सहारनपुर, जागरण संवाददाता। चार साल पहले बडग़ांव थानाक्षेत्र के गांव शब्बीरपुर में हुई जातीय हिंसा के पीडि़तों को एससी-एसटी एक्ट की धाराओं के अनुरूप लाभ न मिलने को न्यायालय ने गंभीरता से लिया है। विशेष न्यायालय एससीएसटी सहारनपुर के विशेष न्यायाधीश ने प्रदेश के डीजीपी व अनुसूचित जाति आयोग के राष्ट्रीय सचिव समेत सांसद को नोटिस भेजकर 20 दिसंबर को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है। इस संबंध में शब्बीरपुर निवासी दल सिंह ने पांच मई 2017 को कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था।

यह है मामला

महाराणा प्रताप जयंती पर पांच मई 2017 को गांव शब्बीरपुर में हुई जातीय हिंसा में अनुसूचित जाति के 50 से अधिक लोग बेघर हो गए थे। एससी एसटी एक्ट संशोधित अधिनियम 2016 में हत्या, दुष्कर्म और डकैती के पीडि़तों को पांच हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन, मंहगाई भत्ता, उनके बच्चों को स्नातक तक की शिक्षा आवासीय विद्यालयों में दिलाने, मकान और परिवार को रोजगार देने के प्रावधान किए गए हैं। यहां इन प्रावधानों के उल्लंघन के कारण इसकी शिकायत की गई थी।

इन्हें किया गया तलब

कोर्ट ने सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सचिव आर सुब्रमण्यम, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सचिव, उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, डीजीपी, प्रमुख सचिव समाज कल्याण, निदेशक समाज कल्याण, जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, सांसद हाजी फजलुर्रहमान को नोटिस जारी कर तलब किया है।

बनाई गई थी कमेटी

जनपद स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में एससी एसटी एक्ट का क्रियान्वयन सुनिश्चित कराने के लिए एक कमेटी गठित है। राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हाई पावर कमेटी गठित है। इसमें राज्य के कई मंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी, प्रमुख सचिव समाज कल्याण, निदेशक समाज कल्याण और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य शामिल हैं। डीएम सहारनपुर ने हत्या, दुष्कर्म और डकैती के पीड़ितों के लिए कई बार शासन को पत्र लिखे, लेकिन प्रदेश सरकार ने संज्ञान नहीं लिया।

 

Edited By: Parveen Vashishta