बिजनौर, जागरण संवाददाता। नजीबाबाद के लाला भोजाराम राजकीय नेत्र चिकित्सालय में कई महीनों बाद आंखों के आपरेशन की व्यवस्था दुरुस्‍त हुई थी। मंगलवार सुबह आपरेशन कराने के लिए एक मरीज पहुंचा भी था, लेकिन अस्पताल कर्मियों ने उसे वापस लौटा दिया।

यह है मामला

दरअसल अब तक सर्जरी के सामान, दवाइयों के अभाव में आठ महीनों से अस्पताल में आंखों के आपरेशन नहीं हो सके थे। अब व्यवस्था दुरुस्‍त होने के अस्‍पताल प्रशासन ने दावे किए थे, लेकिन मरीज को लौटा दिया गया। चिकित्साधिकारी

प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ रजनीश शर्मा ने बताया के आपरेशन से पहले कई तरह की जांच की जाती हैं। इसके अलावा कोरोना महामारी के दौर में कोविड-19 प्रोटोकाल के अंतर्गत आरटी पीसीआर जांच भी कराई जाती है। आपरेशन के लिए आए मरीज ने आरटी पीसीआर जांच नहीं कराई थी। मरीज के ऑपरेशन में अभी कुछ विलंब भी किया जा सकता है। इसलिए आज उन्हें वापस लौटा दिया गया।

सर्जरी के होते हैं मानक

डाक्‍टरों के अनुसार सर्जरी की श्रेणी इमरजेंसी सर्जरी और इलेक्टिव सर्जरी होती हैं। इमरजेंसी सर्जरी में कोई दूसरा विकल्प नहीं होता है, जबकि इलेक्टिव सर्जरी में परिस्थितियों को देखते हुए सर्जरी को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है। 

कोरोना की तीसरी लहर में भर्ती हुआ पहला मरीज

बिजनौर, जागरण संवाददाता। जिले में तीसरी लहर में अब तक 4371 कोरोना संक्रमित मिल चुके हैं। सोमवार को पहला मरीज जिला अस्पताल में भर्ती किया गया। दूसरी लहर तक जिले में 14729 संक्रमित मिले थे। 126 लोगों की कोरोना की चपेट में आकर मौत भी हुई थी। तब सभी मरीजों को भर्ती करना जिला अस्पताल प्रशासन के लिए मुमकिन नहीं था। एक जनवरी से 23 जनवरी तक 4371 संक्रमित मिल चुके हैं। उक्त सभी रोगियों को घर पर ही आइसोलेट किया गया। सभी इनमें से 2916 रोगी स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि अब मात्र 1455 सक्रिय मरीज शेष हैं। तीसरी लहर में सोमवार को पहले कोरोना संक्रमित को एल-1 अस्पताल में भर्ती कराया गया। शेष 1454 मरीज घर पर ही आइसोलेट है और स्वास्थ्य विभाग उन्हें घर पर ही दवा उपलब्ध करा रहा है। सीएमएस डा. अरुण पांडेय बताते हैं कि मरीज को बुखार और गले में खराश है।

Edited By: Parveen Vashishta