यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 01, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
स्ट्रेचर पर लेटे पिता से बेटों ने कराया संपत्ति का बंटवारा
बीमार पिता को बेटे अस्पताल ले जाने की जगह बेटे एंबुलेंस में लिटाकर निबंधक कार्यालय लेकर पहुंचे और संपत्ति के ...और पढ़ें

मेरठ (जेएनएन)। पिता वाकई में पिता होता है, जीवन के अंतिम क्षणों में भी वह अपने घर के लोगों को सुख ही देता चाहता है, लेकिन बेटों को उनके हाथ पर दया भी नहीं आती है। मामला मेरठ का है, जहां पर बेहद बीमार पिता को बेटे अस्पताल ले जाने की जगह बेटे एंबुलेंस में लिटाकर निबंधक कार्यालय लेकर पहुंचे और संपत्ति के बंटवारे के कागजों पर किसी तरह से उनसे वसीयत की प्रक्रिया पूरी करा ली।
अपने बाद बेटों में संपत्ति को लेकर होने वाले विवाद की आशंका से विचलित बीमार वृद्ध ने स्टे्रचर पर लेटे-लेटे ही बेटों के बीच संपत्ति का बंटवारा कर दिया। पुत्र भी एंबुलेंस में कलक्ट्रेट में निबंधक कार्यालय ले आए। जहां बीमार वृद्ध ने किसी प्रकार वसीयत की प्रक्रिया पूर्ण की। लिसाड़ी गेट स्थित तारापुरी निवासी निजामद्दीन काफी समय से बीमार चल रहे हैं। तबीयत काफी अधिक खराब होने पर निजामुद्दीन को अपने पांच बेटों के बीच संपत्ति के बंटवारे को लेकर होने वाली कलह की चिंता हुई। उन्होंने बेटों की आपसी सहमति के बाद संपत्ति के वितरण के लिए वसीयत करने का निर्णय लिया।
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कल दोपहर पांचों बेटे उन्हें एंबुलेंस में लेकर निबंधक कार्यालय पहुंचे। यहां एंबुलेंस में ही वसीयत की कुछ प्रक्रियाओं को अधिवक्ता की मदद से पूर्ण कराया गया। कुछ प्रक्रियाओं को पूर्ण करने के लिए बीमार वृद्ध को स्टे्रचर पर लेकर कार्यालय के अंदर लाया गया। इसके बाद सारी प्रक्रिया पूरी हुई।
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उधर, इस संबंध में वृद्ध के साथ आए बेटों से बात करने का प्रयास किया गया। उन्होंने बात करने से साफ इन्कार कर दिया। स्टेचर पर कार्यालय में लेकर आने से कुछ देर के लिए लोगों का ध्यान बीमार बुजुर्ग पर गया। कुछ लोगों ने परिवार के लोगों से बात करने की कोशिश की पर वह लोग घर का मामला बताकर शांत ही रहे।
नाते हैं नातों का क्या
मेरठ के लिसाड़ी गेट के रहने वाले निजामुद्दीन लंबे समय से बीमार चल रहे हैं। तस्वीर में जो एंबुलेंस और स्टेचर आप देख रहे हैं, उससे वह किसी अस्पताल नहीं आए हैं।

गंभीर हालत में कलेक्ट्रेट स्थित निबंधक कार्यालय आए हैं। अपने पांच बेटों के नाम अपनी संपत्ति की वसीयत करने। निबंधक दफ्तर के कर्मचारी ने पूछ लिया, ऐसी हालत में क्यों आ गए। तो जवाब दिया कि मेरे बाद बेटों में झगड़ा न हो..इसी कारण आ गया।
