मेरठ (सर्वेंद्र पुंडीर)। माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के मामले में बड़ा सवाल जेल के अंदर पिस्टल का पहुंचना है। बागपत पुलिस से लेकर मेरठ व लखनऊ एसटीएफ तक इसी माथापच्ची में लगी है। अभी तक की जांच के बाद मेरठ एसटीएफ इस नतीजे पर पहुंची है कि सात तरीकों से पिस्टल जेल के अंदर भेजी जा सकती है। इनमें दो तरीकों पर मुख्य फोकस है। पहला, जेल के कर्मचारी या होमगार्ड द्वारा पिस्टल अंदर पहुंचाई जा सकती है, जबकि दूसरा माध्यम जेल में सब्जी सप्लाई करने वाले हो सकते हैं। एसटीएफ ने बागपत जेल में सब्जी सप्लाई करने वाले कई लोगों से पूछताछ भी की है। 

इस दिशा में काम कर रही एसटीएफ

  • पिस्टल को होमगार्ड या जेल का कोई कर्मचारी अंदर ले जा सकता है। 
  • खाने के टिफिन में छिपाकर भी भेजी जा सकती है। 
  • जेल में सब्जी सप्लाई करने वाले वाहन से।   
  • जेल के पीछे जंगल की तरफ बनी दीवारों से अंदर फेंककर। 
  • राठी की तलाशी न होने के कारण पेशी से लौटते वक्त खुद पिस्टल लेकर अंदर दाखिल हो सकता है।  
  • मिलाई करने वालों का रिकॉर्ड न मिलना। ऐसे में मिलाई करने वाला भी पिस्टल ले जा सकता है।
  • जेल में दाखिल होते समय मुन्ना बजरंगी के बैग की तलाशी भी नहीं हुई। 

...इसलिए .30 बोर के पिस्टल का प्रयोग

बागपत जेल मुन्ना बजरंगी हत्याकांड में .30 बोर की पिस्टल प्रयोग में लाई गई। यह पिस्टल स्पेन की विटोरिया लामा कंपनी बनाती है। चीन में भी यह पिस्टल बनती है। इसमें 7.62 एमएम की गोली चलती है। खास बात यह है कि मिïट्टी में दबानेे या नमी से इसको नुकसान नहीं पहुंचता। कारतूस भी फंसने का खतरा नहीं होता। एसटीएफ को अनुमान है कि इसी कारण इस बोर का इस्तेमाल किया गया, जबकि .32 बोर के पिस्टल का सिस्टम नमी के चलते प्रभावित हो जाता है। 

जल्द ही राजफाश होगा

एसटीएफ एसपी आलोक प्रियदर्शी ने कहा कि पिस्टल कैसे अंदर पहुंची, यही सबसे बड़ा सवाल है। पुलिस के अलावा हम भी कई पहलुओं पर काम कर रहे हैं। कुछ क्लू मिले हैं। जल्द ही राजफाश किया जाएगा। 

By Nawal Mishra