मेरठ, जेएनएन। Waterlogging In Meerut एक घंटे की बारिश ने ही गुरुवार को नगर निगम के इंतजामों की पोल खोलकर रख दी। शहर के निचले इलाकों में तो जलभराव से लोग पहले ही परेशान थे, अब पाश कालोनियों में भी यही मुसीबत खड़ी हो गई है। घंटेभर की बारिश में ही साकेत, शास्त्रीनगर और डिफेंस कालोनी समेत कई पाश कालोनियां जलमग्न हो गईं, जबकि नाले भी ओवरफ्लो हो गए। रही सही कसर चोक सीवर लाइनों ने पूरी कर दी। जलभराव वाले मोहल्लों में बारिश का पानी घरों व दुकानों में घुस गया। जलभराव के कारण हजारों लोग कई घंटे घरों में ही कैद रहे। स्थिति इतनी बदतर रही कि बारिश बंद होने के बाद भी पाश कालोनियों में जलनिकासी में चार से पांच घंटे लग गए।

इन इलाकों में ज्‍यादा परेशानी

साकेत जैसे पाश इलाके में गोल मार्केट वाली रोड और पूरा मार्केट, गली नंबर दो, सेंट लुक्स वाली सड़क, मनोरंजन पार्क का क्षेत्र जलमग्न हो गया। सड़कों पर घुटनेभर पानी भर गया। मानसरोवर की गलियों का भी यही हाल रहा। साकेत की गली नंबर दो के घरों व गोल मार्केट की दुकानों में पानी भर गया। शास्त्रीनगर में नई सड़क, जैदी फार्म, सेक्टर तीन, सेक्टर चार, गोल मंदिर के पास सेक्टर पांच आदि क्षेत्रों की भी स्थिति खराब रही। बलवंत नगर, जेल चुंगी के पास लाल क्वार्टर, दामोदर कालोनी में भी जलभराव हुआ। जागृति विहार सेक्टर सात में लोगों के घरों में पानी घुस गया। मवाना रोड स्थित डिफेंस कालोनी, मीनाक्षीपुरम और नेहरूनगर में भारी जलभराव हुआ। नूर नगर अंडरपास, नौचंदी, हापुड़ रोड, बागपत रोड पर कमलानगर, मलियाना, किशनपुरा मार्केट, शेखपुरा, भोला रोड में भी पानी भरा रहा। दिल्ली रोड पर माधवपुरम और मोहकमपुर मोहल्ले में नालियां उफना गईं। ब्रह्मपुरी, मास्टर कालोनी, भगवतपुरा, जाटव गेट में भी जलभराव से लोग परेशान हुए।

अगर पूरे दिन बारिश होती तो क्या होता...

जलभराव को देखकर पाश कालोनियों में रहने वाले लोग सहम गए। उन्हें 26 जुलाई 2018 का वह मंजर याद आ गया।जब पूरे दिन बारिश से शहर में नाव चलने जैसी स्थिति बन गई थी। जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। इसे तीन साल बीत गए हैं। लेकिन नगर निगम महकमा हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा। गनीमत रही कि गुरुवार को बारिश एक घंटे ही हुई। अगर उस वक्त की तरह दिनभर होती तो शहर में फिर वही मंजर होता।

रेन वाटर हार्वेस्‍टिंग सिस्टम लगाए होते तो कुछ और बात होती

नगर निगम ने अगर शहर में जलभराव वाले स्थलों, पार्कों व सड़कों के किनारे रेन वाटर हार्वेस्‍टिंग सिस्टम स्थापित किए होते तो जलभराव की ये स्थिति न बनती। नगर निगम को मालूम है कि शहर के 29 स्थान जलभराव वाले है। करीब 21 स्थान ऐसे हैं जहां जलनिकासी की व्यवस्था नहीं है। इन स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्‍टिंग सिस्टम स्थापित करने से एक तो जल संचयन को बढ़ावा मिलेगा। भूगर्भ जल की स्थिति सुधरेगी। केंद्र के कैच द रेन अभियान को बल मिलेगा। दूसरा यह कि नगर निगम को भी जलभराव से राहत मिल जाएगी।

ये हैं जलभराव के कारण

- काली नदी पर जलालपुर में बने पुल के पास कचरा व सिल्ट जमा थी। जिससे ओडियन, आबूनाला-एक कुछ ही देर में ओवरफ्लो हो गए थे। इससे इन नालों के संपर्क नाले भी ओवरफ्लो हुए। जिससे जलभराव की स्थिति बनी। ये दोनों नाले काली नदी में गिरते हैं और नालों का यह अंतिम छोर है।

- साकेत, बलवंत नगर, शास्त्रीनगर, जागृति विहार में नाले ओवरफ्लो हुए, साथ में सीवर लाइनें भी जगह-जगह चोक हैं। कई जगह बारिश का पानी सीवर लाइन में ही जाता है। इससे इन इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी। साकेत में गोल मार्केट व गली नंबर दो के पास सीवर लाइन काफी समय से चोक है। वहीं, कमिश्नरी आवास नाला भी बंद पड़ा है। सेंटलुक्स रोड नाला भी ओवरफ्लो हो गया था।

- कसेरूखेड़ा नाले की सफाई पूरी न होने से यह उफनाया। जिससे बड़े नाले में गिरने वाली डिफेंस कालोनी की नालियों व मीनाक्षीपुरम की जलनिकासी बाधित हुई। इससे डिफेंस कालोनी का सोसाइटी कार्यालय पानी में डूब गया। आसपास की सड़कें भी जलमग्न हो गईं।

- बागपत रोड व दिल्ली रोड से जुड़े मोहल्लों में जलनिकासी के इंतजाम आधे-अधूरे हैं। मलियाना फाटक वाले नाले का निर्माण पूरा नहीं हुआ है। दिल्ली रोड नाले की सफाई न होने से माधवपुरम व मोहकमपुर की जलनिकासी बाधित हुई।

अब्दुल्लापुर स्कूल में जलभराव के बीच लगी वैक्सीन

वार्ड 17 अब्दुल्लापुर में जूनियर हाईस्कूल में बारिश का पानी मैदान में भर गया। यहां वैक्सीन लगाई जा रही थी। बारिश बंद होने के बाद जो भी लोग पहुंचे उन्हें जलभराव से गुजरना पड़ा। स्कूल की जलनिकासी न होने के कारण यह स्थिति बनी।

इनका कहना है

यह पहली तेज बारिश थी। जलभराव की स्थिति कई जगह बनी है। इसकी दो वजह सामने आईं। एक तो नालों के जलप्रवाह में कई जगह अवरोध हुआ। वहीं कई जगह सीवर लाइन भी ब्लाक हैं। ठेका कंपनी को सीवर लाइन की सफाई के निर्देश दिए हैं। नालों में जहां-जहां भी अवरोध की स्थिति बनी उसे दो दिन के भीतर ठीक किया जाएगा। कुछ स्थान जलभराव के ङ्क्षचहित हैं। उन स्थानों पर पंङ्क्षपग सेट लगाकर जलनिकासी के निर्देश निर्माण अनुभाग को दिए हैंं। आगे के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी कर रहे हैं। जलभराव की लोग जानकारी देंगे निर्माण, स्वास्थ्य व जलकल अनुभाग जलनिकासी सुनिश्चित कराएगा।

- मनीष बंसल, नगर आयुक्त

Edited By: Prem Dutt Bhatt