मेरठ: अज्ञात वाहनों की टक्कर से दो की मौत, पहचान मिटने तक रौंदते रहे वाहन
दो अलग-अलग घटनाओं में आगरा और शाहजहांपुर में अज्ञात वाहनों की टक्कर से दो युवकों की मौत हो गई। हादसों ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
आगरा और शाहजहांपुर में दो भीषण सड़क हादसे हुए।
अज्ञात वाहनों ने मृतकों के शवों को घंटों तक रौंदा।
हादसों से राजमार्ग प्रबंधन और पुलिस कार्यशैली पर सवाल।
जागरण संवाददाता, मेरठ। प्रदेश के दो अलग-अलग जिलों से मानवता को शर्मसार करने वाली और व्यवस्था की पोल खोलती तस्वीरें सामने आई हैं। आगरा में लखनऊ एक्सप्रेसवे और शाहजहांपुर में बरेली-सीतापुर हाईवे पर अज्ञात वाहनों की टक्कर से दो युवकों की मौत हो गई। हादसों के बाद कई घंटों तक दोनों शवों को दर्जनों वाहन रौंदते रहे। दोनों ही मामलों में मृतकों की पहचान नहीं हो सकी है।
लखनऊ एक्सप्रेसवे पर दो घंटे तक रौंदा गया शव
लखनऊ एक्सप्रेसवे के नौ किमी पर डौकी के गांव नदौता में मंगलवार सुबह पांच बजे सड़क पार कर रहा एक युवक अज्ञात वाहन की चपेट में आ गया। हादसे के बाद चालक वाहन लेकर फरार हो गया। अगले दो घंटे तक एक्सप्रेसवे से गुजरने वाले वाहन शव को कुचलते रहे, जिससे युवक का सिर और गर्दन का हिस्सा पूरी तरह क्षत-विक्षत होकर सड़क पर बिखर गया।
सूचना मिलने पर यूपीडा के सुरक्षा अधिकारी और नदौता चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। यूपीडा के सुरक्षा अधिकारी सुधीश कुमार शुक्ला ने बताया कि लाल शर्ट और मेंहदी रंग की पैंट पहने मृतक की शिनाख्त के लिए आसपास के गांवों में संपर्क किया जा रहा है। एक्सप्रेसवे पर लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से टक्कर मारने वाले वाहन की तलाश की जा रही है।
बरेली-सीतापुर हाईवे पर पूरी रात शव की दुर्गति
मीरानपुर कटरा क्षेत्र में बरेली-सीतापुर हाईवे पर खिरिया सकटू गांव के निकट अज्ञात वाहन सवार ने पैदल युवक को कुचला, इसके बाद अन्य दर्जनों वाहन चालक उसे पूरी रात रौंदते रहे। मंगलवार सुबह टहलने निकले ग्रामीणों ने जब सड़क पर खून के निशान और क्षत-विक्षत अंग बिखरे देखे, तब पुलिस को सूचना दी गई। सूचना के करीब डेढ़ घंटे बाद पहुंची पुलिस ने अवशेषों को पॉलिथीन में एकत्र करवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
घटनास्थल के आसपास सीसीटीवी कैमरे नहीं थे। दोनों घटनाओं ने राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेसवे प्रबंधन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एनएचएआई, यूपीडा और स्थानीय पुलिस की रात्रि गश्ती टीमें अगर रात में सक्रिय रहती तो शायद घायलों की जान बचाई जा सकती थी या कम से कम शवों की ऐसी दुर्गति न होती।
