मेरठ, जेएनएन। रबी की मुख्य फसलों में शामिल सरसों की बुवाई में सल्फर की कमी नहीं होनी चाहिए। किसान अपने खेत की मिट्टी का मृदा परीक्षण कराते हुए उसकी सेहत का आंकलन जरूर कर लें। फसलों में मृदा परीक्षण के आधार पर आवश्यकतानुसार उर्वरक ही डालने से उत्पादन अच्छा मिलता है।

किसानों को किया संबोध‍ित

यह जानकारी सोमवार को उप कृषि निदेशक ब्रजेश चंद्र ने दिल्ली रोड स्थित मेरठ ब्लाक परिसर में आयोजित कृषि विभाग के कार्यक्रम 'सब मिशन आन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन' आत्मा योजना के अंतर्गत वर्ष 2021-22 विकास खंड स्तरीय कृषक गोष्ठी में किसानों को संबोधित करते हुए दीं। मुख्य अतिथि उप निदेशक कृषि ने 120 किसानों को शोधित मिनी किट का वितरण किया। जिसमें सरसों का बीज व डी-कंपोजर मौजूद था। उन्होंने किसानों से पराली न जलाने की अपील करते हुए गन्ने के अवशेष को मल्चिंग करने की बात कही। उन्होंने कहा कि एक ग्राम मिट्टी में एक लाख जीवाणु होते हैं। खेत में आग लगाने से यह जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। जिससे खेत की उर्वरक क्षमता को नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि एक हेक्टेयर में दस टन पराली जलती है, जिससे निकली हानिकारक गैस हमारे ओजोन परत के लिए काफी नुकसानदेय होती हैं।

सेवानिवृत्त वरिष्ठ कृषि रक्षा अधिकारी मदनपाल सिंह ने कहा कि सरसों की बुवाई करते समय पौधों के बीच कम से कम 15 सेमी का अंतर होना चाहिए। सल्फर की कमी सरसों की बुवाई में नहीं होनी चाहिए। उन्होंने गेहूं की बुवाई के बारे में भी बताया और कहा कि गेहूं का तीन साल पुराना बीज न बोया जाए। जिसमें घुन लग गया हो वह बीज भी बोने से बचना चाहिए। बुवाई के लिए सही बीज का चयन करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसानों को बीज की गुणवत्ता व तकनीक पर विशेष ध्यान देना चाहिए। मंच पर प्राविधिक सहायक सत्यवीर सिंह व बीर सिंह आदि मौजूद रहे। कृषक गोष्ठी में मेरठ ब्लाक के चंदसारा, गून, काजमाबाद आदि गांवों के किसानों ने प्रतिभाग किया। 

Edited By: Taruna Tayal