मेरठ, [अमित तिवारी]। Young Achievers अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब तक मेरठ का नाम बल्लेबाजों के लिए ही सुना जाता रहा है। दोनों ओर से गेंद घुमाने वाले स्विंग मास्टर प्रवीण कुमार, कर्ण शर्मा और वर्तमान भारतीय टीम के स्विंग मास्टर भुवनेश्वर कुमार ने देश दुनिया में मेरठ का नाम खूब रोशन किया है। अब क्रिकेट में मेरठ की बल्लेबाजी भी नाम सुनाम करती नजर आ रही है। अंडर-19 भारतीय टीम के कप्तान के तौर पर मेरठ के प्रियम गर्ग भारत से इंग्लैंड तक अपनी धुआंधार बल्लेबाजी की चाप पहले ही छोड़ चुके हैं। अंडर-19 वर्ल्ड कप में भी टीम की अगुवाई करने के बाद इस सीजन के आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद की तरफ से खेलते हुए एक मैच में हाफ सेंचुरी मार कर टीम को जीत भी दिलाई। अपने प्रदर्शन के साथ ही आईपीएल के अगले सीजन में भी प्रियम ने किसी ने किसी टीम में जगह सुनिश्चित कर ही ली है। प्रियम गर्ग अब अपनी बल्लेबाजी को और धार देते हुए भारतीय क्रिकेट टीम की ओर कदम बढ़ाना चाह रहे हैं। पिछले साल उत्तर प्रदेश रणजी चौथी के कप्तान बनाए जाने के दूसरे ही दिन उन्हें अंडर-19 वर्ल्ड कप टीम का कप्तान घोषित कर दिया गया था। इस सीजन में वह उत्तर प्रदेश की रणजी टीम से भी खेलेंगे, जिसके लिए कानपुर में अभी ट्रायल होने बाकी हैं।

अंडर-19 से जाता है भारतीय टीम का रास्ता

भारतीय टीम का रास्ता अंडर-19 वर्ल्ड कप से होकर ही गुजरता है। मोहम्मद कैफ, विराट कोहली, युवराज सिंह, जहीर खान जैसे क्रिकेटर भी अपनी छाप अंडर-19 विश्व कप टीम में ही छोड़ी थी। उसी रास्ते पर आगे बढ़े प्रियम के लिए भी यह उपलब्धि भारतीय टीम का रास्ता खुलने जैसी ही रही है। अंडर-19 भारतीय टीम के कप्तान के तौर पर प्रियम इंग्लैंड में ही इंग्लैंड को हराकर लौटे थे। इसके अलावा त्रिकोणीय सीरीज में बांग्लादेश और पाकिस्तान के खिलाफ भी इंडिया अंडर-19 टीम की अगुवाई की। बीसीसीआई की चैलेंजर ट्रॉफी में भी प्रियम ने बेहतरीन कप्तानी के साथ ही बल्लेबाजी में शानदार प्रदर्शन दिखाया। दाएं हाथ के बल्लेबाज प्रियम मध्यक्रम में खेलते हैं और इंडिया अंडर 23 के कप्तान भी रह चुके हैं। इनकी इन्हीं उपलब्धियों ने अंडर-19 वर्ल्ड कप की जिम्मेदारी भी दिलाई।

दोहरा शतक जड़ने में माहिर हैं प्रियम

प्रियम की फोकस्ड बल्लेबाजी की झलक कुछ साल पहले अंडर 16 में ही देखने को मिल गई थी, जब उन्होंने दोहरा शतक जड़ा था। प्रियम गर्ग अब अंडर-16 से रणजी ट्रॉफी तक की बल्लेबाजी में 10 मैचों में दोहरा शतक लगा चुके हैं। अंडर-16 में दो डबल सेंचुरी और अंडर-19 में एक डबल सेंचुरी मारी है। उसी दौरान इंडिया कैंप और नेशनल क्रिकेट एकेडमी में भी एक-एक दोहरा शतक जड़ा। कूच बिहार व रणजी ट्रॉफी में प्रियम ने मध्यप्रदेश के खिलाफ 200, छत्तीसगढ़ के खिलाफ 202, त्रिपुरा के खिलाफ 206, गुजरात के खिलाफ 206, रायपुर, दिल्ली व हरियाणा के खिलाफ 200 रनों की शानदार पारी खेली है। प्रियम के नाम शतक से अधिक दोहरे शतक हैं। उन्होंने अब तक करीब आधा दर्जन शतक मारे हैं।

