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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 28, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Young Achievers: मेरठ के फलित सिजरिया ने बदला युवाओं का नजरिया, पढ़ाई के दौरान अभियान को ऐसे मिली गति

By PREM DUTT BHATTEdited By:
Published: Mon, 28 Dec 2020 09:00 AM (IST)

Young Achievers मन में तरह-तरह के खयालों समाज के साथ जुड़ने लोगों को जोड़ने और सही दिशा में आगे बढ़ने ...और पढ़ें

नौ प्रतियोगिताओं में पूरे देश से पंद्रह सौ से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
नौ प्रतियोगिताओं में पूरे देश से पंद्रह सौ से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

मेरठ, [अमित तिवारी] । Young Achievers किशोरावस्था जीवन का वह पड़ाव है, जब शरीर में तेजी से बदलाव होते हैं। इसके साथ ही मन भी कई तरह के बदलावों से गुजरता है। स्कूली शिक्षा, यौवन की ओर बढ़ते कदम, सामने करियर और ढेर सारी इच्छाएं युवाओं के मन में घूमती रहती हैं। यही समय सही लक्ष्य( साधने का सही समय भी होता है। मन में तरह-तरह के खयालों, समाज के साथ जुड़ने, लोगों को जोड़ने और सही दिशा में आगे बढ़ने की इच्छाएं मन में उत्पन्न हुई तो स्कूल में पढ़ाई के दौरान मेरठ के फलित सिजरिया ने एक युवा अभियान शुरू कर दिया। मेरठ के विभिन्न स्कूलों से कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के सीबीएससी एवं आईसीएसई स्कूलों के छात्रों को साथ जोड़कर स्टूडोमैट्रिक्स नामक संगठन बनाया। जिसमें युवा वर्ग के प्रति समाज का नजरिया बदलने का काम किया है।

मंच मिला तो खुलकर खिले छात्र

प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं के इस अनूठे प्रयोग से समकक्ष छात्र छात्राओं की ऊर्जा एवं क्षमताओं के विकास को बढ़ावा देकर फलित ने अपने साथ दूसरों को भी एक मंच प्रदान किया है। स्टूडोमैट्रिक्स के तहत छात्र राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं कार्यशाला का आयोजन कर रहे हैं। इसका उद्देश्य छात्र छात्राओं के बीच स्कूल एवं स्कूल से बाहर नई प्रतिभाओं का सृजन, अनुशासन एवं राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के लिए उनकी ऊर्जा का धनात्मक एवं कल्याणकारी प्रयोग करना है।

लॉकडाउन में तेजी से बढ़ा संगठन

लॉकडाउन के बीच इस प्रयोग के तहत नौ प्रतियोगिताएं कराई जिसमें पूरे देश से पंद्रह सौ से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। लॉकडाउन के बढ़ जाने के कारण स्टूडोमैट्रिक्स ने 10 विभिन्न प्रतियोगिताएं एवं तीन नए प्रकल्प भी शुरू किए।जब पूरा देश बंद था उसी दौरान देश के 50 से अधिक शहरों से 2000 से अधिक छात्र तेजी से इस संगठन से जुड़े। इसी कड़ी में भारत की ग्रेटा थनबर्ग नाम से मशहूर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ कार्यरत 12 वर्षीय रिद्धिमा पांडे भी संगठन से जुड़ी। प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय शरणार्थी चिंतक केन्या के जोसेफ ओकेली सेजो भी युवाओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं। ललित ने विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं को जोड़ते हुए इस संगठन के अंतर्गत 25000 से अधिक बच्चों को जोड़ने में सफलता हासिल की है। इतना ही नहीं वह स्टूडोमैट्रिक्स के अंतर्गत तरह-तरह की अन्य शाखाएं भी खोलते जा रहे हैं, जिससे छात्रों को नई जिम्मेदारियों को निभाने का मौका भी दिया जा रहा है।

