विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यूपी सरकार की नई पहल: भू-उपयोग परिवर्तन अब आसान, फ्री-होल्ड प्लाट धारकों को मिलेगा सीधा लाभ

By Pradeep Diwedi Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Tue, 13 Oct 2026 05:45 AM (IST)

उत्तर प्रदेश सरकार ने भू-उपयोग परिवर्तन प्रक्रिया को बेहद सरल और पारदर्शी बनाया है, जिससे फ्री-होल्ड प्लाट मालिकों और बिना स्वीकृत लेआउट वाली संपत्तियों को बड़ा लाभ मिलेगा।

(प्रतीकात्मक फोटो)

(प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. भू-उपयोग परिवर्तन प्रक्रिया अब हुई बेहद सरल और पारदर्शी।

  2. फ्री-होल्ड प्लाट मालिकों और अन-अप्रूव्ड लेआउट को लाभ।

  3. विकास प्राधिकरणों को 6000 वर्ग मीटर तक के अधिकार।

जागरण संवाददाता, मेरठ। प्रदेश सरकार ने संपत्तियों के भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को बेहद सरल और पारदर्शी बना दिया है। नए शासनादेश के तहत अब लोगों को अपनी जमीन का इस्तेमाल (जैसे आवासीय से व्यावसायिक) बदलने के लिए लखनऊ के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) की 17 अक्टूबर को होने वाली बोर्ड बैठक में इस नए शासनादेश को अंगीकृत करने की तैयारी है।

12SKT_106.jpg RR

आर्किटेक्ट व अर्बन प्लानर ईशान गर्ग।

हालांकि प्रक्रिया सरल होने के बाद भी भूउपयोग का लाभ उन कालोनी के निवासियों को नहीं मिल पाएगा जिनकी कालोनी का मानचित्र यानी लेआउट स्वीकृत है। ऐसे लोग यदि अपनी आवासीय भूमि पर व्यावसायिक कार्य करना चाहते हैं तो उन्हें प्रभाव शुल्क जमा करके मिश्रित भूउपयोग के तहत कार्य करना पड़ेगा। यह कहना है आर्किटेक्ट व अर्बन प्लानर ईशान गर्ग का। वह सोमवार को दैनिक जागरण कार्यालय में जागरण विमर्श को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि नए नियमों का सबसे बड़ा लाभ उन फ्री-होल्ड प्लाट के मालिकों को मिलेगा जो प्राधिकरण की किसी अप्रूव्ड लेआउट या योजना का हिस्सा नहीं हैं। या फिर प्राइवेट बिल्डर की स्वीकृत कालोनियों में नहीं रहते। गढ़ रोड या बाईपास जैसे क्षेत्रों में स्थित संपत्तियों और बिना लेआउट वाली कालोनियों के लोगों को इससे बड़ी राहत मिलेगी। इसके साथ ही नियमों (जैसे पर्याप्त चौड़ी सड़क और 10 प्रतिशत पार्क) को पूरा करने वाली अवैध कालोनियों को भी वैध कराने का रास्ता साफ होगा।

वहीं दूसरी ओर प्राधिकरण की अप्रूव्ड कालोनियों (जैसे शास्त्री नगर, गंगा नगर, शताब्दी नगर) में रहने वाले लोग इस योजना का लाभ नहीं उठा सकेंगे। अप्रूव्ड कॉलोनियों के निवासी अपने आवासीय भूखंड का लैंड यूज बदलकर कमर्शियल नहीं करा सकते । हालांकि वे बिल्डिंग बायलाज के तहत एक निश्चित इम्पैक्ट फीस देकर अपनी बिल्डिंग में कमर्शियल गतिविधि करने की अनुमति मांग सकते हैं, लेकिन उनका मूल लैंड यूज आवासीय ही रहेगा। उन्हें मिश्रित भूउपयोग का लाभ दिया जाएगा, जिसके अनुसार आवासीय के साथ ही सिर्फ कुछ हिस्सा व्यावसायिक या अन्य को अनुमति मिलेगी। इसका लाभ 24 मीटर चौड़ी सड़क के किनारे के निर्माण को ही मिलेगा।

यह हुए हैं मुख्य बदलाव
-नए नियम के अनुसार 6000 वर्ग मी. तक के क्षेत्रफल वाले प्लाट का भूउपयोग बदलने का अधिकार अब सीधे विकास प्राधिकरणों को दे दिया गया है। इससे दो-तीन साल तक लटकने वाली फाइलों का निपटारा जल्दी हो सकेगा।
-प्रक्रिया को जवाबदेह बनाते हुए समय सीमा निर्धारित की गई है। मेडा को आवेदन मिलने के 15 दिन के अंदर और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को 22 दिन के अंदर जवाब देना होगा।

-भूउपयोग बदलने की फीस को काफी कम कर दिया गया है। उदाहरण के लिए यदि कोई पब्लिक यूटिलिटी लैंड को कमर्शियल में बदलवाना चाहता है तो पहले 125 प्रतिशत सेस देना पड़ता था, जिसे घटाकर अब 75 प्रतिशत कर दिया गया है।
-नए आदेश के तहत कृषि भूमि और ग्रीन बेल्ट का भू-उपयोग भी बदला जा सकेगा।