यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 28, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मेरठ में मतांतरण: दिल्ली तक जुड़े हैं पूरे कारनामे के तार, अस्थायी चर्च में मिले रजिस्टर
मेरठ के मंगतपुरम में मतांतरण मले के तार दिल्ली तक जुड़े हैं। क्राइम ब्रांच इंटेलीजेंस और एलआइयू की टीम ने ...और पढ़ें

मेरठ, जागरण संवाददाता। मंगतपुरम में मतांतरण मले के तार दिल्ली तक जुड़े हैं। दिल्ली के महेश पास्टर ने पूरी प्लानिंग से मतांतरण कराया है। कोरोना काल में ही मतांतरण की नींव रखी गई थी। बेटियों की शादी और बच्चों की पढ़ाई का भी खर्च महेश उठा रहा था। यहां पूरे मामले की निगरानी रेलवे रोड निवासी अनिल पर थी। देर शाम मंगतपुरम में क्राइम ब्रांच, इंटेलीजेंस और एलआइयू की टीम भी पहुंची। जांच में अस्थायी चर्च से कुछ रजिस्टर मौके से मिले हैं, जिनमें मतांतरण कराए गए सभी लोगों के नाम लिखे हैं। उन्हें किस तरह से रकम मुहैया कराई जाती है, इसका भी उल्लेख है। प्रमाण मिलने के बाद एसएसपी ने ब्रह्मपुरी थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया है। महेश पास्टर और अनिल की तलाश की जा रही है।
पुलिस द्वारा अस्थायी चर्च की तलाशी
मामला सामने आने के बाद हिंदू जागरण मंच के पूर्व महानगर अध्यक्ष सचिन सिरोही के नेतृत्व में हिंदू संगठन के लोग भी मौके पर पहुंचे और हंगामा किया। पुलिस ने कार्रवाई का भरोसा देकर समझा। पुलिस द्वारा अस्थायी चर्च की तलाशी ली गई। यहां कुछ दस्तावेज मिले हैं, अभी तक की जानकारी में सामने आया कि मंगतपुरम कालोनी में करीब 550 लोग रहते हैं, इसमें से 400 से ज्यादा लोगों का मतांतरण करा दिया गया है। बाकी लोगों के विरोध करने पर मतांतरण का मामला प्रकाश में आया है। प्राथमिक जांच में सामने आया कि ईसाई संस्था के लोग कोरोना काल यानि 2020 से ही लोगों को खाना और अन्य सामान दे रहे थे।
बेटियों की शादी ईसाई समुदाय के युवकों से कराई
महेश पास्टर ने मंगतपुरम में रहने वाले लोगों की बेटियों की शादी भी ईसाई समुदाय के युवकों से कराई है। शादी का खर्च भी महेश ही उठाता था। यहां के बच्चों को भी संस्था द्वारा ही पढ़ाया जा रहा है। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया है। उनका कहना है कि उन्होंने ईसाई धर्म कबूल नहीं किया है। बल्कि कुछ लोग मंगतपुरम की जमीन कब्जा करने के लिए मतांतरण का ड्रामा कर रहे हैं।
बनाया था मंगतपुरम के लोगों का ग्रुप
पुलिस से शिकायत करने वालों का कहना है कि मंगतपुरम के लोगों को ग्रुप बनाकर उन्हें मोटी रकम दी जा रही थी, ताकि लोगों को ईसाई धर्म कबूल कराया जा सकें। पुलिस उक्त ग्रुप के सदस्यों की पड़ताल कर रही है।
