वाली जगहों पर पौधरोपण व बालू की बोरियां रखने का काम कर रहे हैं ताकि घाटों का संरक्षण हो सके। मई में यहां के अधिकारियों व कर्मचारियों की एक टीम कानपुर में ट्रे¨नग के लिए गयी थी जिसमें कटान रोकने के उपायों पर जानकारी ली गई है। जल्द ही यह टीम भी मोर्चा संभाल लेगी और कटान रोकने का पूरा प्रयास किया जाएगा।

Posted By: Jagran

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