मेरठ, जेएनएन। शहर की ऐसी कोई सड़क या फिर चौराहा नहीं जो जाम से न कराह रहा हो। सड़क पर जिधर नजर दौड़ती है, वहां अतिक्रमण का राज दिखाई देता है। नगर निगम, थाना और ट्रैफिक पुलिस खानापूरी के सिवाय कुछ नहीं करती।

अतिक्रमण शहर के लिए नासूर बन गया है। फुटपाथ चलने के लिए नहीं बचे हैं। नगर निगम, थाना और ट्रैफिक पुलिस खानापूरी अभियान में जुटी हुई है। यदा-कदा चलने वाले अभियान के कुछ ही देर बाद स्थिति फिर वैसी ही हो जाती है। अतिक्रमण से घंटो का जाम लगता है। कुछ मिलाकर अफसरों की हीलाहवाली का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सिर्फ चालान करने पर ध्यान

यातायात माह के दौरान ट्रैफिक पुलिस का ध्यान सिर्फ चालान करने की ओर है। अभियान के नाम पर सरकारी खजाना भरा जाता है। इस पर किसी का ध्यान नहीं है। अतिक्रमण के चलते हादसे और देरी होना किसी से छिपी नहीं है। थाना पुलिस भी आंखें बंद किए हुए

तत्कालीन एसएसपी नितिन तिवारी ने शहर के सभी थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्र में जाम न लगने देने के निर्देश दिए थे। साथ ही उनको एक-एक मुख्य चौराहे को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए कहा था, लेकिन ना तब ऐसा हुआ था और ना ही अब ऐसा है। पुलिस आंखें मूंदे हुए है। नगर निगम का दस्ता दिखाई नहीं देता

नगर निगम के पास अतिक्रमण विरोधी दस्ता है, लेकिन यह कभी-कभी ही सड़कों पर दिखाई देता है। हैरानी की बात यह है कि निगम कार्यालय के सामने ही पैंठ भी लगती है और दुकानदारों ने अतिक्रमण कर रखा है। सड़क पर पैदल चलना भी दूभर हो गया है। अधिकारियों का ध्यान भी इस ओर नहीं है। मुख्य बाजारों भी कराह रहे

अतिक्रमण के चलते मुख्य बाजार भी कराह रहे हैं। वहां वाहन चलाना तो दूर पैदल चलना भी दूभर है। बेगमपुल, आबूलेन, हापुड़ अड्डा और सेंट्रल मार्केट शहर के प्रमुख बाजार हैं। यहां की हकीकत सभी को पता है। अतिक्रमण और पार्किंग की व्यवस्था न होने के कारण यहां लोगों का परेशान होना आम बात है। इन्होंने कहा

ट्रैफिक पुलिस समय-समय पर अभियान चलाती रहती है। अतिक्रमण न हो इसकी मुख्य जिम्मेदारी नगर निगम की है। उसको कई बार पत्र लिखा गया है। जल्द ही अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया जीएगा।

संजीव वाजपेयी, एसपी ट्रैफिक

Posted By: Jagran

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