हाई रिस्क श्रेणी के लोग सर्दियों में बरतें सतर्कता, वायरल संक्रमण से बचाव के लिए लगवाएं फ्लू की वैक्सीन
सर्दियों में हाई रिस्क वाले लोगों को वायरल संक्रमण और प्रदूषण से बचने के लिए फ्लू वैक्सीन लगवाने और विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

डॉ. तनुराज सिरोही
HighLights
वायरल संक्रमण से बचाव को हाई रिस्क वाले लगवाएं फ्लू वैक्सीन।
बुजुर्गों के लिए धूप और विटामिन डी हड्डियों को मजबूत करे।
प्रदूषण के कारण सुबह की सैर टालें, मास्क का उपयोग करें।
जागरण संवाददाता, मेरठ। सर्दी शुरू हो चुकी है। वातावरण में ठंडक बढ़ रही है। इसके साथ वायु प्रदूषण भी अपने चपेट में ले रहा है। इस मौसम परिवर्तन के समय हाई रिक्स श्रेणी के लोग सबसे ज्यादा सतर्कता बरतें। हाई रिस्क श्रेणी में वो लोग आते हैं, जो बीपी, शुगर, सांस, हृदय रोग, कैंसर, अर्थराइटिस, पुराने लकवे की बीमारी से परेशान हैं। इनको वायरल संक्रमण से बचने के लिए फ्लू की वैक्सीन तत्काल लगवा लेनी चाहिए।
साल में एक बार लगती है। इसके अलावा धूप जरूर सेंके। इन दिनों विटामिन डी की जरूरत बुजुर्गों को सबसे अधिक होती है। सर्दियों में विटामिन डी की कमी से कमजोर हड्डि्यों के चलते अक्सर बुजुर्गों के गिरने से चोटिल होने के मामले बढ़ जाते हैं। यह विटामिन इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक है।
धूल-धुआं और धुंध का मिश्रण सुबह जल्दी टहलने जाने वालों की सेहत बिगाड़ सकता है। इसलिए हाई रिस्क श्रेणी के लोग टहलने का समय बदल दें। यह बातें वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही ने दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर कार्यक्रम में कही। उन्होंने फोन पर बड़ी संख्या में लोगों की समस्याओं के निदान बताए।
पिता को रात में छींक व खांसी बहुत आती है। माता के हाथ-पैरों में सर्दियों अक्सर सूजन बनी रहती है। -विनोद रोहटा रोड।
-मौसम के साथ खानपान मेें बदलाव करें। ठंडी व खट्टी चीजें खाने से बचें। गुनगुना पानी पीएं। सर्दियों में सूजन की स्थिति बनती है। गुनगुने पानी में काम करें। दास्ताने पहनें।
65 साल की उम्र है। पैरों में दर्द रहता है। साइकिल चलाने पर बढ़ जाता है। क्या करें।- तेजवीर सिंह, रोहटा रोड।
-ठंड में हड्डियों व मांस पेशियों में दर्द की समस्या होती है। कैल्शियम लें। फिजियोथैरेपी कराएं।
मेरे गले में खराश है। 26 साल की उम्र है। सर्दियों में परेशान रहता हूं। -ईश्वर सिंह, भावनपुर।
-खाने में ठंडी व खट्टी चीजों से परहेज करेें। मौसमी फल और हरी सब्जी का सेवन बढ़ाएं। नमक के गरारे, गुनगुना पानी लें।
बीपी-शुगर भी है और गले में खराश भी बनी रहती है।-प्रेम प्रधान, मेरठ।
-बीपी की दवा ठंड में बढ़ा सकते हैं। शुगर नियंत्रित रखें। बाहर जाएं तो मास्क का प्रयोग करें। एलर्जी से बचेंगे।
आंख, नाक में पानी आ रहा है। गले में खराश और दर्द है।- सलोनी किलोना।
खट्टी-ठंडी चीजें नहीं खानी है। गुुनगुना पानी और सुबह-शाम गरारे करने हैं।
माता की उम्र 50 साल है। बदन दर्द से कराह रही हैं। भूख भी नहीं लगती है।-टीना, मुजफ्फरनगर।
मेनोपोज की स्थिति में हार्मोनल बदलाव का असर हो सकता है। धूप सेकें। इससे विटामिन डी मिलेगा। कैल्शियम लें। पालक, गाजर, बथुआ, मेथी की सब्जी खाएं। अनार, सेब संतरा भी लें। यदि शुगर है तो चीनी-मैदा न लें।
गले में कई दिनों से खराश है। सायं-सायं की आवाज आती है।-गफ्फार, मेरठ।
धूल, धुएं से बचें। घर से बाहर जाएं तो मास्क जरूर लगाएं। गरारें करें और सोने से पहले भाप लें।
गले में कई दिनों से संक्रमण है। वायरल बुखार भी है। -संजय ताेमर, मेरठ।
हर बुखार वायरल नहीं होात है। चिकित्सक को दिखाकर जांच कराएं। एंटी बायोटिक दवा अपने से न लें।
सर्दियों में पत्नी को सांस लेने में परेशानी होती है। - राजेंद्र कैलासपुरी।
-प्रदूषण के दौरान यह समस्या बढ़ सकती है। घर से बाहर निकलने पर मास्क जरूरी है। ब्लोअर या हीटर घर के अंदर न चलाएं। भाप व गरारे फायदा करेंगे।
बार-बार गले में खराश की स्थिति बन रही है। क्या वजह हो सकती है।- सुधांशु देवलोक कालोनी।
एलर्जी हो सकती है। मट्ठा, दही बंद कर दें। ठंडी चीजें भी न लें।
