फांसी का फंदा तैयार था, पवन जल्लाद ने 3 बार किया था ट्रायल; लेकिन मेरठ में ऐन वक्त पर रुकी थी सुरेंद्र कोली की फांसी
निठारी कांड में सुरेंद्र कोली की फांसी 8 सितंबर 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम समय में रोक दी थी। ...और पढ़ें

सुरेंद्र कोली का फाइल फाेटो।
HighLights
निठारी कांड में सुरेंद्र कोली को मेरठ जेल में फांसी होनी थी।
आठ सितंबर 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फांसी पर रोक।
जागरण संवाददाता, मेरठ। निठारी कांड के दोषमुक्त सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में आत्महत्या कर ली। वह मेरठ जेल में भी रहा था। उसकी फांसी पर आठ सितंबर 2014 को सुबह चार बजे सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई थी। मेरठ जेल प्रशासन के पास जो फैक्स पहुंचा था, उसमें फांसी की सजा रोकने को कहा गया था। 12 सितंबर 2014 को कोली की फांसी की तारीख मुकर्रर की गई थी।
सुरेंद्र कोली नोएडा के चर्चित निठारी कांड में दोषी पाया गया था और कोर्ट ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी। डासना जेल में फांसी की सुविधा नहीं होने के कारण उसे मेरठ की चौधरी चरण सिंह कारागार में लाया गया था। सीबीआई कोर्ट द्वारा कोली का डेथ वारंट जारी करने और उसे मेरठ जेल में फांसी देने की तिथि सात से 12 सितंबर 2014 के बीच तय की गई थी।
कयास थे कि सात सिंतबर 2014 को उसे फांसी दे दी जाएगी। लेकिन जेल प्रशासन का पूरा दिन तैयारियां पूरी करने में ही बीता था। दोपहर तीन बजे पवन जल्लाद जेल पहुंच गया था। उसने करीब दो घंटे फांसीघर की टेक्निकल समस्या दूर की। फंदा लगाते हुए फांसीघर के नट-बोल्ट से लेकर ग्रीस और आयलिंग की। इस दौरान तीन बार डेमो करते हुए फांसीघर को चलाया गया था।
कोली ने उस दिन कोई डिमांड नहीं की। अपने परिजनों से मिलने की इच्छा भी नहीं जताई। कोली को सिर्फ उसके निकटतम रिश्तेदारों (मां, पत्नी या बच्चों) से ही मुलाकात की अनुमति दी जा सकती थी। मेरठ जेल में उसका चिकित्सीय परीक्षण भी किया जा चुका था।
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उस समय मनोचिकित्सक के सभी सवालों के सहज भाव में जवाब दिए थे। 12 साल पहले सुरेंद्र कोली करीब एक सप्ताह मेरठ की मीडिया में सुर्खियों में रहते थे। जेल परिसर में हर रोज कोली को लेकर दिल्ली तक की मीडिया ने डेरा डाला हुआ था।
