कुमार विश्वास के बाद उनके भाई प्रो. विकास शर्मा ने भी UGC पर साधा निशाना, बोले- यह है तुगलकी फरमान
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों पर विवाद जारी है। कवि कुमार विश्वास के बाद उनके भाई प्रोफेसर विकास ...और पढ़ें

प्रोफेसर विकास शर्मा और कवि कुमार विश्वास
HighLights
कुमार विश्वास के भाई बोले- यूजीसी के अधिकारी समाज को न बांटें।
प्रोफेसर विकास शर्मा ने निर्णय वापस लेने की मांग की।
जागरण संवाददाता, मेरठ। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों पर विवाद को लेकर कवि डॉ. कुमार विश्वास ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने स्व. रमेश रंजन की एक कविता पोस्ट की थी। अब उनके प्रोफेसर भाई ने भी यूजीसी पर निशाना साधा है।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर और उपन्यासकार प्रोफेसर विकास शर्मा ने कहा कि यूजीसी के इस तुगलकी फरमान से विश्वविद्यालय पढ़ने-पढ़ाने की बजाय भेदभाव के केंद्र बन जाएंगे। यूजीसी को बताना चाहिए कि उन्होंने विश्वविद्यालयों में संवेदनशील स्थानों का निर्धारण किस आधार पर पर और कैसे किया।
परिसर में कौन सी जगह भेदभाव के लिए सही है और कहां भेदभाव नहीं हो सकता। देश की राजधानी में बैठकर देशभर के विश्वविद्यालयों में भेदभाव स्थल देखने वाले यूजीसी के अधिकारी समाज को न बांटें।
निर्णय वापस लेने की मांग
आल इंडिया इंग्लिश टीचर्स एसोसिएशन के महामंत्री प्रोफेसर विकास शर्मा ने कहा कि छात्रों, प्राध्यापकों, लेखकों व बुद्धिजीवियों को चाहिए कि वे इस निर्णय के विरुद्ध सरकार को बाध्य करें कि वह निर्णय अविलंब वापस ले। अन्यथा मंडल कमीशन की तरह स्थिति भयावह होगी।
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नए बिल में सुधार करे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग : रीता बहुगुणा जोशी
उधर, सहारनपुर के तीतरो में पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं पूर्व भाजपा सांसद रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि नए यूजीसी बिल पर शिक्षक, छात्र और उनके अभिभावक चिंतित हैं। यूजीसी को इसमें सुधार करना चाहिए।
मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थाओं में भेदभाव मिटाने के लिए यूजीसी द्वारा लागू किए गए बिल के कुछ प्रावधानों को लेकर सामान्य वर्ग के शिक्षकों, छात्रों और उनके अभिभावकों में चिंता है। यह उचित होगा कि जिन मुद्दों पर संदेह है, उन पर यूजीसी पुनर्विचार करे, क्योंकि सुधार की गुंजाइश सभी नियमों में बनी रहनी चाहिए, जिससे नया बनने वाला कोई भी कानून जनकल्याणकारी बना रहे।