दोहरा शतक मारने वाले आठ साल में तीसरे खिलाड़ी

पिछले सीजन में रणजी मैच में त्रिपुरा के खिलाफ दोहरा शतक जड़कर पिछले आठ सालों में रणजी मैच में दोहरा शतक मारने वाले प्रियम मेरठ के तीसरे खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले मेरठ के ही परविंदर सिंह ने वर्ष 2011 में ओडिशा के खिलाफ, वर्ष 2015 में मेरठ के ही उमंग शर्मा ने बड़ौदा के खिलाफ दोहरा शतक मारा था। वर्ष 2018 में त्रिपुरा के खिलाफ प्रियम ने दोहरा शतक मारा। प्रियम ने पिछले रणजी ट्रॉफी के 10 मैच खेलकर 814 रन बनाए थे। 67.83 के एवरेज के साथ वह यूपी के दूसरे सर्वाधिक स्कोरर रहे।

तोड़ा रैना का रिकॉर्ड भी

लखनऊ में पिछले साल रणजी सीजन में प्रियम गर्ग ने त्रिपुरा के खिलाफ 206 रन बनाकर एक नया रिकॉर्ड भी अपने नाम किया था। प्रियम ने अपनी धमाकेदार पारी से न केवल टीम को शानदार जीत दिलाई बल्कि वर्ष 2011 में पंजाब के खिलाफ पांचवें स्थान पर खेलते हुए सुरेश रैना के 205 रन के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। इसके साथ ही प्रियम उत्तर प्रदेश टीम के लिए रणजी में सर्वाधिक रन बनाने वाले छठे खिलाड़ी बन चुके हैं।

पिता की तपस्या बेटे का हुनर

प्रियम के पिता नरेश कुमार गर्ग ने टैक्सी चलाकर परिवार का पालन पोषण किया है। वह हर दिन सुबह किला परीक्षितगढ़ से प्रियम को भामाशाह पार्क पहुंचाते और शाम को अपने साथ ही लेकर जाते थे। मेरठ कॉलेज क्रिकेट एकेडमी के कोच संजय रस्तोगी के मार्गदर्शन में प्रियम ने क्रिकेट का ककहरा सीखा ही नहीं बल्कि बहुत जल्द उसे जीने भी लगे। साल 2011 में प्रियम क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ने लगे थे। उसी दौरान उनके पिता नरेश व माता कुसुम देवी माता वैष्णो देवी के दरबार पहुंचे और प्रेम के लिए बेहतरीन क्रिकेट कैरियर के प्रार्थना की। नरेश कुमार के अनुसार माता ने प्रार्थना सुनी लेकिन उसी दौरान प्रियम के मां की तबीयत बिगड़ने लगी। पीलिया की शिकायत से जांच शुरू हुई जो लीवर के इंफेक्शन तक पहुंच गई। इसके बाद स्थिति खराब होती गई और 11 मार्च 2012 को उनके निधन के साथ ही प्रियम ने भी बल्ला छोड़ दिया था।

ऐसे बदला खुद को

मां की मृत्यु के बाद प्रियम का बल्ला छूटने पर संजय रस्तोगी ने पिता नरेश को ट्रेनिंग शुरू कराने के लिए प्रेरित किया। आर्थिक हालत बेहद खराब होने के कारण जब उन्होंने असमर्थता व्यक्त की तो कोच और मेरठ जिला क्रिकेट संघ प्रियम के परिजन बने और ट्रेनिंग शुरू कराई। पिता नरेश बताते हैं यहीं से उनकी हिम्मत बंधी और बेहद खराब दौर से गुजरते हुए उन्होंने घर में बच्चों के लिए रोटी बनाने से लेकर बाहर उन्हें पढ़ाने तक के लिए पूरी मेहनत की। समय बदला और प्रियम भी बल्ला भी बोलने लगा। नरेश कुमार का कामकाज भी चल पड़ा और उनके साथ अन्य भाई-बहन भी पढ़ने और बढ़ने लगे। प्रियम के भाई-बहन मेडिकल क्षेत्र से जुड़े हैं जबकि वह घर में अकेले क्रिकेटर बने।

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