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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 11, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मेरठ में वंदेमातरम् के बाद नगर निगम सदन में पहुंचे मुस्लिम पार्षद

By amal chowdhuryEdited By:
Published: Tue, 11 Apr 2017 10:31 AM (IST)Updated: Tue, 11 Apr 2017 10:40 AM (IST)

सोमवार को कार्यकारिणी समिति की बैठक में भी मुस्लिम पार्षदों ने खुद को वंदेमातरम् से दूर रखा।

मेरठ में वंदेमातरम् के बाद नगर निगम सदन में पहुंचे मुस्लिम पार्षद
मेरठ में वंदेमातरम् के बाद नगर निगम सदन में पहुंचे मुस्लिम पार्षद

मेरठ (जागरण संवाददाता)। भले ही वंदेमातरम् के विरोध को लेकर मेरठ नगर निगम की बोर्ड बैठक देश और दुनियाभर में चर्चा का विषय बनी हो लेकिन सोमवार को कार्यकारिणी समिति की बैठक में भी मुस्लिम पार्षदों ने खुद को वंदेमातरम् से दूर रखा। कार्यकारिणी के तीन मुस्लिम पार्षद वंदेमातरम् गायन पूरा होने के बाद सदन में पहुंचे। उनकी प्रतीक्षा में बैठक 45 मिनट देर से शुरू की गई।

नगर निगम बोर्ड तथा कार्यकारिणी की बैठक की शुरुआत वंदेमातरम् गायन से की जाती है लेकिन हर बार मुस्लिम पार्षद वंदेमातरम् शुरू होने से पहले ही बैठक से बाहर चले जाते थे और वंदेमातरम् के बाद सदन में आकर बैठ जाते थे। इसे वंदेमातरम् के अनादर की दृष्टि से देखा जाता था। पिछली बोर्ड बैठक में भाजपा व अन्य दलों के पार्षदों ने वंदेमातरम् का बहिष्कार कर बाहर जाते मुस्लिम पार्षदों का विरोध किया। बोर्ड ने इसे राष्ट्र तथा सदन का अपमान बताते हुए भविष्य में ऐसा करने पर कार्रवाई की चेतावनी देने की बात कही थी।

सोमवार को नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक थी। देश भर की निगाहें मुस्लिम पार्षदों के व्यवहार पर टिकी थी। कार्यकारिणी समिति के कुल 12 सदस्यों में से तीन मुस्लिम हैं। बैठक शुरू होने का निर्धारित समय 11.30 बजे था लेकिन ये तीनों पार्षद 12.15 तक टाउन हॉल के तिलक हाल में नहीं पहुंचे। आखिरकार महापौर ने बैठक शुरू करने की अनुमति दे दी लेकिन जैसे ही वंदेमातरम् का गायन समाप्त हुआ तीनों पार्षद सदन में पहुंच गए।

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हमने विवाद ही समाप्त कर दिया: तीन मुस्लिम कार्यकारिणी सदस्यों में सपा पार्षद दल नेता शाहिद अब्बासी, आरिफ अंसारी और हाजी आदिल थे। तीनों ने कहा कि हम किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहते। संविधान में केवल राष्ट्रगान गाना आवश्यक किया गया है। वंदेमातरम् का संविधान में जिक्र नहीं है। विवाद से बचने के लिए हम खुद वंदेमातरम् के बाद सदन में पहुंचे।

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