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हेलो डॉक्टर : स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज... समय से जांच और भीड़ में मास्क है जरूरी

Published: Mon, 07 Sep 2026 12:54 AM (IST)

वरिष्ठ सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीएन त्यागी ने स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने की ...और पढ़ें

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HighLights

  1. स्वाइन फ्लू के लक्षणों को पहचानकर तुरंत जांच कराएं।

  2. गर्भवती महिलाएं और अन्य हाई रिस्क ग्रुप टीका लगवाएं।

  3. भीड़भाड़ वाली जगहों पर N-95 मास्क का उपयोग करें।

जागरण संवाददाता, मेरठ। अक्सर लोग बुखार, सर्दी-जुकाम, खांसी, बदन दर्द, गले में खराश को सामान्य मर्ज मानकर खुद से इलाज शुरू कर देते हैं। यह गलती कतई न करें। लक्षण उभरते ही सबसे पहले स्वाइन फ्लू की पुष्टि के लिए चिकित्सक को दिखाकर जांच कराएं। जितनी जल्दी जांच कराकर पुष्टि कर लेंगे उतनी ही जल्दी इसमें रिकवरी की संभावना रहती है। एच1एन1 वायरस फेफड़ों को तेजी से नुकसान पहुंचाता है।

एक बार आक्सीजन लेवल गिरने लगता है तो फिर रिकवरी में समय लगता है। कई-कई दिनों तक वेंटिलेटर के सहारे रहना पड़ सकता है। जरा सी जागरूकता आपको जल्द स्वस्थ करने के साथ खर्च भी बचा सकती है। हाई रिस्क में सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाएं हैं। सभी को फ्लू का टीका लगवाना चाहिए। सांस रोगी, टीबी रोगी, डायबिटीज, कैंसर, गुर्दा और लिवर के मरीज भी हाई रिस्क श्रेणी में है। बचाव के लिए भीड़भाड़ वाले स्थलों पर जाने से बचें।

जाएं तो एन-95 मास्क का उपयोग करें। पर्याप्त पानी पिएं, ताकि शरीर का हाइड्रेशन ठीक रहे। यह बातें रविवार को ‘दैनिक जागरण’ के ‘हेलो डाक्टर’ कार्यक्रम में वरिष्ठ सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डा. वीएन त्यागी ने कहीं। उन्होंने जनपद के अलग-अलग क्षेत्रों के पाठकों को फोन पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान भी बताया।

दो दिन से परिवार के सभी सदस्यों को बुखार, सर्दी-जुकाम है। क्या स्वाइन फ्लू की जांच करानी चाहिए?
गौरव शास्त्रीनगर
बिल्कुल, बिना देरी किए जांच कराएं। लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज की माइक्रोबायोलाजी लैब में जांच होती है। चिकित्सक को दिखाएं और जांच के लिए सैंपल भिजवाएं।

कई दिनों से सर्दी-जुकाम है। फ्लू व स्वाइन फ्लू में क्या अंतर होता है?
विवेक, माधवपुरम
हर फ्लू स्वाइन फ्लू हो ये जरूरी नहीं है। स्वाइन फ्लू भी इन्फ्लूएंजा की तरह होता है। लक्षण एक होते हैं, लेकिन स्वाइन फ्लू का संक्रमण अधिक तेजी से फैलता है। गले से लार का सैंपल लेकर आरटी पीसीआर जांच कराते हैं, जैसे कोरोना में होती थी। जांच में एच1एन1 की पुष्टि होने पर ही स्वाइन फ्लू कहा जाता है। डॉक्टर को दिखाकर दवा लें।

