मेरठ । बेसहारा गोवंश के संरक्षण को लेकर भले ही सरकार चिंतित हो, लेकिन सूरजकुंड स्थित अस्थाई गोवंश केंद्र में बीमार गोवंश के उपचार में घोर लापरवाही बरती जा रही है। इसके चलते ही यहां गोवंशों की मौत का सिलसिला जारी है।

शुक्रवार तड़के एक और गाय ने दम तोड़ दिया। गाय चोटिल थी। साथ ही कई दिनों से बीमार भी थी। बावजूद इसके गाय को ठंड में खुले में छोड़ दिया गया था। न तो उसकी देखभाल की गई और न ही उसे समय से उचित उपचार मिल सका। नगर निगम के कर्मचारियों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया। अभी भी गोवंश केंद्र में करीब आधा दर्जन से अधिक गोवंश बीमार हैं। केंद्र में हालात ये हैं कि न तो गोवंशों को समय पर चारा मिल रहा है और न पानी। 40 गोवंश टिनशेड के नीचे हैं तो 100 से अधिक खुले में ठिठुर रहे हैं। गत सोमवार को हुई बारिश के बाद से गोवंश केंद्र के एक हिस्से में पानी भरा हुआ है, जबकि अन्य हिस्से में कीचड़ है। इसी में सौ से अधिक बेसहारा गोवंश हैं। वहीं, निगम ने दावा किया था कि ठंड से बचाने के लिए हीटर लगाए गए हैं। अलाव की व्यवस्था की गई है। गुड़ खिलाया जाता है, लेकिन ये दावे केवल टिनशेड के नीचे मौजूद गोवंशों तक ही सीमित हैं। खुले आसमान के नीचे मौजूद गोवंश की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

तीन गोवंश की हो चुकी मौत

गौरतलब है कि बारिश के बाद से केंद्र में अभी तक तीन गोवंश की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी गोवंश केंद्र में पशु चिकित्सक कक्ष नहीं बनाया गया है। डेढ़ सौ से अधिक गोवंश यहां हैं, लेकिन समय पर उनको उपचार मुहैया कराने के लिए पशु चिकित्सक की तैनाती नहीं है। जबकि शासन से निर्देश भी था।

नगर आयुक्त ने किया निरीक्षण

शुक्रवार को नगर आयुक्त मनोज चौहान ने सूरजकुंड वाहन डिपो के अस्थाई गोवंश केंद्र और निर्माणाधीन बराल परतापुर के गोवंश केंद्र का निरीक्षण किया। सूरजकुंड के गोवंश केंद्र में टिनशेड के कार्य को तेज गति से करने और गोवंश की देखरेख ठीक से करने के निर्देश दिए। इन्होंने कहा--

गोवंश बीमार हैं। पशु चिकित्सालय से पशु चिकित्सक भेजे जाते हैं। गोवंश पहले कूड़ा, कचरा और पॉलीथिन खाते थे। अब उनको भूसा और हरा चारा, दाना दिया जा रहा है, जिसको गोवंश पचा नहीं पा रहे हैं। जिससे वह बीमार पड़ रहे हैं। उपचार मुहैया कराया जा रहा है।

डॉ. एके सिंह मुख्य पशु चिकित्सक, पशु पालन विभाग

Posted By: Jagran

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