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जागरण संवाददाता, मेरठ : 17वीं राजपूत बटालियन के नायक धर्मवीर सिंह भारत-पाक युद्ध 1971 में शामिल थे। डेरा बाबा नानक में मोर्चा संभालने के दौरान जख्मी हुए। एक हाथ, एक पैर और एक आंख खो बैठे। आरवीसी के सिपाही बीर सिंह 11 जनवरी 1981 को जम्मू-कश्मीर के सियाचिन में तैनाती के दौरान फ्रॉस्ट बाइट हो गया। दाहिना पैर काटना पड़ा। इनकी ही तरह मेरठ में शाहजहांपुर निवासी सिपाही सतीश कुमार, सहारनपुर के राइफलमैन हिम्मत सिंह नायक चंद्रपाल सिंह आदि ने देश के दुश्मनों के खिलाफ लड़ते हुए शरीर को कोई न कोई अंग गवाया है। देश के इन सपूतों में जो समानता है वह देश के लिए कुछ कुर्बानी देने की है। इन्हें गर्व है कि वे देश के काम आए। उनके इसी साहस, शौर्य और गौरव को सम्मानित करने के लिए पश्चिम यूपी सब-एरिया की ओर से सोमवार को दिव्यांग सैनिकों के लिए विशेष कार्यशाला और सम्मान समारोह का आयोजन किया।

सम्मान से चौड़ा हुआ सीना

एक सैनिक को इससे ज्यादा उम्मीद नहीं रहती की कि लोग उनके योगदान को याद रखें। उनको यही सम्मान देने के लिए आरवीसी सेंटर एंड कॉलेज के भंडारी हॉल में आयोजित विशेष सम्मान समारोह में सब-एरिया कमांडर मेजर जनरल पीएस साई ने उन्हें सम्मानित किया। इस मौके पर भारतीय स्टेट बैंक की ओर से दिव्यांग सैनिकों को उनकी जरूरत के अनुरूप उपकरण प्रदान किए गए। एसबीआइ चेयरमैन रजनीश कुमार ने 35 दिव्यांग सैनिकों को उपकरण प्रदान किया। नायक बृजपाल सिंह, नायक धर्मवीर सिंह एवं सिपाही बीर सिंह को मोडीफाइड स्कूटर प्रदान किया। एयरफोर्स के कारपोरल सचिन कुमार, नायक उदय सिंह और अनुज कुमार को मोटर चालित व्हील चेयर प्रदान किया गया।

'केयर ऑफ केयर गीवर'

मेरठ जोन के दिव्यांग सैनिकों के लिए दो विशेष कार्यशाला भी आयोजित की गई। दिव्यांग सैनिक वर्ष के अंतर्गत मेरठ सैनिक अस्पताल की ओर से आयोजित कार्यशाला का विषय 'रोल ऑफ फिजियोथेरेपी' और काउंसिलिंग एवं साइकोलॉजिकल वर्कशॉप पर आधारित 'केयर ऑफ द केयर-गीवर' रहा। इसमें दिव्यांग सैनिकों को जीवन का महत्व समझाने के साथ ही उनकी समस्याओं के निस्तारण के विषय पर भी चर्चा हुई। इस अवसर पर पूर्व सैनिक संगठन मेरठ से ब्रिगेडियर रणबीर सिंह, मेजर राजपाल सिंह सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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