यदि सिर्फ सांस लेने में परेशानी है, बुखार, सर्दी-जुकाम नहीं है तो भी स्वाइन फ्लू हो सकता है?
दिनेश पंवार, पल्लवपुरम
सांस फूलने के साथ यदि बुखार, सर्दी-जुकाम नहीं है तो घबराने की बात नहीं है। बुखार, सर्दी-जुकाम के साथ सांस लेने में परेशानी है तो सतर्क होने की जरूरत है। बिना देरी किए स्वाइन फ्लू की पुष्टि के लिए जांच कराएं। सिर्फ सांस फूल रही है तो एक्स-रे जांच करा लें।

बैंक कर्मचारी हूं। कई दिनों से छींकें आ रही हैं। किस वजह से ये समस्या हो सकती है?
संजय, रोहटा रोड
नाक की एलर्जी हो सकती है। सही से उपचार कराएं तो 85 प्रतिशत लोग हमेशा के लिए ठीक हो जाते हैं। घर पर कुत्ता, बिल्ली न पालें। बैंक में नोट गिनते होंगे। नोटों पर जमी धूल, फंगस, बैक्टीरिया की वजह से भी एलर्जी होने की आशंका रहती है।

43 साल की हूं। तीन दिन से गला जाम है। दूध पीने के बाद बहुत तकलीफ हो रही है। बुखार या जुकाम भी नहीं है?
निधि शर्मा, कंकरखेड़ा
ये लेरिंजजाइटिस है। गुनगुना पानी पिएं और गरारे करें। पांच से सात दिन में समस्या खत्म हो जाएगी।
अचानक बुखार, सर्दी-जुकाम खांसी ने जकड़ लिया, क्या करें?
प्रभात, शास्त्रीनगर
बुखार की दवा लें। गरारे करें। दो-तीन दिन में दवा लेने पर ठीक न हो तो तुरंत डाक्टर को दिखाएं।

-कैसे जानें सांस लेने में तकलीफ दिल से है या फेफड़े से?
अजय सेठी, प्रहलाद नगर
दोनों की अलग-अलग जांच होती है। जब लक्षण एक जैसे नजर आते हैं तो चिकित्सक दिल और फेफड़े दोनों की जांचें कराते हैं। कई तरह के टेस्ट आ गए हैं, जिनसे पता चल जाता है कि हवा के जरिए फेफड़े तक कितनी आक्सीजन पहुंच रही है।

मेरी माता को बुखार है। दवा लेने के बाद भी सूखी खांसी ठीक नहीं हो रही है। 10 दिन हो गए हैं?
प्रेमवती, शास्त्रीनगर
यदि एक्स-रे रिपोर्ट और आक्सीजन लेवल सामान्य है तो घबराने की जरूरत नहीं है। कभी-कभी पोस्ट वायरल की वजह से भी ऐसा होता है।

गले में खराश है। चार-पांच दिन हो गए हैं। सांस लेने में दिक्कत है?
उमरावती, जेलचुंगी
डॉक्टर को दिखाएं और स्वाइन फ्लू की पुष्टि के लिए जांच कराएं।

डायबिटीज है। कई दिनों से बुखार के साथ सर्दी-जुकाम है। हालांकि सांस नहीं फूल रही है, क्या करें?
विनोद त्यागी, मवाना
वैसे तो बुखार, सर्दी-जुकाम मौसम के बदलाव की वजह से भी हो सकता है लेकिन स्वाइन फ्लू की पुष्टि के लिए जांच भी करा लें। समय पर जांच होने से गंभीर स्थिति से बच सकेंगे। डायबिटीज के मरीज हाई रिस्क में हैं।

जागरण के 5 सवाल
सबसे खतरनाक फ्लू कौन सा है। इस समय कौन सा ज्यादा सक्रिय है?
इन्फ्लूएंजा ए को सबसे खतरनाक माना जाता है। इसके मुख्य सबटाइप एच1एन1 और एच3एन2 हैं। यह इन्फ्लूएंजा बी की तुलना में अधिक गंभीर होते हैं। एच1एन1 इस समय सक्रिय है, जिसे स्वाइन फ्लू कहते हैं। एच3एन2 मौसमी फ्लू है जो बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में ज्यादा होता है। निमोनिया करता है।

