विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 18, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

World Heritage Day: महाभारतकालीन है बिजनौर में स्थित विदुर कुटी, मंत्र में भी है जिक्र

By Parveen VashishtaEdited By:
Published: Mon, 18 Apr 2022 07:30 AM (IST)

बिजनौर में स्थित विदुरकुटी के सौन्दर्यीकरण के लिए शासन और प्रशासन ने कदम उठाए हैं। डीएम की पहल पर प्रशासनिक ...और पढ़ें

बिजनौर में स्थित विदुर कुटी महाभारतकालीन है
बिजनौर में स्थित विदुर कुटी महाभारतकालीन है

बिजनौर, राजनारायण कौशिक। कुरु वंश के महामंत्री महात्मा विदुर की तपोस्थली विदुरकुटी का ऐतिहासिक महत्व है। धार्मिक कार्यक्रमों में भगवान को भोग लगाने के लिए मंत्र का उच्चारण किया जाता है। उस मंत्र में भी महात्मा विदुर की कुटिया का स्पष्ट जिक्र है। अब इस ऐतिहासिक स्थल को विकसित किए जाने का काम शुरू हुआ है।

विदुर कुटी का है पौराणिक महत्व

पांच हजार साल पुराने महाभारतकालीन इतिहास में विदुर कुटी का पौराणिक महत्व है। महात्मा विदुर ने महाभारत युद्ध को टालने के लिए महाराज धृतराष्ट्र को समझाने का प्रयास भी किया, लेकिन पुत्र दुर्योधन के मोह में धृतराष्ट्र ने उनकी सलाह को अनसुना कर दिया। महात्मा विदुर हस्तिनापुर में अपना सब कुछ छोड़कर गंगा के पूर्वी छोर पर आए और गंगा किनारे कुटी बनाकर रहने लगे थे। मान्यता है कि महाभारत काल में जब योगीराज श्रीकृष्ण कौरवों को समझाने में अफसल रहे, तो वह गंगा के पूर्वी छोर पर स्थित महात्मा विदुर की कुटी में आए थे।

विदुरकुटी आए थे श्रीकृष्ण

महात्मा विदुर के साथ-साथ योगीराज श्रीकृष्ण भी कौरव और पांडवों के बीच युद्ध के पक्ष में नहीं थे। युद्ध टल जाए, इसलिए श्रीकृष्ण ने दुर्योधन से वार्ता की और पांडवों को सिर्फ पांच गांव देने के लिए राजी करने का प्रयास किया, लेकिन दुर्योधन बिना युद्ध सुई की नोक के बराबर जमीन देने को तैयार नहीं था। इससे नाराज होकर श्रीकृष्ण दुर्योधन के मेवे त्यागकर गंगा पार कर महात्मा विदुरकुटी पहुंचे और बड़े प्रेम से बथुवे के साग से भोजन किया। इस प्रसंग का जिक्र पूजा-अर्चना के बाद भगवान को भोग लगाने के मंत्र 'ऐसा भोग लगाओ मेरे प्रभु जी, जो अमृत बन जाए, दुर्योधन की मेवा त्यागी साग विदुर खायो जी।' में महात्मा विदुर का जिक्र है।

यहां पूरे साल मिलता है बथुआ

महात्मा विदुर की तपोस्थली विदुरकुटी में 12 माह बथुवा मिलता है। मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण की कृपा²ष्टि से इस क्षेत्र में बथुवा मिलता है। वर्तमान में गंगा की धारा विदुरकुटी से दो से ढाई किलोमीटर दूर बह रही है।

विकसित हुई विदुरकुटी

विदुरकुटी के सौन्दर्यीकरण के लिए शासन और प्रशासन ने अहम कदम उठाए है। जहां डीएम उमेश मिश्रा के पहल पर प्रशासनिक स्तर पर जीर्ण-शीर्ण भवनों की मरम्मत कराई गई है। वहीं मुख्य मार्ग से महात्मा विदुर कुटी तक सड़क के दोनों ओर एवं गंगा के खादर में वृहद पौधारोपण अभियान चलाया गया। महात्मा विदुर की इस पावन भूमि पर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल समेत प्रदेश और केंद्र सरकार के कई मंत्री भी पहुंचे।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।