मेरठ, जेएनएन। खरखौदा के नालपुर गांव स्थित एनसीआर मेडिकल इंस्टीटयुट आफ साइंसेज में शनिवार को अरुणोदय संस्था के तत्वावधान में भूगर्भ जल सप्ताह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान के चेयरमैन कैप्टन विकास गुप्ता और मंडलायुक्त सुरेन्द्र सिंह रहे।

कैप्टन विकास गुप्ता ने कहा कि गन्ना तराई की फसल होती थी। वेस्ट यूपी में एक किलो चावल पैदा करने में पांच हजार लीटर पानी प्रयोग होता है। कहा कि गन्ने और धान की खेती जल संरक्षण के लिए खतरा है। पचास वर्ष पूर्व किसानों की थाली में चावल नहीं होता था। खाने-पीने की पद्धति में बदलाव हुआ है। दूध की पूर्ति पाउडर से हो रही है। यमुना के गंदे पानी में उग रहीं सब्जियां शरीर के लिए खतरा हैं। मंडलायुक्त सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि जल संरक्षण को लेकर मंडल में आठ सौ नए तालाब बनाने का काम किया जाएगा। जिसमें से पांच सौ तालाबों पर काम शुरू हो चुका है। कहा कि जल संरक्षण को लेकर जनता को अपना कर्तव्य मानकर आगे आना होगा। महानिदेशक डा. अश्रि्वनी शर्मा, डा. अनिल कपूर, डा. अवधेश प्रताप, डा. हिमानी अग्रवाल, डा. शिवानी अग्रवाल और संस्था की अध्यक्ष डा. अनुभूति चौहान ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

जल संरक्षण को लेकर कमिश्नर को आई गांव की याद

जल संरक्षण को लेकर मंडलायुक्त को अपने गांव की याद आ गई। उन्होंने कहा कि मथुरा में बलदेव ब्लाक में उनका गांव यमुना नदी के किनारे है। कहा कि बचपन में वह लोगों से कहते थे कि आने वाले समय में पानी समाप्त हो जाएगा। लोग उनकी इस बात पर हंसते थे। कहा कि गांव में उस समय पानी बीस फीट पर था, अब छह सौ फीट पर पहुंच गया। जब पानी मीठा था, आज खारा है।

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