ठंड आने पर फेफड़े का इंफेक्शन से बचाव के लिए कोई इंजेक्शन आता है क्या।- ममता शर्मा, प्रहलाद नगर।
-फ्लू की वैक्सीन आती है। इसे लगवा लें।
18 साल का बेटा है। खांसी से कई दिनो से परेशान है।- राकेश, गंगानगर।
-मट्ठा, जूस, ठंडी चीजें न लें। घर में यदि कुत्ता पाल रखा हो या गमले में फूल निकल रहे हो तो इससे भी एलर्जी हो सकती है। गरारे, भाप जरूरी है। दवाएं भी चिकित्सक की सलाह पर ले सकते हैं।
जागरण के पांच सवाल
वायरल संक्रमण से बचाव के लिए फ्लू की वैक्सीन कब लगवानी चाहिए। इससे क्या फायदा होता है।
-सर्दियों में यह वैक्सीन लगवानी चाहिए। डब्ल्यूएचओ के 2026 के मानकों के अनुसार यह वैक्सीन दवा बाजार में मौजूद है। खासतौर पर जो लोग बीपी, शुगर, कैंसर, मोटापा, सांस- हृदय रोग, गठिया से परेशान हैं। पुराने लकवे की शिकायत है। इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य लोगों की तुलना में कम होती है, मौसम परिवर्तन या प्रदूषण बढ़ने पर जल्दी गले में खराश, खांसी, सर्दी-जुकाम व वायरल संक्रमण के चपेट में आ जाते हैं। स्वाइल फ्लू सहित इन समस्याओं से वैक्सीन सुरक्षा प्रदान करती है। साल में एक बार लगवानी होती है।
सर्दियों में बुखार को लेकर क्या सतर्कता बरतनी चाहिए। बुखार के दौरान पानी की कमी दूर करने के क्या लिक्विड डाइट जरूरी है।
हर बुखार वायरल नहीं होता है। सर्दियों में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, टाइफाइड भी हो सकता है। सर्दियों में बुखार आने पर तुरंत डाक्टर की सलाह लें। बिना डॉक्टर की पर्ची के तेज दर्द निवारक या एंटीबायोटिक्स, स्टेरायड लेने से बचें। बुखार के दौरान शरीर में पानी की कमी हो सकती है। गुनगुना पानी, हर्बल चाय, सूप या नींबू पानी का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। बुखार के दौरान तनाव कम और भरपूर नींद अवश्य लें।
ठंड में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। क्या समस्याएं हो सकती हैं।
सर्दियों में तापमान में गिरावट, हवा की गति धीमी होने और वातावरण में निचले स्तर पर धूल और धुएं के कणों से स्माग बनने से प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ जाता है। यह स्थिति स्वास्थ्य के लिए घातक होती है। प्रदूषण श्वसन तंत्र और हृदय को प्रभावित करता है। प्रदूषित हवा फेफड़ों की नली में सूजन पैदा करती है। सांस लेने में भारी दिक्कत होती है। फेफड़ों की पुरानी बीमारी से ग्रस्त लोगों की स्थिति ज्यादा बिगड़ सकती है। हवा में मौजूद हानिकारक कण जैसे पीएम 2.5 और पीएम 10 गले में खराश, लगातार खांसी और ब्रोंकियल इंफेक्शन का कारण बनते हैं। ब्लड प्रेशर बढ़ना और दिल के दौरे का जोखिम बढ़ जाता है। आंखों में जलन और सूखापन की स्थिति बन जाती है।
प्रदूषण का असर किस तरह के लक्षणों से उभरता है। बचाव के लिए क्या करें।
सांस फूलना या सीने में भारीपन महसूस होना, सीटी जैसी आवाज के साथ सांस लेना,लगातार सूखी खांसी या बलगम वाली खांसी आना, सुबह उठते ही नाक बहना, छींक आना या साइनस का दर्द, आंखों में लगातार चुभन, लालपन, थकान, चक्कर आना या सिरदर्द रहना जैसे लक्षण उभरते हैं। बचाव के लिए मास्क का प्रयोग करें। सुबह और शाम के समय जब प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक होता है, तब बाहर टहलने या भारी व्यायाम से बचें। धूप निकलने के बाद ही घर से बाहर निकलें। घर की हवा को साफ रखने के लिए एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल कर सकते हैं। शरीर में पानी की कमी न होने दें। गुनगुना पानी पिएं और गले को तर रखें। भाप लेने से श्वसन मार्ग साफ रहता है।
मौसम परिवर्तन और प्रदूषण बढ़ने पर कैसा खानपान होना चाहिए।
इम्युनिटी बढ़ाने के लिए विटामिन सी, एंटी-आक्सीडेंट से भरपूर फल जैसे आंवला, संतरा और हरी पत्तेदार सब्जियों को आहार में शामिल करें। गाजर, पालक, बथुआ, मेथी इन दिनों खाने चाहिए। ठंडी और खट्टी चीजों का सेवन बीमार कर सकता है, इनका सेवन करने से बचें। ज्यादा तला-भुना न खाएं। हाथ की धुलाई भी भोजन से पहले जरूर करें। गुनगुना पानी, अदरक, तुलसी और काली मिर्च की चाय फायदेमंद होती है।
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