तय है एक वर्ष का लक्ष्य

छात्रों ने अपने एक वर्ष का लक्ष्य भी तय कर लिया है। इसमें बहुउद्देशीय नीति के तहत विभिन्न प्रतिभाओं वाले स्कूली छात्रों को उनकी प्रतिभा को निखारने, कौशल विकास करने एवं शैक्षिक पाठ्यक्रम के व्यवहारिक उपयोग का अनुभव प्रदान करना है। छात्रों का लक्ष्य समाज में स्कूली छात्रों द्वारा किये जा रहे समाज एवं मानवता के कल्याण के लिए कदमों को एक मंच प्रदान करना है। विभिन्न कला एवं अभिरुचि प्रकल्प के माध्यम से हर छात्र को रचनात्मक एवं धनात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की अवधारणा को पुष्ट करना है। इसके तहत मासिक पत्रिका का विमोचन भी शुरू कर दिया गया है जिसमें स्कूली छात्रों को पत्रकारिता एवं लेखन को प्रदर्शित करने का मौका भी दिया जा रहा है।

पढ़ाई में टॉपर और टीम के भी लीडर बने

फलित ने इसी साल केएल इंटरनेशनल स्कूल से 12वीं की बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण की और जिले में टॉपर रहे। वह चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर में परिवार के साथ रहते हैं। इस छात्र संगठन को आगे बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाने के साथ ही फलित ने अपने शहर से बाहर निकलकर दूसरे शहरों और फिर वहां से प्रदेश का दायरा पार कर देश के विभिन्न शहरों से छात्रों को जोड़ा है। यह संगठन पूरे देश के स्कूली छात्रों की ऊर्जा को सकारात्मक और सामाजिक समृद्धि की ओर केंद्रित कर रहा है। संगठन में वर्तमान में 150 से ज्यादा शहरों के करीब 25000 से अधिक छात्र जुड़ चुके हैं। इसमें छात्र नृत्य, गायन, वादन, चित्रकारी, फोटोग्राफी, वाद-विवाद, पाककला, फैशन, खेल, अभिनय आदि के माध्यम से कला का प्रदर्शन करते हैं। संगठन हर छात्र की कला को अभिव्यक्ति प्रदान करता है। संगठन की ओर से पिछले कुछ महीनों में कोविड के समय में 100 से अधिक ऑनलाइन प्रतियोगिताएं, वेबीनार, वर्कशॉप अभियान चलाए गए। अलग-अलग शहरों और स्कूलों में इसकी ईकाई खुल चुकी है। अपने संगठन के माध्यम से हम उम्र किशोरों की अभिव्यक्ति को सशक्त किया है। जिस उम्र में बच्चे पढ़ाई व पारिवारिक दबाव के बीच भविष्य की उधेड़बुन में रहते हैं, वहां स्टूडोमैट्रिक्स से जुड़े छात्र देश और समाज को सकारात्मक दिशा देने का काम कर रहे हैं। स्टूडोमैट्रिक्स की खुद की मासिक पत्रिका स्टूडोस्पेक्ट्रम का विमोचन पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने किया था।

समस्या है तो समाधान भी है

देश का यह अनोखा स्कूली छात्रों का संगठन है जो किशोरों को जागरूक करता है। पर्यावरण संरक्षण, योग, आत्मनिर्भर भारत, कौशल विकास को लेकर भी संगठन काम करता है। फलित के अनुसार शहर, प्रदेश और देश में तमाम समस्याएं हैं तो उनका समाधान भी है और उस समस्या पर जितनी चर्चा होगी उसका समाधान भी आसानी से निकल जाएगा।

और भी उपलब्धियां हैं फलित की झोली में

फलित ने कक्षा बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में 99.6 फीसद अंक हासिल कर जिले को टॉप किया था। इसके अलावा एनटीएसई यानी नेशनल टैलेंट सर्च एग्जामिनेशन में भी सफल रहे थे। ऑल इंडिया लॉ एंटरेंस टेस्ट में फलित की ऑल इंडिया रैंक 31 एक थी। क्लैट में ऑल इंडिया रैंक 431 हासिल किया था। इसके अलावा रोटरी क्लब बिहार झारखंड के वेबिनार में इंटरनेशनल रिलेशंस पर वक्तव्य दे चुके हैं। इससे पहले कक्षा 11वीं में ही डिप्लोमेट्रोन स्टार्ट किया था। जिसके तहत चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय सहित अन्य विश्वविद्यालयों में आयोजित कार्यक्रम में देशभर के छात्र हिस्सा लेने मेरठ आए थे। इसके अलावा अफगानिस्तान व अफ्रिका से भी छात्र कॉन्फ्रेंस के लिए भारत पहुंचे थे। वर्तमान में फलित दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं। पढ़ाई के साथ ही उनके तरह तरह के कार्यक्रम जारी है।

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