स्वाइन फ्लू में हाई रिस्क में कौन हैं, क्या सावधानी बरतें?
गभर्वती महिलाएं सबसे ज्यादा हाई रिस्क में है। हर गर्भवती को फ्लू की वैक्सीन लगवानी चाहिए। इम्यूनिटी कमजोर होने पर एच1एन1 तेजी से गिरफ्त में लेता है। इसमें आक्सीजन लेवल गिरना सबसे खतरनाक है। डायबिटीज, कैंसर, गुर्दा, लिवर और सांस-टीबी के रोगी भी इस श्रेणी में हैं। सावधानी यही कि फ्लू की वैक्सीन लगवाएं। भीड़ में जाने से बचें। यात्रा करें तो एन-95 मास्क लगाएं।

स्वाइन फ्लू में 48 घंटे के गोल्डन पीरियड का पालन करने से क्या प्रभाव पड़ता है और क्यों जरूरी है?
48 घंटे का गोल्डन पीरियड इसलिए है ताकि मरीज लक्षण उभरते ही डाक्टर को दिखाएं। डाक्टर लक्षणों के आधार पर जांच कराते हैं। स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने पर ओसेल्टामिविर दवा शुरू की जाती है। यह सब निर्धारित समय में हो जाए तो दवा वायरस का प्रभाव तेजी से कम कर देती है।

रिकवरी तेजी से होती है। इलाज में देरी करने पर वायरस फेफड़े, किडनी लिवर को नुकसान पहुंचने का खतरा अधिक होता है। मरीज को यह समझना चाहिए...जितनी जल्दी जांच उतनी जल्दी रिकवरी।

स्वाइन फ्लू एक व्यक्ति से दूसरे में कैसे फैलता है। सामान्य जुकाम और स्वाइन फ्लू में क्या अंतर है। इसके लक्षण क्या होते हैं। डाक्टर से तुरंत कब संपर्क करना चाहिए?
संक्रमित व्यक्ति के छींकने या खांसने से हवा में फैली बूंदों के संपर्क में आने से या दूषित सतहों को छूने के बाद नाक-मुंह छूने से फैलता है। स्वाइन फ्लू के लक्षण अचानक और अधिक तीव्र होते हैं। इसमें तेज बुखार और अत्यधिक शारीरिक कमजोरी महसूस होती है।

तेज बुखार, लगातार खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, थकान, सांस लेने में तकलीफ और कुछ मामलों में उल्टी या दस्त लक्षण होते हैं। यदि सांस लेने में तकलीफ हो, सीने में लगातार दर्द रहे, बुखार दवा लेने के बाद भी कम न हो रहा हो तो बिना देरी किए डाक्टर को दिखाएं।

टीबी मुक्त भारत का सपना संभव होता दिख रहा है? टीबी रोगियों में कमी आई या नहीं?
टीबी मुक्त भारत की बात वर्तमान स्थिति में कहना मुश्किल है। अब भी पहले की तरह मरीज आ रहे हैं। कोरोना काल में जब लोग घरों में थे तब जरूर बीमारी का फैलाव रुकने से टीबी रोगियों की संख्या कम हुई थी। हालांकि, नई दवाएं कारगर हैं। टीबी रोगी ठीक हो रहे हैं। हर मरीज की एमडीआर जांच कराने से ठीक होने का अनुपात बढ़ा है। इसकी जांच प्रक्रिया पहले से अच्छी हुई है। यह निरंतर बनी रही तो टीबी मुक्त भारत का सपना साकार हो सकता है।

प्रोफाइल
डॉ. वीएन त्यागी, वरिष्ठ सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ
एमबीबीएस : केजीएमसी लखनऊ बैच-1991
एमडी : एसएन मेडिकल कालेज आगरा बैच-1998

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